Viral News: ग्रेटर नोएडा में सीनियर सिटिजन सोसाइटी की लिफ्ट में 45 मिनट तक फंसा रहा परिवार, पुलिस ने लोहे की रॉड से खोलकर बचाए छह लोग।
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक भयावह घटना ने स्थानीय लोगों और प्रशासन का ध्यान खींचा है। बीटा-2 थाना क्षेत्र के अंतर्गत सीनियर....
ग्रेटर नोएडा : उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक भयावह घटना ने स्थानीय लोगों और प्रशासन का ध्यान खींचा है। बीटा-2 थाना क्षेत्र के अंतर्गत सीनियर सिटिजन सोसाइटी में 8 जून 2025 की देर रात एक परिवार के छह सदस्य एक लिफ्ट में करीब 45 मिनट तक फंस गए। यह घटना तब हुई जब परिवार वृंदावन से धार्मिक यात्रा पूरी कर देर रात करीब 3:30 बजे अपनी दूसरी मंजिल की फ्लैट की ओर जा रहा था। लिफ्ट के अचानक रुकने और अलार्म सिस्टम के काम न करने से परिवार में दहशत फैल गई।
डायल 112 पर कॉल करने के बाद बीटा-2 थाना पुलिस की पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल (PRV) टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर लोहे की रॉड की मदद से लिफ्ट का दरवाजा खोलकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना 8 जून 2025 की देर रात सीनियर सिटिजन सोसाइटी के जी-ब्लॉक में हुई। परिवार, जिसमें छह सदस्य शामिल थे, वृंदावन से धार्मिक यात्रा पूरी कर देर रात घर लौटा था। स्थानीय समाचार स्रोतों के अनुसार, परिवार अपनी दूसरी मंजिल की फ्लैट की ओर जा रहा था, जब लिफ्ट अचानक रुक गई। पुलिस और परिवार के बयानों के आधार पर, लिफ्ट के रुकने का कारण ओवरलोडिंग बताया गया है। लिफ्ट का अलार्म बटन और कॉलिंग सिस्टम काम नहीं कर रहा था, जिसके कारण परिवार को तत्काल मदद नहीं मिल सकी।
लिफ्ट में फंसे परिवार ने पहले सोसाइटी के रखरखाव कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर उन्होंने आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल किया। डायल 112 पर कॉल प्राप्त होने के बाद बीटा-2 थाना की PRV टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने लोहे की रॉड का उपयोग कर लिफ्ट के दरवाजे को मैन्युअली खोला और करीब 45 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद सभी छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस कर्मचारी दरवाजा खोलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि परिवार के सदस्य डर और घबराहट में मदद की गुहार लगा रहे हैं। एक महिला को यह कहते सुना गया, "चश्मा निकाल लो, पहले पैर बाहर निकालो," जबकि एक पुरुष पुलिस की मदद से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था।
इस कार्य में शामिल PRV टीम की त्वरित कार्रवाई की सराहना की गई है। उप पुलिस आयुक्त (DCP) लखन यादव ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, "हमें डायल 112 के माध्यम से एक परिवार के लिफ्ट में फंसने की सूचना मिली थी। हमारी PRV टीम तुरंत मौके पर पहुंची और सभी छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कोई भी घायल नहीं हुआ।" इस सफल बचाव कार्य के लिए पुलिस आयुक्त ने PRV टीम को 25,000 रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया।
परिवार ने भी पुलिस की तत्परता की प्रशंसा की। एक परिवार के सदस्य ने स्थानीय पत्रकारों को बताया, "हम लगभग 45 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहे और हमें बहुत डर लग रहा था। पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया ने हमें बचा लिया। हम उनके बहुत आभारी हैं।"
- ग्रेटर नोएडा में लिफ्ट दुर्घटनाओं का बढ़ता सिलसिला
यह घटना ग्रेटर नोएडा और नोएडा में लिफ्ट से जुड़ी दुर्घटनाओं की एक और कड़ी है, जो हाई-राइज सोसाइटीज में लिफ्ट रखरखाव और सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर करती है। हाल के वर्षों में, इस क्षेत्र में लिफ्ट में फंसने और दुर्घटनाओं की कई घटनाएं सामने आई हैं। उदाहरण के लिए:
मई 2025: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आस्था ग्रीन सोसाइटी में छह लोग, जिनमें एक महिला शामिल थी, क्लबहाउस की लिफ्ट में 30 मिनट तक फंसे रहे। निवासियों ने लिफ्ट के अलार्म सिस्टम के काम न करने और रखरखाव की कमी के खिलाफ बिसरख पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की थी।
अप्रैल 2023: ग्रेटर नोएडा की गोल्फ गार्डेनिया सोसाइटी में एक परिवार के आठ सदस्य, जिनमें दो वरिष्ठ नागरिक और एक बच्चा शामिल था, लिफ्ट में लगभग दो घंटे तक फंसे रहे। फायर ब्रिगेड ने हाइड्रोलिक कटर की मदद से दरवाजा काटकर उन्हें बचाया।
अगस्त 2024: नोएडा के सेक्टर-79 की एलिट गोल्फ ग्रीन सोसाइटी में एक सात साल की बच्ची लिफ्ट में 20 मिनट तक फंसी रही। बच्ची इतनी डर गई थी कि उसे शांत करने के लिए पानी छिड़कना पड़ा।
इन घटनाओं ने ग्रेटर नोएडा और नोएडा की हाई-राइज सोसाइटीज में लिफ्ट सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं। निवासियों ने बार-बार रखरखाव की कमी, अलार्म सिस्टम की खराबी, और लिफ्ट ऑपरेटरों की अनुपस्थिति की शिकायत की है। कई सोसाइटीज में मासिक रखरखाव शुल्क के बावजूद, नियमित लिफ्ट सर्विसिंग और सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जा रही है।
- लिफ्ट सुरक्षा और कानूनी प्रावधान
उत्तर प्रदेश में लिफ्ट दुर्घटनाओं को रोकने के लिए 2017 में उत्तर प्रदेश लिफ्ट और एस्केलेटर एक्ट लागू किया गया था, जिसके तहत सभी लिफ्टों का नियमित रखरखाव और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। इस कानून के तहत, लिफ्ट मालिकों और सोसाइटी प्रबंधन को नियमित रूप से लिफ्ट की जांच और प्रमाणन कराना होता है। हालांकि, कई सोसाइटीज में इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। 2023 में, नोएडा के एक आवासीय परिसर में लिफ्ट के तार टूटने से 73 वर्षीय एक महिला की मृत्यु हो गई थी, जिसने इस कानून के प्रभावी कार्यान्वयन पर सवाल उठाए थे। निवासियों और विशेषज्ञों का कहना है कि लिफ्ट दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों और सोसाइटी प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है। एक निवासी ने कहा, "हम मोटा रखरखाव शुल्क देते हैं, लेकिन लिफ्ट की सर्विसिंग नियमित रूप से नहीं होती। अगर अलार्म सिस्टम काम करता, तो शायद हमें इतनी देर तक इंतजार न करना पड़ता।"
इस घटना के बाद, सीनियर सिटिजन सोसाइटी के निवासियों ने प्रबंधन से लिफ्ट के रखरखाव और सुरक्षा मानकों की जांच की मांग की है। कुछ निवासियों ने कहा कि वे अब लिफ्ट का उपयोग करने से डरते हैं और सीढ़ियों का सहारा ले रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "यह पहली बार नहीं है जब लिफ्ट में लोग फंस गए हैं। प्रबंधन को जवाबदेह ठहराने की जरूरत है।" स्थानीय प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। बीटा-2 पुलिस ने कहा कि उन्होंने अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं की है, लेकिन वे सोसाइटी प्रबंधन से लिफ्ट के रखरखाव रिकॉर्ड की जांच करेंगे। डीसीपी लखन यादव ने कहा, "हम सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। सोसाइटी प्रबंधन को सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।" ग्रेटर नोएडा की सीनियर सिटिजन सोसाइटी में हुई यह घटना न केवल एक परिवार के लिए डरावना अनुभव थी, बल्कि यह हाई-राइज सोसाइटीज में लिफ्ट सुरक्षा की खामियों को भी उजागर करती है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने इस बार एक बड़ी दुर्घटना को टाल दिया, लेकिन यह सवाल उठता है कि अगर अलार्म सिस्टम काम करता या रखरखाव नियमित होता, तो शायद यह स्थिति उत्पन्न ही न होती। यह घटना प्रशासन, सोसाइटी प्रबंधन, और निवासियों के लिए एक चेतावनी है कि लिफ्ट सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
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