Viral News: हरियाणा में मुआवजा न मिलने से नाराज किसान बलविंदर सिंह ने हाईवे पर बनाई दीवार, 2013 के कोर्ट आदेश पर कार्रवाई में देरी। 

हरियाणा के पाहोवा में एक किसान, बलविंदर सिंह, ने अपनी जमीन के मुआवजे को लेकर सरकार के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया....

Jun 12, 2025 - 10:32
Jun 12, 2025 - 10:33
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Viral News: हरियाणा में मुआवजा न मिलने से नाराज किसान बलविंदर सिंह ने हाईवे पर बनाई दीवार, 2013 के कोर्ट आदेश पर कार्रवाई में देरी। 

चंडीगढ़ : हरियाणा के पाहोवा में एक किसान, बलविंदर सिंह, ने अपनी जमीन के मुआवजे को लेकर सरकार के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी जमीन से होकर गुजरने वाले राज्य राजमार्ग पर दीवार बनाकर सड़क को अवरुद्ध कर दिया, जिससे क्षेत्र में यातायात प्रभावित हुआ। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब बलविंदर सिंह ने अपनी 22 मरला जमीन के लिए उचित मुआवजा या जमीन वापसी की मांग को लेकर यह कदम उठाया। उनकी शिकायत है कि 2010 में उनकी जमीन की पैमाइश के बाद पता चला कि राज्य राजमार्ग उनकी जमीन से होकर गुजरता है, और 2013 में पाहोवा कोर्ट ने सरकार को मुआवजा देने या जमीन लौटाने का आदेश दिया था। लेकिन, 12 साल बाद भी इस आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस घटना ने हरियाणा में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है।

  • बलविंदर सिंह का मामला

बलविंदर सिंह, हरियाणा के पाहोवा के रहने वाले एक किसान, अपनी 22 मरला जमीन को लेकर पिछले डेढ़ दशक से सरकार के साथ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। 2010 में उनकी जमीन की पैमाइश के दौरान यह खुलासा हुआ कि राज्य राजमार्ग उनकी जमीन के हिस्से से होकर गुजरता है। इस खुलासे के बाद, बलविंदर ने पाहोवा कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने अपनी जमीन के लिए उचित मुआवजा या जमीन की वापसी की मांग की। 2013 में कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वह या तो बलविंदर को उचित मुआवजा दे या उनकी जमीन वापस करे।

हालांकि, कोर्ट के इस आदेश के बावजूद, सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। बलविंदर का कहना है कि बार-बार प्रशासन से संपर्क करने और अनुरोध करने के बावजूद, न तो उन्हें मुआवजा मिला और न ही उनकी जमीन लौटाई गई। निराशा और गुस्से में, बलविंदर ने आखिरकार 10 जून 2025 को राजमार्ग पर दीवार बनाकर अपना विरोध दर्ज किया। इस कदम से यातायात प्रभावित हुआ, छोटे वाहनों को पास के खेतों से होकर गुजरना पड़ा, और बड़े वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया गया।

बलविंदर सिंह ने राजमार्ग पर दीवार बनाकर न केवल अपनी मांग को बल दिया, बल्कि यह भी दिखाया कि किसान अपनी जमीन के लिए कितने संवेदनशील हैं। उनके इस कदम ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए, जिसमें लोग बलविंदर के साहस की तारीफ कर रहे हैं। एक एक्स यूजर ने लिखा, "सौ सौ सलाम है इस किसान को, इन मदमस्त अधिकारियों के होश सिर्फ किसान ही ठिकाने लगा सकता है।"

इस विरोध के कारण पाहोवा क्षेत्र में यातायात व्यवस्था पर असर पड़ा। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन बलविंदर और उनके समर्थकों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे दीवार नहीं हटाएंगे। इस घटना ने हरियाणा में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में देरी के व्यापक मुद्दे को उजागर किया है, जो कई किसानों के लिए एक गंभीर समस्या बनी हुई है।

  • हरियाणा में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा विवाद

हरियाणा में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा विवाद कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में, कई किसानों ने राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के लिए अपनी जमीन अधिग्रहित होने के बाद उचित मुआवजे की मांग की है। 2013 के राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट (2013 अधिनियम) के तहत, किसानों को उनकी जमीन की बाजार दर से चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए। हालांकि, कई मामलों में, किसानों को कम मुआवजा दिया जाता है, या मुआवजा देने में भारी देरी होती है।

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हाल के वर्षों में कई बार इस मुद्दे पर हस्तक्षेप किया है। उदाहरण के लिए, 2023 में कोर्ट ने पंजाब सरकार को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा अधिग्रहित जमीन के लिए मुआवजा वितरण में देरी के लिए स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जिन मामलों में कोई विवाद नहीं है, वहां मुआवजा चार सप्ताह के भीतर जारी किया जाना चाहिए। इसके बावजूद, बलविंदर सिंह जैसे कई किसान अभी भी मुआवजे के लिए इंतजार कर रहे हैं। 2019 में, हरियाणा के मानेसर में किसानों ने 688 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में उनके पक्ष में फैसला सुनाया और हरियाणा सरकार को मुआवजा देने का निर्देश दिया। इसी तरह, 2020 में महेंद्रगढ़ के किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए अधिग्रहित जमीन के लिए उचित मुआवजे की मांग को लेकर धरना दिया था। इन घटनाओं से साफ है कि हरियाणा में मुआवजा वितरण में देरी और असमानता एक दीर्घकालिक समस्या है।

  • कोर्ट का आदेश

बलविंदर सिंह के मामले में, 2013 में पाहोवा कोर्ट ने स्पष्ट रूप से सरकार को मुआवजा देने या जमीन लौटाने का आदेश दिया था। इस आदेश के तहत, सरकार को 2013 अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना था, जिसमें बाजार दर से चार गुना मुआवजा और पुनर्वास लाभ शामिल हैं। हालांकि, बलविंदर का आरोप है कि सरकार ने न तो मुआवजा दिया और न ही जमीन लौटाई। उनकी शिकायत यह भी है कि प्रशासन ने इस मामले में उनकी बार-बार की अपीलों को अनसुना किया। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाया है। 2023 में, कोर्ट ने कहा था कि 2013 अधिनियम उन मामलों पर लागू होता है, जहां मुआवजा 31 दिसंबर 2014 से पहले जमा किया गया था, लेकिन अधिकांश भूमिधारकों को भुगतान नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी जोर दिया कि मुआवजा निर्धारण में पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई जरूरी है, खासकर जब प्रभावित लोग ज्यादातर किसान और ग्रामीण हैं।

बलविंदर सिंह के विरोध के बाद, स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने का आश्वासन दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम इस मामले की गंभीरता को समझते हैं और कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए उचित कदम उठाएंगे।" हालांकि, अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, और बलविंदर ने साफ कर दिया है कि वह तब तक विरोध जारी रखेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं। इस घटना ने हरियाणा में किसान संगठनों और विपक्षी दलों का ध्यान खींचा है। अखिल भारतीय किसान सभा ने बलविंदर के समर्थन में बयान जारी किया और कहा कि सरकार को तुरंत मुआवजा देना चाहिए। विपक्षी नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर किसानों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है।

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एक विपक्षी नेता ने कहा, "यह शर्मनाक है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा नहीं मिल रहा। सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।" बलविंदर सिंह का राजमार्ग पर दीवार बनाने का कदम हरियाणा में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में देरी की गंभीर समस्या को उजागर करता है। यह घटना न केवल एक किसान के व्यक्तिगत संघर्ष को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे सरकारी लापरवाही और नौकरशाही की सुस्ती किसानों को हताशा की ओर धकेल सकती है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बार-बार इस मुद्दे पर सरकार को फटकार लगाई है, लेकिन बलविंदर जैसे कई किसान अभी भी न्याय के इंतजार में हैं।

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