किसान को पहले बुरी तरह पीटा, फिर अपनी थार जीप चढ़ा दी, मौत, नाबालिग बेटियां बचाने आईं तो उनके कपड़े फाड़ दिए, बीजेपी नेता पर किसान की बेरहमी से हत्या का आरोप।
मध्य प्रदेश का गुना जिला धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का क्षेत्र है, जहां सिंध नदी बहती है और खेतों की हरियाली चारों ओर बिखरी रहती है। लेकिन रविवार को यहां फतेहगढ़ थाना क्षेत्र
मध्य प्रदेश का गुना जिला धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का क्षेत्र है, जहां सिंध नदी बहती है और खेतों की हरियाली चारों ओर बिखरी रहती है। लेकिन रविवार को यहां फतेहगढ़ थाना क्षेत्र के गणेशपुरा गांव में एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। एक साधारण किसान रामस्वरूप धाकड़ की जमीन विवाद में बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि स्थानीय बीजेपी नेता महेंद्र नागर और उसके साथियों ने पहले उसे लाठियों और डंडों से पीटा, फिर अपनी थार जीप से उसके शरीर को कुचल दिया। जब रामस्वरूप की नाबालिग बेटियां पिता को बचाने पहुंचीं, तो उन पर भी हमला बोला गया। उनके कपड़े फाड़ दिए गए और बदसलूकी की गई। गांव में दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग भी की गई। घायल रामस्वरूप को एक घंटे तक अस्पताल ले जाने नहीं दिया गया, जिससे इलाज में देरी हुई और आखिरकार उसकी मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ परिवार को बर्बाद कर दिया, बल्कि पूरे समाज में सवाल खड़े कर दिए कि सत्ता का रंग कैसे दबंगई में बदल जाता है।
घटना रविवार दोपहर की है। रामस्वरूप धाकड़, उम्र करीब 40 वर्ष, अपनी पत्नी विनोद बाई के साथ खेत की ओर जा रहे थे। उनका खेत छह बीघा जमीन का था, जिस पर लंबे समय से विवाद चल रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, महेंद्र नागर, जो बीजेपी के किसान मोर्चा से जुड़े स्थानीय नेता हैं, इस जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। महेंद्र राजस्थान के रहने वाले हैं, लेकिन गुना में उनकी राजनीतिक सक्रियता है। रामस्वरूप ने कई बार इसका विरोध किया था, लेकिन हर बार धमकियां मिलती रहीं। रविवार को जैसे ही रामस्वरूप खेत के पास पहुंचे, महेंद्र और उसके लगभग 15 साथी वहां पहले से मौजूद थे। उन्होंने रामस्वरूप को घेर लिया। पहले तो सबने मिलकर लाठियों, डंडों और धारदार हथियारों से उस पर हमला कर दिया। रामस्वरूप जमीन पर गिर पड़े। फिर महेंद्र ने अपनी थार जीप स्टार्ट की और रामस्वरूप के ऊपर चढ़ा दी। जीप के टायर कई बार उसके शरीर को रौंदते चले गए। यह नजारा इतना भयानक था कि आसपास के लोग डर के मारे चुपचाप देखते रह गए।
रामस्वरूप की चीखें सुनकर उनकी दो नाबालिग बेटियां तनिषा (17) और कृष्णा (17) दौड़कर आईं। दोनों बहनों ने पिता को बचाने की कोशिश की। लेकिन आरोपियों ने उन पर भी जानलेवा हमला कर दिया। तनिषा ने बाद में बताया कि महेंद्र ने उसके ऊपर बैठकर हाथापाई की और उसके कपड़े फाड़ दिए। कृष्णा के साथ भी ऐसा ही सलूक हुआ। बहनों के अलावा पत्नी विनोद बाई और रामस्वरूप के भाई राजेंद्र नागर भी घायल हो गए। राजेंद्र की उम्र 50 वर्ष है। आरोपियों ने बंदूकों से हवाई फायरिंग की, जिससे गांव में दहशत फैल गई। कोई भी आगे आने की हिम्मत नहीं कर पाया। रामस्वरूप खून से लथपथ थे। परिवार वाले उन्हें उठाकर अस्पताल ले जाना चाहते थे, लेकिन आरोपी घेराबंदी करके खड़े हो गए। उन्होंने बंदूक तानकर धमकी दी कि किसी को अस्पताल नहीं जाने देंगे। करीब एक घंटे तक यह ड्रामा चला। आखिरकार, ग्रामीणों के हंगामे पर पुलिस पहुंची। तब जाकर रामस्वरूप को जिला अस्पताल ले जाया गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने इलाज के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि मौत चोटों और कुचलने से हुई।
परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। विनोद बाई ने बताया कि रामस्वरूप एक मेहनती किसान थे। वे दो बेटियों के पिता थे और परिवार का पूरा भरण-पोषण खेती से करते थे। जमीन विवाद तीन साल से चल रहा था। महेंद्र नागर ने कई बार कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन रामस्वरूप ने तहसील में शिकायत की थी। विनोद ने कहा कि अगर पुलिस ने पहले कार्रवाई की होती, तो यह हादसा न होता। तनिषा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पापा को बचाने गईं तो महेंद्र ने मेरे ऊपर बैठकर मारपीट की। हमारे कपड़े फाड़े और गालियां दीं। हमारी उम्र छोटी है, लेकिन यह जुल्म हम भूल नहीं पाएंगी। परिवार ने बताया कि महेंद्र का गांव में आतंक है। वह छोटे किसानों की जमीनें हड़प लेता है और विरोध करने वालों को धमकाता है। इस घटना के बाद पूरा गांव सन्नाटे में डूब गया। लोग घरों में बंद हो गए।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। फतेहगढ़ थाने में हत्या, मारपीट, बलात्कार की कोशिश और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया। मुख्य आरोपी महेंद्र नागर के अलावा उसके परिवार की तीन महिलाएं और कुल 14 लोग नामजद हैं। एसडीओपी विवेक अस्थाना ने बताया कि आरोपी राजस्थान के रहने वाले हैं, लेकिन गुना में सक्रिय हैं। घटनास्थल पर खून के धब्बे, जीप के टायर के निशान और कारतूस के खाली गोले मिले। पुलिस ने महेंद्र की थार जीप जब्त कर ली। फरेंसिक टीम ने साइट का निरीक्षण किया। आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस की टीमें राजस्थान और गुना के आसपास छापेमारी कर रही हैं। एसडीओपी ने कहा कि जल्द ही सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जिलाधिकारी ने भी मामले को गंभीरता से लिया और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए।
यह घटना मध्य प्रदेश में किसानों पर बढ़ते अत्याचार की याद दिलाती है। राज्य में कृषि मुख्य व्यवसाय है, लेकिन जमीन विवादों के कारण हिंसा आम हो गई है। विशेषज्ञ कहते हैं कि राजस्व रिकॉर्डों की डिजिटलीकरण से कब्जे आसान हो गए हैं, लेकिन छोटे किसान अक्सर न्याय से वंचित रह जाते हैं। बीजेपी किसान मोर्चा से जुड़े महेंद्र जैसे नेताओं पर पहले भी शिकायतें आई हैं। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने ट्वीट किया कि शिवराज सरकार में किसानों का खून बह रहा है। यह तालिबानी राज है। हम न्याय दिलाएंगे। एसपी ने भी बीजेपी पर दबंगों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। बीजेपी ने कहा कि अगर महेंद्र सदस्य है तो जांच के बाद कार्रवाई होगी। लेकिन पार्टी ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया।
गुना जिले में ऐसी घटनाएं नई नहीं हैं। दो साल पहले एक दलित किसान पर पुलिस की बर्बरता का मामला सुर्खियों में था। 2024 में झागर गांव में किसान भागवत किरार की मौत पर विवाद हुआ था। खाद की कमी से परेशान किसान की सुसाइड का शक था। इन घटनाओं से साफ है कि ग्रामीण इलाकों में कानून का राज कमजोर पड़ रहा है। ग्रामीण संगठनों ने गुना में विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है। वे मांग कर रहे हैं कि आरोपी को फांसी दी जाए और परिवार को मुआवजा मिले। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि सत्ता के नशे में कुछ लोग इंसानियत भूल जाते हैं। रामस्वरूप का परिवार अब अकेला पड़ गया है। दो बेटियां पढ़ाई छुड़ाकर मजदूरी करने को मजबूर हो सकती हैं। सरकार को तुरंत मदद करनी चाहिए।
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