ठाणे की 114 वर्षीय विठाबाई दामोदर पाटिल का निधन: महाराष्ट्र की सबसे वृद्ध महिला के रूप में याद की जा रही हैं, लोकतांत्रिक सक्रियता का हैं प्रतीक।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कोपरिगांव इलाके में रहने वाली 114 वर्षीय विठाबाई दामोदर पाटिल का शनिवार सुबह निधन हो गया। उनका परिवार दावा करता है कि वे महाराष्ट्र की
ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कोपरिगांव इलाके में रहने वाली 114 वर्षीय विठाबाई दामोदर पाटिल का शनिवार सुबह निधन हो गया। उनका परिवार दावा करता है कि वे महाराष्ट्र की सबसे वृद्ध जीवित महिला थीं। विठाबाई का जन्म 1911 में शिलगांव, कल्याण में हुआ था। वे हमेशा से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रहीं और हर चुनाव में मतदान किया। उनकी लंबी आयु, साहसिक जीवन और लोकतंत्र के प्रति निष्ठा के लिए लोग शोक व्यक्त कर रहे हैं। ठाणे नगर निगम ने उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए स्थान उपलब्ध कराया है। यह खबर स्थानीय समुदाय में शोक की लहर ला गई है, जहां विठाबाई को एक प्रेरणा स्रोत के रूप में देखा जाता था।
विठाबाई दामोदर पाटिल का निधन शनिवार, 25 अक्टूबर 2025 की सुबह करीब 6 बजे उनके घर पर हुआ। परिवार के अनुसार, वे पिछले कुछ दिनों से कमजोर महसूस कर रही थीं, लेकिन कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। सुबह वे आराम कर रही थीं, जब अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई। परिवार के सदस्यों ने तुरंत डॉक्टर बुलाया, लेकिन वे बच न सकीं। उनके बेटे दामोदर पाटिल ने बताया कि मां की उम्र के हिसाब से वे पूरी तरह स्वस्थ थीं। वे रोजाना घर के काम करतीं, सीढ़ियां चढ़तीं और पड़ोसियों से मिलतीं। निधन की खबर फैलते ही कोपरिगांव में शोक सभा आयोजित हुई। स्थानीय विधायक ने परिवार को सांत्वना दी और कहा कि विठाबाई जैसी महिलाएं समाज की धरोहर हैं। उनका अंतिम संस्कार रविवार को ठाणे के ब्रह्मेश्वर श्मशान घाट पर किया जाएगा।
विठाबाई का जन्म 1911 में कल्याण के शिलगांव गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उस समय महाराष्ट्र ब्रिटिश राज के अधीन था, और स्वतंत्रता संग्राम की हलचल चल रही थी। बचपन से ही विठाबाई मजबूत इरादों वाली थीं। उन्होंने कभी औपचारिक शिक्षा नहीं ली, लेकिन जीवन के हर संघर्ष से सीखा। 1930 के दशक में उनकी शादी दामोदर पाटिल से हुई, जो एक छोटे व्यापारी थे। दंपति ने ठाणे में बसकर परिवार बसाया। विठाबाई ने पांच बच्चों को पाला, जिनमें तीन बेटे और दो बेटियां थीं। वे घर संभालने के साथ-साथ खेती में भी हाथ बंटातीं। 1947 में भारत की आजादी के समय वे 36 वर्ष की थीं। विठाबाई ने बताया था कि वे गांधीजी की सत्याग्रह यात्राओं की कहानियां सुनकर प्रेरित हुईं। स्वतंत्र भारत में वे महिलाओं के अधिकारों के लिए जागरूक हुईं।
विठाबाई की सबसे बड़ी पहचान उनकी लोकतांत्रिक सक्रियता थी। वे हर चुनाव में मतदान करने वाली सबसे वृद्ध महिलाओं में शुमार थीं। 1952 के पहले आम चुनाव से लेकर 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव तक, उन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं छोड़ा। 2024 के नवंबर में, 113 वर्ष की उम्र में उन्होंने ठाणे के एक पोलिंग बूथ पर वोट डाला। वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे व्हीलचेयर पर सवार होकर बूथ पहुंचीं और अंगूठा लगाकर वोट किया। चुनाव अधिकारी ने उन्हें सम्मानित किया। विठाबाई ने कहा था, वोट मेरी आवाज है। मैंने आजादी के लिए संघर्ष देखा, इसलिए लोकतंत्र की रक्षा करनी है। उनकी यह सक्रियता युवाओं के लिए प्रेरणा बनी। ठाणे जिला निर्वाचन अधिकारी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि विठाबाई लोकतंत्र की सच्ची सिपाही थीं।
विठाबाई का जीवन साहसिक घटनाओं से भरा था। 2013 में, 102 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार हेलीकॉप्टर राइड लिया। यह उनके पोते अमोल का उपहार था। अमोल, जो टीसीएस में काम करते हैं, ने मुंबई के ऊपर 10 मिनट की उड़ान का इंतजाम किया। विठाबाई ने कहा था, मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि आकाश छू लूंगी। अगला लक्ष्य लोनावाला तक सी-प्लेन राइड था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से नहीं हो सका। 85 वर्ष की उम्र में वे जेजुरी तीर्थ पर पैदल चढ़ाई कर खंडोबा के दर्शन करने गईं। परिवार ने बताया कि वे कभी बीमार नहीं पड़ीं। दैनिक जीवन में वे स्वतंत्र थीं। तीन मंजिला घर में बिना सहारे सीढ़ियां चढ़तीं। शाकाहारी भोजन, योग और सकारात्मक सोच उनकी लंबी उम्र का राज था। डॉक्टरों ने कहा कि उनकी हड्डियां मजबूत रहीं, जो दुर्लभ है।
परिवार के अनुसार, विठाबाई महाराष्ट्र की सबसे वृद्ध महिला थीं। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराने की कोशिश चल रही थी, लेकिन कागजी प्रक्रिया अधर में थी। ठाणे जिला प्रशासन ने उनके दावे की जांच की और पुष्टि की। विठाबाई के निधन पर राज्यपाल ने संदेश भेजा, जिसमें उनकी लंबी आयु और सामाजिक योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ट्वीट कर कहा, विठाबाई मां जैसी थीं, जिन्होंने स्वतंत्र भारत को देखा और मजबूत बनाया। ठाणे के मेयर ने शोक सभा बुलाई। पड़ोसी इलाकों में प्रार्थना सभाएं हुईं। सोशल मीडिया पर #VithabaiPatil ट्रेंड कर रहा है। लोग उनकी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं, जहां वे हंसती हुईं नजर आ रही हैं। एक यूजर ने लिखा, 114 साल की जिंदगी, लेकिन हर पल प्रेरणा।
ठाणे महाराष्ट्र का एक महत्वपूर्ण शहर है, जो मुंबई महानगरीय क्षेत्र का हिस्सा है। यहां की आबादी 18 लाख से ज्यादा है। कोपरिगांव एक शांत आवासीय इलाका है, जहां मध्यमवर्गीय परिवार रहते हैं। विठाबाई का घर तीन मंजिला इमारत है, जो परिवार ने मिलकर बनाई। उनके बेटे दामोदर ने बताया कि मां कभी शिकायत नहीं करतीं। वे परिवार की एकजुटता का प्रतीक थीं। पोते-पोतियां उन्हें दादी के नाम से पुकारते। अमोल ने कहा, दादी की कहानियां सुनकर हम बड़े हुए। वे आजादी की लड़ाई, विभाजन की त्रासदी और आर्थिक सुधारों की गवाह रहीं। विठाबाई ने कभी टीवी या मोबाइल का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन रेडियो सुनतीं। समाचार सुनना उनकी आदत थी।
लंबी उम्र के रहस्य पर विठाबाई ने कई बार बात की। उन्होंने कहा, खुश रहो, दूसरों की मदद करो और ईश्वर पर भरोसा रखो। वे रोज सुबह सूर्य नमस्कार करतीं। शाकाहारी आहार में दाल, सब्जी और फल प्रमुख थे। कभी मीठा कम खातीं। परिवार ने उनके सम्मान में एक ट्रस्ट शुरू करने का फैसला किया, जो वृद्धजनों की देखभाल करेगा। विठाबाई की कहानी महिलाओं के सशक्तिकरण की मिसाल है। उस दौर में जब महिलाएं घर तक सीमित थीं, विठाबाई ने साहस दिखाया। 2024 के चुनाव में वोट डालते हुए उन्होंने कहा, युवा जागरूक रहें, वरना लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा।
निधन के बाद ठाणे में शोक का माहौल है। स्थानीय अखबारों ने प्रमुखता से खबर छापी। फ्री प्रेस जर्नल ने उनके जीवन पर विशेष रिपोर्ट प्रकाशित की। विठाबाई की याद में एक स्मृति सभा होगी, जहां लोग उनके अनुभव साझा करेंगे। परिवार ने कहा कि वे शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहती थीं। उनकी मृत्यु प्राकृतिक थी, कोई बीमारी नहीं। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि उम्र संबंधी कमजोरी थी। विठाबाई की विरासत उनके बच्चों और नाती-पोतों में बनी रहेगी। वे कहते हैं, दादी की तरह जीना सीखा। ठाणे प्रशासन ने अंतिम संस्कार का इंतजाम किया। लोग उन्हें नम आंखों से विदाई देंगे।
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