Shubhanshu Shukla Yoga Day: अंतरिक्ष से आया योग दिवस का खास संदेश, शुभांशु शुक्ला ने बताया शून्य गुरुत्वाकर्षण में योग का अनुभव

International Yoga Day: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर अंतरिक्ष से एक वीडियो संदेश जारी कर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।

Jun 22, 2026 - 12:44
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Shubhanshu Shukla Yoga Day: अंतरिक्ष से आया योग दिवस का खास संदेश, शुभांशु शुक्ला ने बताया शून्य गुरुत्वाकर्षण में योग का अनुभव
अंतरिक्ष स्टेशन के भीतर शून्य गुरुत्वाकर्षण में भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला योग की मुद्रा का प्रयास करते हुए (Indian astronaut Shubhanshu Shukla attempting a yoga posture in zero gravity inside the space station)

Yog Diwas From Space: अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने स्पेस से दी योग दिवस की शुभकामनाएं, साझा कीं बड़ी चुनौतियां

"दिखता आसान, पर है बेहद मुश्किल..." अंतरिक्ष से भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने भेजा योग दिवस का अनोखा संदेश

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष से देशवासियों को दीं शुभकामनाएं

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के विशेष अवसर पर इस बार पूरी दुनिया को ब्रह्मांड के एक सुदूर कोने से स्वास्थ्य और सजगता का अनोखा संदेश मिला है। भारत के होनहार अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने पृथ्वी की कक्षा में चक्कर काट रहे अंतरिक्ष स्टेशन से देशवासियों के नाम एक बेहद खास वीडियो संदेश साझा किया है। २१ जून को पूरी दुनिया में मनाए जाने वाले योग दिवस के उपलक्ष्य में जारी इस संदेश में उन्होंने सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही उन्होंने शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) के बीच योग साधना करने के अपने व्यक्तिगत अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि पृथ्वी से देखने पर अंतरिक्ष में तैरते हुए योग करना जितना सहज नजर आता है, असलियत में वहां शरीर को एक मुद्रा में स्थिर रखना उतना ही चुनौतीपूर्ण होता है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस वैश्विक स्तर पर भारत की प्राचीन विरासत और स्वास्थ्य पद्धतियों का उत्सव है। इस वर्ष के उत्सव को तब एक नया ऐतिहासिक आयाम मिला जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने सीधे अंतरिक्ष से इसमें अपनी भागीदारी दर्ज की। उन्होंने एक विशेष वीडियो और डिजिटल संदेश के माध्यम से वैश्विक समुदाय को संबोधित किया। शुभांशु ने माइक्रो-ग्रेविटी (सशक्त गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति) वाले वातावरण में शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए योग के महत्व को रेखांकित किया, जिसने विज्ञान और अध्यात्म के इस अनूठे संगम की तरफ पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है।

शुभांशु शुक्ला वर्तमान में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशन के हिस्से के रूप में अंतरिक्ष स्टेशन पर तैनात हैं। योग दिवस की सुबह जैसे ही पृथ्वी पर योग सत्रों की शुरुआत हुई, अंतरिक्ष से शुभांशु का यह संदेश इसरो (ISRO) और सरकारी संचार माध्यमों द्वारा जारी किया गया।

अपने संदेश में अंतरिक्ष यात्री ने स्पेस स्टेशन के भीतर के माहौल को दर्शकों के सामने रखा। उन्होंने कहा, "अंतरिक्ष से आप सभी को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बहुत-बहुत बधाई। जब हम पृथ्वी पर होते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण आसनों को करना और शरीर का संतुलन बनाना हमारे नियंत्रण में होता है। लेकिन यहां अंतरिक्ष में, जहां कोई ऊपर या नीचे की दिशा निश्चित नहीं होती, वहां खुद को स्थिर रखना ही सबसे बड़ा टास्क है।"

उन्होंने आगे समझाया कि बिना किसी सहारे के हवा में तैरते हुए ध्यान लगाना या प्राणायाम जैसी सांसों की क्रियाओं को नियंत्रित करना शारीरिक कोर (Core Strength) की गहरी परीक्षा लेता है। जो चीज स्क्रीन पर बहुत जादुई और आसान दिखती है, उसके पीछे मांसपेशियों का अत्यधिक तनाव और सचेत प्रयास छिपा होता है।इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने इस संदेश की सराहना करते हुए कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए योग एक बेहद कारगर साधन साबित हो रहा है। लंबे समय तक अंतरिक्ष अभियानों में रहने वाले वैज्ञानिकों को मानसिक तनाव और मांसपेशियों की कमजोरी (Muscle Atrophy) से बचाने में योग के सिद्धांत मदद करते हैं। आयुष मंत्रालय ने ट्वीट कर शुभांशु शुक्ला का आभार व्यक्त किया। मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि अंतरिक्ष की गहराइयों से योग का यह संदेश सिद्ध करता है कि यह विद्या भूगोल और पृथ्वी की सीमाओं से परे जाकर पूरी मानवता के कल्याण के लिए प्रासंगिक है। इंटरनेट पर लाखों भारतीयों ने इस वीडियो को साझा करते हुए इसे 'गर्व का क्षण' बताया है। लोगों का कहना है कि भारतीय संस्कृति का यह प्रभाव देखना अद्भुत है कि एक अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में भी अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है।

अंतरिक्ष और विज्ञान में रुचि रखने वाली युवा पीढ़ी अब योग को केवल एक पारंपरिक व्यायाम न मानकर एक उन्नत वैज्ञानिक जीवन शैली के रूप में देख रही है। शून्य गुरुत्वाकर्षण में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए योगिक क्रियाओं और आसनों के इस्तेमाल पर शोध की मांग वैश्विक स्तर पर तेज हो सकती है। इस संदेश ने वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक प्रगति के बेहतरीन तालमेल को प्रदर्शित किया है।  शुभांशु शुक्ला आने वाले कुछ और दिनों तक अंतरिक्ष में अपने वैज्ञानिक प्रयोगों को जारी रखेंगे। उनके इस संदेश के बाद, इसरो और आयुष मंत्रालय मिलकर एक विशेष प्रोटोकॉल तैयार करने पर विचार कर रहे हैं, जिसका उपयोग भविष्य के भारतीय मानव अंतरिक्ष अभियानों (जैसे गगनयान मिशन) में अंतरिक्ष यात्रियों के दैनिक स्वास्थ्य रूटीन में नियमित रूप से किया जा सके। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष की विषम परिस्थितियों में भी मानसिक रूप से सजग और शारीरिक रूप से चुस्त बने रहें।

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