व्यायाम करते वक्त अचानक कांस्टेबल एवं एसओजी के जवान की अचानक तबियत बिगड़ी, मौत
इस आकस्मिक और दुखद घटना के बाद शनिवार को दिवंगत पुलिस जवान के पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। चंपावत और उधम सिंह नगर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जिनमें चंपावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव, उधम सिंह नगर के पुलिस अधीक्षक अ

- उत्तराखंड के चंपावत जिले में फिटनेस दिनचर्या के दौरान हुआ हृदयविदारक हादसा, विशेष अभियान दल के जांबाज सुरक्षाकर्मी का दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन।
- रोजाना की तरह कसरत करते समय अचानक बिगड़ी सुरक्षा जवान की शारीरिक स्थिति, साथियों द्वारा तुरंत चिकित्सालय ले जाने के बावजूद नहीं बचाई जा सकी बहुमूल्य जान।
- जांच और सुरक्षा के मोर्चे पर कई जटिल मामलों को सुलझाने वाले कर्तव्यनिष्ठ कांस्टेबल के जाने से महकमे में शोक की लहर, पूरे राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई।
उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल से स्वास्थ्य और सुरक्षा बलों के बीच से एक बेहद स्तब्ध करने वाली और अत्यंत दुखद घटना सामने आई है। चंपावत जिले के सीमांत क्षेत्र बनबसा में तैनात उत्तराखंड पुलिस के एक जांबाज कांस्टेबल और विशेष अभियान दल (एसओजी) सर्विलांस टीम के सक्रिय सदस्य की जिम में कसरत करने के दौरान अचानक शारीरिक स्थिति बिगड़ने से मृत्यु हो गई। हमेशा की तरह अपने दैनिक शारीरिक फिटनेस कार्यक्रम को पूरा करने के लिए पहुंचे इस सुरक्षाकर्मी की उम्र महज अड़तीस से चालीस वर्ष के बीच थी। रोजाना की तरह जब वे व्यायामशाला में अपनी शारीरिक मजबूती के लिए अभ्यास कर रहे थे, तभी अचानक उनके सीने में तीव्र असहजता महसूस हुई और वे अचेत होकर फर्श पर गिर पड़े। इस अप्रत्याशित घटना को देखकर वहां उपस्थित अन्य साथियों और व्यायामशाला के संचालकों में हड़कंप मच गया। उन्होंने बिना एक पल गंवाए आपसी सहयोग से मूर्छित जवान को उठाया और तुरंत नजदीकी वाहन की मदद से उधम सिंह नगर जिले के खटीमा स्थित एक उच्च स्तरीय निजी चिकित्सालय लेकर भागे, ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में पहुंचते ही वहां मौजूद चिकित्सकों की टीम ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षा जवान का गहन चिकित्सकीय परीक्षण शुरू किया। डॉक्टरों ने उनकी पल्स, दिल की धड़कन और अन्य जीवन रक्षक मानकों की बारीकी से जांच की, लेकिन दुर्भाग्यवश तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तमाम कोशिशों के बावजूद चिकित्सकों ने उन्हें आधिकारिक रूप से मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच और चिकित्सकीय आकलन के आधार पर डॉक्टरों का मानना है कि अचानक गंभीर रूप से हृदय गति रुक जाने यानी मैसिव कार्डियक अरेस्ट के कारण यह दुखद घटना घटित हुई है। इस असामयिक और दर्दनाक खबर के मिलते ही चिकित्सालय परिसर में मौजूद उनके सहयोगियों और परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। किसी को भी इस बात पर सहसा विश्वास नहीं हो रहा था कि जो व्यक्ति कुछ मिनट पहले पूरी तरह स्वस्थ, ऊर्जावान और अपनी फिटनेस को लेकर बेहद गंभीर था, वह इस तरह अचानक दुनिया को अलविदा कह गया।
दिवंगत सुरक्षाकर्मी की पहचान मूल रूप से पिथौरागढ़ जनपद के निवासी गिरीश भट्ट के रूप में हुई है, जो वर्ष 2006 में उत्तराखंड पुलिस बल का हिस्सा बने थे। वर्तमान समय में वे चंपावत जिले के टनकपुर-बनबसा क्षेत्र में विशेष अभियान दल (एसओजी) सर्विलांस विंग में कांस्टेबल के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। विभाग के भीतर गिरीश भट्ट को एक बेहद परिश्रमी, ईमानदार और असाधारण रूप से तेज दिमाग वाले सुरक्षाकर्मी के रूप में जाना जाता था। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने जिले में घटित हुए कई पेचीदा और गंभीर आपराधिक मामलों को सुलझाने में अपनी सर्विलांस विशेषज्ञता के जरिए अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका निभाई थी। उनकी कार्यकुशलता और कर्तव्यपरायणता के कारण न केवल उनके साथी कर्मचारी बल्कि पुलिस महकमे के उच्चाधिकारी भी उनका बेहद सम्मान करते थे।
फिटनेस और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां
समकालीन समय में शारीरिक रूप से सक्रिय और नियमित रूप से जिम जाने वाले युवाओं तथा सुरक्षाकर्मियों में अचानक दिल का दौरा पड़ने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य संगठनों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में यह बात सामने आई है कि अत्यधिक कड़े शारीरिक श्रम, भारी वजन उठाने या बिना उचित कार्डियक स्क्रीनिंग के अचानक उच्च तीव्रता वाले व्यायाम (हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट) करने से कई बार हृदय की धमनियों पर अत्यधिक दबाव बन जाता है, जो इस तरह की आपातकालीन और जानलेवा स्थितियों का मुख्य कारण बनता है।
इस आकस्मिक और दुखद घटना के बाद शनिवार को दिवंगत पुलिस जवान के पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। चंपावत और उधम सिंह नगर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जिनमें चंपावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव, उधम सिंह नगर के पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, क्षेत्राधिकारी निहारिका सेमवाल और स्थानीय थानों के प्रभारियों सहित सैकड़ों की संख्या में पुलिस के जवान और स्थानीय नागरिक उनके गृह क्षेत्र बनबसा भजनपुर पहुंचे। पुलिस विभाग के सशस्त्र दस्ते ने दिवंगत कांस्टेबल को अत्यंत भावभीनी विदाई देते हुए 'गार्ड ऑफ ऑनर' प्रदान किया और हवा में गोलियां दागकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। इसके पश्चात पूरे राजकीय और पारंपरिक सम्मान के साथ शारदा नदी के पावन तट पर उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, जहां उनके बड़े भाई और परिवार के अन्य सदस्यों ने नम आंखों से उन्हें मुखाग्नि दी।
गिरीश भट्ट अपने पीछे परिवार में अपनी पत्नी और दो मासूम बेटों को छोड़ गए हैं, जिनका भरण-पोषण पूरी तरह से उन्हीं की आजीविका पर निर्भर था। इस असमय वज्रपात से उनके पूरे गांव और पैतृक निवास स्थान पर मातम पसरा हुआ है, और हर आंख आंसुओं से नम है। पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और यह भरोसा दिलाया कि इस कठिन और दुखद घड़ी में पूरा पुलिस महकमा उनके साथ मजबूती से खड़ा है। इसके साथ ही, विभाग की ओर से मिलने वाली सभी आश्रित सहायता, बीमा राशि और अन्य पेंशन संबंधी लाभों को त्वरित प्रक्रिया के तहत पीड़ित परिवार तक पहुंचाने के प्रशासनिक निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं, ताकि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
इस दुखद वाकये का एक संक्षिप्त सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जो घटना की भयावहता और अचानक उत्पन्न हुए संकट को बयां करता है। फुटेज में देखा जा सकता है कि गिरीश भट्ट व्यायामशाला के भीतर सामान्य रूप से चहलकदमी और कसरत की तैयारी कर रहे थे, और महज कुछ ही सेकेंड के भीतर अचानक लड़खड़ाकर जमीन पर गिर पड़े। इस फुटेज के सामने आने के बाद पूरे राज्य के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षा बलों के काम के दबाव, उनके मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य और जिम में कसरत के तौर-तरीकों को लेकर एक नई और गंभीर राष्ट्रीय बहस शुरू हो गई है। लोग इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि आखिर कैसे कोई पूरी तरह फिट दिखने वाला जवान इस कदर अचानक काल के गाल में समा सकता है।
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