असम में हिमंत युग का दूसरा अध्याय, गुवाहाटी के खानापारा में सजकर तैयार हुआ ऐतिहासिक मंच
हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से पहले ही अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया कि पिछला कार्यकाल तो केवल एक 'ट्रेलर' था, असली 'पिक्चर' अब शुरू होगी। उनकी सरकार का मुख्य लक्ष्य 'आत्मनिर्भर अस
- एनडीए की प्रचंड जीत के बाद लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे हिमंत बिस्वा सरमा
- प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की मौजूदगी में होगा शक्ति प्रदर्शन, असम के इतिहास में पहली बार गैर-कांग्रेसी नेता को दोबारा कमान
असम के राजनीतिक परिदृश्य में आज एक नया इतिहास रचने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और राज्य के कुशल प्रशासक डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। 12 मई 2026 की यह सुबह गुवाहाटी के खानापारा स्थित वेटरनरी कॉलेज फील्ड में एक भव्य समारोह के साथ शुरू हो रही है, जहाँ राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। असम के चुनावी इतिहास में यह पहली बार है जब किसी गैर-कांग्रेसी नेता को जनता ने लगातार दूसरी बार सत्ता की चाबी सौंपी है। यह न केवल हिमंत बिस्वा सरमा की व्यक्तिगत लोकप्रियता का प्रमाण है, बल्कि राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नीतियों पर जनता के अटूट विश्वास की मुहर भी है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में एनडीए ने राज्य की 126 सीटों में से 102 सीटों पर कब्जा जमाकर विपक्ष का लगभग सफाया कर दिया है। इस प्रचंड बहुमत में भाजपा ने अकेले 82 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया, जबकि सहयोगी दल असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने 10-10 सीटों पर जीत दर्ज की। चुनावी नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हिमंत बिस्वा सरमा का जादू राज्य के हर कोने में चला है। जालूकबारी निर्वाचन क्षेत्र से उन्होंने 89,000 से अधिक मतों के विशाल अंतर से अपनी लगातार छठी जीत दर्ज की, जो उनकी जमीनी पकड़ को दर्शाती है। आज के समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं, जो इस अवसर की गंभीरता और भव्यता को और बढ़ा रहा है।
शपथ ग्रहण समारोह के लिए गुवाहाटी के खानापारा मैदान को किसी दुल्हन की तरह सजाया गया है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच, इस समारोह में न केवल प्रधानमंत्री, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी शामिल हो रहे हैं। इनके अतिरिक्त, देश के विभिन्न राज्यों के लगभग 22 मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शपथ ग्रहण का शुभ मुहूर्त सुबह 11:40 बजे तय किया गया है। हिमंत बिस्वा सरमा के साथ उनके मंत्रिमंडल के कुछ वरिष्ठ सदस्य भी शपथ लेंगे, जिनमें रामेश्वर तेली, अतुल बोरा, चरण बोरो और अजंता नियोग के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से पहले ही अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया कि पिछला कार्यकाल तो केवल एक 'ट्रेलर' था, असली 'पिक्चर' अब शुरू होगी। उनकी सरकार का मुख्य लक्ष्य 'आत्मनिर्भर असम' का निर्माण करना है, जिसके तहत 10 लाख युवाओं को स्वरोजगार के लिए 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना है। इसके अलावा, चाय बागान श्रमिकों की मजदूरी को चरणबद्ध तरीके से 500 रुपये प्रतिदिन करने का संकल्प भी उनकी नई सरकार की प्राथमिक सूची में शामिल है। भूमि संरक्षण के मुद्दे पर भी वे कड़ा रुख अपना रहे हैं और अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराई गई जमीनों को मूल निवासियों के लिए सुरक्षित रखने का दावा कर रहे हैं।
मंत्रिमंडल का नया स्वरूप और कार्ययोजना
मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, नई कैबिनेट में 18 से 19 मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है। इसमें अनुभव और युवा जोश का संतुलन बिठाने की कोशिश की जाएगी। हिमंत बिस्वा सरमा ने संकेत दिया है कि शपथ ग्रहण के बाद 13 मई से सरकार पूरी तरह से सक्रिय मोड में आ जाएगी। कनेक्टिविटी को विकास का आधार मानते हुए सड़कों और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा ताकि असम को दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जा सके।
राज्य की राजनीति में हिमंत बिस्वा सरमा का उदय और उनका निरंतर वर्चस्व कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस चुनाव में कांग्रेस और उसके गठबंधन को केवल 19 सीटों पर सिमटना पड़ा, जो पार्टी के अब तक के सबसे खराब प्रदर्शनों में से एक है। विशेष रूप से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई की हार ने विपक्षी खेमे में नेतृत्व संकट को और गहरा दिया है। वहीं दूसरी ओर, हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी रणनीति से न केवल हिंदुओं का ध्रुवीकरण किया, बल्कि विभिन्न जनजातीय समुदायों के बीच भी भाजपा की पैठ को और मजबूत बनाया है। उनकी कार्यशैली, जिसमें वे सीधे जनता से संवाद करते हैं, ने उन्हें असम का सबसे प्रभावशाली जननेता बना दिया है। शपथ ग्रहण समारोह के मद्देनजर गुवाहाटी में उत्सव जैसा माहौल है। भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है और शहर के विभिन्न हिस्सों में जश्न की तैयारियां की गई हैं। ट्रैफिक पुलिस ने शहर में सुगम आवाजाही के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है ताकि समारोह में आने वाले हजारों समर्थकों और वीवीआईपी मेहमानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। आज का यह दिन केवल एक सरकार के गठन का नहीं है, बल्कि यह असम के उन करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं का प्रतीक है जिन्होंने विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक अस्मिता के नाम पर हिमंत बिस्वा सरमा को दोबारा अपना नेता चुना है। आने वाले पांच साल असम के विकास की नई गाथा लिखेंगे, ऐसी उम्मीद पूरे राज्य को है।
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