बजट 2026 में आयुर्वेद को बढ़ावा, तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना प्रस्तावित, वैश्विक मांग पूरी करने का लक्ष्य
वित्त मंत्री ने बजट भाषण में आयुर्वेद की वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद स्थापित करने की घोषणा की। ये संस्थान शिक्षा, अनुसंधान और क्लिनिकल
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किए गए यूनियन बजट 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। बजट में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना शामिल है। साथ ही, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करने की योजना प्रस्तावित की गई है। ये हब आयुष केंद्रों, डायग्नोस्टिक्स, पोस्ट-केयर और रिहैबिलिटेशन सुविधाओं से लैस होंगे। स्वास्थ्य क्षेत्र में बायोफार्मा, मेंटल हेल्थ और कैंसर केयर जैसे क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ाने के प्रस्ताव हैं, जो समग्र स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कदम हैं।
वित्त मंत्री ने बजट भाषण में आयुर्वेद की वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद स्थापित करने की घोषणा की। ये संस्थान शिक्षा, अनुसंधान और क्लिनिकल उत्कृष्टता को मजबूत करेंगे। वर्तमान में दिल्ली में एक ऐसा संस्थान है, और नए संस्थानों से पारंपरिक चिकित्सा में क्षमता वृद्धि होगी। आयुष फार्मेसी और ड्रग टेस्टिंग लैब्स को उच्च प्रमाणन मानकों के लिए अपग्रेड किया जाएगा। जामनगर में WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को अपग्रेड करने का प्रस्ताव है, जो साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और जागरूकता को बढ़ावा देगा। आने वाले वर्ष में 1.5 लाख केयरगिवर्स को वेलनेस और योगा सेवाओं के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। आयुर्वेद उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने, जड़ी-बूटियों के किसानों का समर्थन करने और प्रोसेसिंग में युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर फोकस है।
पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब की स्थापना से मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा, आयुष केंद्रों के साथ एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी
बजट में भारत को मेडिकल टूरिज्म हब बनाने के लिए राज्यों को समर्थन देने वाली योजना की घोषणा की गई है। इसके तहत पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे, जो प्राइवेट सेक्टर के साथ साझेदारी में बनेंगे। ये हब मेडिकल, एजुकेशनल और रिसर्च सुविधाओं से युक्त होंगे। हब में आयुष केंद्र, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म फैसिलिटेशन सेंटर, डायग्नोस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, पोस्ट-केयर और रिहैबिलिटेशन सेवाएं शामिल होंगी। ये हब डॉक्टरों और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए विविध रोजगार अवसर प्रदान करेंगे। योजना का उद्देश्य भारत की वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं में स्थिति मजबूत करना और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देना है। हब पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा को एकीकृत करके समग्र देखभाल प्रदान करेंगे।
स्वास्थ्य क्षेत्र में अन्य प्रमुख घोषणाएं, बायोफार्मा शक्ति योजना और मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट्स का विस्तार, कैंसर दवाओं पर ड्यूटी छूट
बजट में बायोफार्मा शक्ति योजना लॉन्च की गई है, जो 10,000 करोड़ रुपये की है और पांच वर्षों में बायोलॉजिक्स तथा बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगी। तीन नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च स्थापित किए जाएंगे और सात मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। मेंटल हेल्थ के लिए उत्तर भारत में NIMHANS 2.0 स्थापित किया जाएगा, जबकि रांची और तेजपुर के नेशनल मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट्स को रीजनल एपेक्स संस्थान के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। 17 कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी पूरी तरह माफ की गई है, जबकि 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाओं और विशेष चिकित्सकीय भोजन पर व्यक्तिगत आयात के लिए ड्यूटी छूट बढ़ाई गई है। 10 नए एलाइड हेल्थ डिसिप्लिन पेश किए जाएंगे, जिसमें ऑप्टोमेट्री, एनेस्थीसिया, एप्लाइड साइकोलॉजी और बिहेवियरल हेल्थ शामिल हैं। अगले पांच वर्षों में एक लाख एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल्स में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर क्षमता 50 प्रतिशत बढ़ाई जाएगी।
ये घोषणाएं स्वास्थ्य क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुसंधान, शिक्षा और पहुंच को मजबूत करने पर केंद्रित हैं। बजट में पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत करने का प्रयास किया गया है। कुल मिलाकर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, सस्ता और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
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