NEET-UG Re-Exam को लेकर प्रयागराज सहित देश के कई चुनिंदा शहरों के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने जारी किए आपातकालीन दिशा-निर्देश।

केंद्र परिवर्तन की इस औचक प्रक्रिया के कारण परीक्षार्थियों के मन में किसी भी प्रकार का तनाव या भय न पैदा हो, इसके लिए नियमों में कुछ आवश्यक और व्यावहारिक ढील भी दी गई है। विशेष निर्देशों के तहत यह तय किया गया है कि जिन केंद्रों पर बदलाव लागू हुआ है, वहां के मुख्य द्वार पर रिपो

Jun 21, 2026 - 10:14
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NEET-UG Re-Exam को लेकर प्रयागराज सहित देश के कई चुनिंदा शहरों के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने जारी किए आपातकालीन दिशा-निर्देश।
NEET-UG Re-Exam को लेकर प्रयागराज सहित देश के कई चुनिंदा शहरों के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने जारी किए आपातकालीन दिशा-निर्देश।

  • प्रशासनिक कारणों से ऐन वक्त पर बदले गए कुछ महत्वपूर्ण परीक्षा केंद्र, परीक्षार्थियों को नए प्रवेश पत्र के साथ आवंटित स्थलों पर समय से पहुंचने का कड़ा आदेश।
  • पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस तंत्र पूरी तरह सक्रिय, संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त बल के साथ विशेष सुरक्षा नियमावली लागू।

देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा यानी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) की Re-Exam के सफल संचालन के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार बड़े फैसले लिए जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र प्रयागराज सहित देश के कुछ अन्य चुनिंदा संवेदनशील परीक्षा केंद्रों के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा विशेष निर्देश और परीक्षा केंद्र परिवर्तन संबंधी अत्यंत महत्वपूर्ण नोटिस जारी किए गए हैं। इस औचक प्रशासनिक निर्णय के बाद संबंधित शहरों के स्थानीय प्रशासन और परीक्षा समन्वयकों के बीच हलचल काफी तेज हो गई है। परीक्षा नियामक संस्था ने यह स्पष्ट किया है कि कुछ केंद्रों पर तकनीकी विसंगतियों, बुनियादी ढांचे से जुड़ी कमियों और अपरिहार्य प्रशासनिक कारणों के चलते ऐन वक्त पर यह बदलाव करना बेहद अनिवार्य हो गया था। इस नए नोटिस के जारी होने के बाद प्रभावित होने वाले अभ्यर्थियों को तुरंत सूचित करने के लिए डिजिटल माध्यमों, जैसे पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का बड़े पैमाने पर सहारा लिया गया है, ताकि किसी भी परीक्षार्थी का भविष्य अधर में न लटके।

प्रयागराज में ऐतिहासिक रूप से परीक्षाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए इस बार सुरक्षा और प्रबंधन के मानकों को सामान्य से कई गुना अधिक कड़ा कर दिया गया है। विशेष रूप से जारी किए गए दिशा-निर्देशों में यह साफ कहा गया है कि जिन केंद्रों के पते या नाम में आंशिक अथवा पूर्ण रूप से बदलाव किया गया है, वहां के अभ्यर्थियों को अपने पुराने प्रवेश पत्र के स्थान पर तुरंत आधिकारिक वेबसाइट से नया और अद्यतन प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) डाउनलोड करना होगा। नए प्रवेश पत्र पर परीक्षा केंद्र का परिवर्तित नाम, नया कोड और सटीक डिजिटल लोकेशन मानचित्र भी उपलब्ध कराया गया है, ताकि अभ्यर्थियों को नया गंतव्य खोजने में किसी भी प्रकार की व्यावहारिक समस्या या भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि वे पुराने केंद्रों के बाहर विशेष सहायता डेस्क स्थापित करें, जो गलती से वहां पहुंचने वाले छात्रों को नए परीक्षा स्थल तक पहुंचाने के लिए परिवहन और मार्ग दर्शन की त्वरित सुविधा प्रदान कर सके।

केंद्र परिवर्तन की इस औचक प्रक्रिया के कारण परीक्षार्थियों के मन में किसी भी प्रकार का तनाव या भय न पैदा हो, इसके लिए नियमों में कुछ आवश्यक और व्यावहारिक ढील भी दी गई है। विशेष निर्देशों के तहत यह तय किया गया है कि जिन केंद्रों पर बदलाव लागू हुआ है, वहां के मुख्य द्वार पर रिपोर्टिंग समय और प्रवेश बंद होने की समय सीमा में थोड़ी लचीली व्यवस्था रखी जा सकती है, बशर्ते कि छात्र के पास वैध कारण और पुराने केंद्र से नए केंद्र तक आने का प्रामाणिक प्रमाण मौजूद हो। हालांकि, यह छूट केवल विशेष परिस्थितियों में ही लागू होगी, और सामान्य नियम के मुताबिक सभी अभ्यर्थियों से यही अपेक्षा की गई है कि वे बदले हुए पते का ठीक से सत्यापन करके सुबह के निर्धारित समय से काफी पहले अपनी उपस्थिति दर्ज करा लें। प्रयागराज के जिला मजिस्ट्रेट ने यातायात पुलिस को भी विशेष निर्देश जारी किए हैं कि परीक्षा केंद्रों की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर किसी भी तरह का जाम न लगने दिया जाए और परीक्षार्थियों के वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर रास्ता दिया जाए।

सुरक्षा और खुफिया तंत्र की तैनाती

प्रयागराज सहित बदले गए अन्य सभी परीक्षा केंद्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ विशेष सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की टीमों को सादे कपड़ों में केंद्रों के आसपास तैनात किया गया है। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि, सॉल्वर गैंग की सक्रियता या सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर पैनी नजर रखने के लिए एक समर्पित साइबर सेल चौबीसों घंटे काम कर रहा है।

इस बार की Re-Exam में केवल केंद्र बदलना ही एकमात्र बदलाव नहीं है, बल्कि परीक्षा कक्ष के भीतर की पूरी नियमावली को भी नए सिरे से परिभाषित किया गया है। नए निर्देशों के अनुसार, जिन केंद्रों को संवेदनशील की श्रेणी में रखकर बदला गया है, वहां प्रत्येक कमरे में परीक्षार्थियों के बैठने की व्यवस्था (सीटिंग अरेंजमेंट) को अंतिम समय में रैंडम सॉफ्टवेयर के जरिए दोबारा बदला गया है। इसका मतलब यह है कि परीक्षा हॉल के भीतर प्रवेश करने के बाद ही छात्र को उसकी अंतिम अलॉटेड सीट का पता चलेगा। इस कड़े कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य किसी भी तरह के पूर्व-नियोजित तालमेल या नकल के प्रयासों को पूरी तरह से विफल करना है। इसके अलावा, परीक्षा कक्ष के भीतर तैनात होने वाले पर्यवेक्षकों और निरीक्षकों (इन्विजिलेटर्स) की ड्यूटी भी रोटेशन प्रणाली के आधार पर तय की जा रही है, जिससे परीक्षा की शुचिता शत-प्रतिशत बनी रहे।

तकनीकी मोर्चे पर भी इन विशेष केंद्रों के लिए कुछ अतिरिक्त सावधानियां बरती जा रही हैं, जो पहले की सामान्य परीक्षाओं में देखने को नहीं मिलती थीं। बदले गए सभी केंद्रों पर बायोमेट्रिक हाजिरी और डिजिटल फिंगरप्रिंट स्कैनिंग के साथ-साथ फेशियल रिकग्निशन यानी चेहरे की पहचान करने वाली अत्याधुनिक प्रणालियों को दोहराया जा रहा है। यदि किसी छात्र का डेटा मुख्य डेटाबेस से मेल नहीं खाता है, तो उसे तुरंत परीक्षा में बैठने से रोककर जांच के दायरे में ले लिया जाएगा। इसके साथ ही, परीक्षा हॉल के भीतर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड को न केवल स्थानीय नियंत्रण कक्ष बल्कि सीधे केंद्रीय मुख्यालय से जोड़ा गया है, जहां तकनीकी विशेषज्ञ हर एक गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। परीक्षा के दौरान यदि किसी भी केंद्र पर जैमर के निष्क्रिय होने या तकनीकी खराबी की सूचना मिलती है, तो वहां तुरंत आपातकालीन बैकअप प्रणाली को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रयागराज के अलावा देश के जिन अन्य राज्यों और शहरों में इस तरह के केंद्र परिवर्तन संबंधी नोटिस लागू किए गए हैं, वहां के स्थानीय परीक्षा प्रभारियों को भी पूरी मुस्तैदी बरतने को कहा गया है। परीक्षा नियामक संस्था ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी स्तर पर किया गया समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी नए केंद्रों पर पीने के साफ पानी, बिजली की निर्बाध आपूर्ति और प्राथमिक चिकित्सा किट जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित स्कूल और कॉलेज के प्राचार्यों को सौंपी गई है। अभिभावकों के बैठने के लिए भी केंद्र परिसर से उचित दूरी पर विशेष प्रतीक्षालयों की व्यवस्था की गई है, ताकि मुख्य द्वारों पर अनावश्यक भीड़ जमा न हो और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलती रहे।

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