थाली-चम्मच की गूंज और रचनात्मक पोस्टरों के जरिए सरकार के विरुद्ध CJP के आंदोलनकारियों ने पीड़ित परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे की उठाई मांग।

शनिवार की शाम जैसे-जैसे ढलती गई, वैसे-वैसे जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कड़ापन बढ़ता चला गया। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से बार-बार यह घोषणा की कि प्रदर्शन के लिए आवंटित किया गया आधिकारिक समय अब पूरी तरह स

Jun 21, 2026 - 10:33
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थाली-चम्मच की गूंज और रचनात्मक पोस्टरों के जरिए सरकार के विरुद्ध CJP के आंदोलनकारियों ने पीड़ित परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे की उठाई मांग।
थाली-चम्मच की गूंज और रचनात्मक पोस्टरों के जरिए सरकार के विरुद्ध CJP के आंदोलनकारियों ने पीड़ित परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे की उठाई मांग।
  • देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में हुई विसंगतियों के खिलाफ उपजा जन-आक्रोश चरम पर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के हटने की मांग तेज।
  • युवाओं के नेतृत्व वाले संगठन कॉकरोच जनता पार्टी का दिल्ली में दूसरा बड़ा शक्ति प्रदर्शन, अनुमति समाप्त होने के बाद भी रात भर सड़क पर डटे रहे सैकड़ों आंदोलनकारी।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर एक बार फिर देश की सबसे बड़ी छात्र राजनीति और नागरिक आंदोलन का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। देश की सबसे प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 में कथित पेपर लीक, विसंगतियों और मूल्यांकन प्रणालियों में आई तकनीकी गड़बड़ियों के खिलाफ युवाओं के नेतृत्व वाले एक विशेष संगठन, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने मोर्चा खोल दिया है। इस संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में शनिवार दोपहर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक बेहद आक्रामक और अनिश्चितकालीन धरने का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारी छात्रों, अभिभावकों और नागरिक समाज के लोगों की एकमात्र और सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल प्रभाव से इस्तीफा सुनिश्चित करना है। शनिवार शाम को सुरक्षा अधिकारियों द्वारा दी गई पांच बजे की आधिकारिक समय सीमा समाप्त होने और पुलिस द्वारा प्रदर्शन को अवैध घोषित किए जाने के बावजूद, आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए और उन्होंने पूरी रात जंतर-मंतर की सड़कों पर खुले आसमान के नीचे गुजारकर अपने इरादे पूरी तरह साफ कर दिए हैं।

इस आंदोलन की व्यापकता और इसके पीछे की रणनीतिक तैयारियों को लेकर पिछले कई दिनों से डिजिटल और भौतिक माध्यमों से लामबंदी की जा रही थी। विरोध प्रदर्शन को एक अनोखा और प्रतीकात्मक रूप देने के लिए संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारियों से अपने साथ घरेलू बर्तन, जैसे थाली और चम्मच लाने की एक विशेष अपील की गई थी। शनिवार को जब आंदोलन शुरू हुआ, तो जंतर-मंतर का पूरा माहौल थाली और चम्मचों की तीव्र और गूंजती हुई आवाजों से सराबोर हो गया। आंदोलनकारियों का तर्क था कि यदि कुछ वर्ष पूर्व एक वैश्विक महामारी के दौरान संकट से निपटने के लिए बर्तनों को बजाकर एक सामूहिक चेतना जागृत करने का आह्वान किया जा सकता है, तो आज देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य पर मंडरा रहे इस परीक्षा संकट और कूटनीतिक विफलताओं को दूर भगाने के लिए भी इसी प्रतीकात्मक तरीके का इस्तेमाल किया जाना पूरी तरह न्यायसंगत है। इस अनोखे और अनुशासित विरोध प्रदर्शन ने वहां तैनात सुरक्षा बलों को भी हैरत में डाल दिया, क्योंकि छात्र बेहद शांतिपूर्ण लेकिन बेहद मुखर अंदाज में अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए थे।

आंदोलन के दौरान मंच से देश के शीर्ष नेतृत्व को संबोधित करते हुए एक बेहद भावुक और खुला पत्र भी जारी किया गया है, जिसमें परीक्षा से जुड़ी विसंगतियों के कारण उपजे मानसिक तनाव और दुखद घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। संगठन के प्रवक्ताओं और विधिक सलाहकारों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह के भीतर नीट परीक्षा से जुड़ी चिंताओं, अनिश्चितताओं और परिणाम के दबाव के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों जैसे अलवर, सीकर, देहरादून, कोयंबटूर और अहमदाबाद में लगभग 11 युवा अभ्यर्थियों ने मानसिक अवसाद के चलते अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। इस स्थिति को एक राष्ट्रीय आपातकाल की संज्ञा देते हुए आंदोलनकारी संगठन ने मांग की है कि केंद्र सरकार को इस परीक्षा संकट के कारण जान गंवाने वाले प्रत्येक छात्र के पीड़ित परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता और मुआवजा तुरंत प्रदान करना चाहिए। संगठन का कहना है कि यह मौतें केवल व्यक्तिगत विफलताएं नहीं हैं, बल्कि यह देश की जर्जर और भ्रष्ट परीक्षा प्रणाली के कारण की गई संस्थागत हत्याएं हैं, जिनकी पूरी जवाबदेही प्रशासनिक प्रमुख को लेनी होगी।

नागरिक समाज और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन

जंतर-मंतर पर चल रहे इस युवा आंदोलन को उस समय एक बहुत बड़ी नैतिक और सामाजिक ताकत मिली, जब देश के जाने-माने जलवायु और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी प्रदर्शनकारियों के बीच हौसला बढ़ाने पहुंचे। उन्होंने छात्रों की मांगों का पूर्ण समर्थन करते हुए यह घोषणा की है कि यदि जिम्मेदार केंद्रीय मंत्री इस प्रशासनिक विफलता की जिम्मेदारी लेकर अपने पद से नहीं हटते हैं, तो वह स्वयं 27 जून से इस आंदोलन के समर्थन में एक व्यापक और अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने पर मजबूर होंगे।

शनिवार की शाम जैसे-जैसे ढलती गई, वैसे-वैसे जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कड़ापन बढ़ता चला गया। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से बार-बार यह घोषणा की कि प्रदर्शन के लिए आवंटित किया गया आधिकारिक समय अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है, इसलिए कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी प्रदर्शनकारियों को तुरंत इस स्थान को खाली कर देना चाहिए। हालांकि, संगठन के प्रमुख और वहां मौजूद युवाओं ने इस प्रशासनिक आदेश को मानने से विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया। छात्रों ने अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट और टॉर्च चालू कर दीं, जिससे अंधेरे में डूबा जंतर-मंतर का मैदान अचानक रोशनी से जगमगा उठा। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि जब तक सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक वे इस स्थान से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। इसके बाद पूरी रात जंतर-मंतर परिसर “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” और “लीक इन इंडिया बंद करो” जैसे गगनभेदी नारों से गूंजता रहा।

इस आंदोलन की एक और बेहद आकर्षक और प्रभावशाली विशेषता यहां देखने को मिले रचनात्मक और व्यंग्यात्मक पोस्टर रहे। परीक्षा हॉल से लेकर संसद तक की व्यवस्था पर तंज कसने के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालयों के छात्रों ने बेहद अनोखे नारों, उर्दू शायरी, बॉलीवुड फिल्मों के लोकप्रिय संवादों और समकालीन राजनीतिक मीम्स का सहारा लिया था। उदाहरण के लिए, कुछ पोस्टरों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के कूटनीतिक दौरों और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के साथ हुई हालिया मुलाकातों का जिक्र करते हुए लिखा गया था कि वैश्विक स्तर पर संबंध बनाने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर पेपर लीक रोकने की कला भी सीखी जानी चाहिए। कुछ अन्य पोस्टरों में हाल ही में हुए बड़े राजनीतिक दल-बदल और विपक्षी नेताओं के सत्ताधारी दल में शामिल होने की घटनाओं पर भी तीखे कटाक्ष किए गए थे। इन रचनात्मक पोस्टरों ने न केवल वहां मौजूद मीडिया का ध्यान खींचा, बल्कि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी बहुत तेजी से वायरल होने लगे, जिससे आंदोलन को एक डिजिटल धार भी मिल गई।

रविवार की सुबह होते ही आंदोलन का स्वरूप और अधिक व्यापक होने की दिशा में बढ़ रहा है। संगठन के संस्थापक ने सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो संदेश जारी करके दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के सभी आम नागरिकों, अभिभावकों, शिक्षकों, लेखकों और कलाकारों से अपील की है कि वे सुबह 9 बजे के बाद भारी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचकर इस छात्र आंदोलन का हिस्सा बनें। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल कुछ हजार परीक्षार्थियों की नहीं है, बल्कि यह देश की आने वाली पीढ़ियों की साख, ईमानदारी और योग्यता के संरक्षण की एक पवित्र लड़ाई है। इस जन-आह्वान के बाद रविवार सुबह से ही जंतर-मंतर की ओर आने वाले सभी रास्तों पर दिल्ली पुलिस द्वारा कड़े बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं और सुरक्षा व्यवस्था को बेहद चाक-चौबंद कर दिया गया है ताकि प्रदर्शनकारियों की संख्या को एक निश्चित सीमा से अधिक बढ़ने से रोका जा सके।

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