ईवीएम के साथ चालाकी अब पड़ेगी भारी: बटन पर इत्र, गोंद या स्याही लगाना अब गंभीर चुनावी अपराध, चुनाव आयोग की सख्त चेतावनी।

भारत निर्वाचन आयोग ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुद्धता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण और कड़ा आदेश जारी

Apr 22, 2026 - 12:03
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ईवीएम के साथ चालाकी अब पड़ेगी भारी: बटन पर इत्र, गोंद या स्याही लगाना अब गंभीर चुनावी अपराध, चुनाव आयोग की सख्त चेतावनी।
ईवीएम के साथ चालाकी अब पड़ेगी भारी: बटन पर इत्र, गोंद या स्याही लगाना अब गंभीर चुनावी अपराध, चुनाव आयोग की सख्त चेतावनी।
  • वोट की गोपनीयता से समझौता नहीं: चुनाव आयोग ने जारी किए कड़े निर्देश, ईवीएम से छेड़छाड़ पर रद्द हो सकता है मतदान
  • सावधान! बैलेट यूनिट पर पदार्थ लगाना माना जाएगा 'टैम्परिंग', दोषी पाए जाने पर जेल और दोबारा मतदान का आदेश संभव

भारत निर्वाचन आयोग ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुद्धता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण और कड़ा आदेश जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बटनों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, चाहे वह इत्र लगाना हो, गोंद चिपकाना हो या किसी रसायन का छिड़काव करना हो, इसे गंभीर चुनावी अपराध माना जाएगा। यह सख्त रुख उन सूचनाओं के बाद अपनाया गया है जिनमें यह दावा किया गया था कि कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता यह जांचने के लिए कि मतदाता ने उनके पक्ष में मतदान किया है या नहीं, बटनों पर विशिष्ट गंध वाले पदार्थ या चिपचिपी चीजें लगा देते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई भी हरकत न केवल मशीन की तकनीकी अखंडता के खिलाफ है, बल्कि यह मतदान की गोपनीयता के संवैधानिक सिद्धांत का भी सीधा उल्लंघन है। मंगलवार को चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि यदि किसी भी मतदान केंद्र पर ईवीएम के साथ ऐसी कोई भी संदिग्ध गतिविधि पाई जाती है, तो वहां तैनात पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि वह तुरंत इसकी सूचना सेक्टर अधिकारी या रिटर्निंग अधिकारी को दे। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी सूचना पर तुरंत संज्ञान लें और मौके पर जाकर मशीन की स्थिति की जांच करें। आयोग ने यह भी साफ किया है कि यदि किसी बटन पर बाहरी पदार्थ मिलने से मतदान प्रक्रिया के प्रभावित होने की आशंका होती है, तो उस मतदान केंद्र के परिणाम को स्थगित किया जा सकता है और स्थिति की गंभीरता के आधार पर वहां पुनर्मतदान (Re-poll) कराने का निर्णय लिया जा सकता है।

क्या है 'सुगंध और गोंद' की साजिश?

हालिया रिपोर्टों में यह बात सामने आई थी कि कुछ असामाजिक तत्व या राजनीतिक कार्यकर्ता मतदाताओं को डराने या उनके वोट को ट्रैक करने के लिए ईवीएम के बटनों पर इत्र या गोंद लगा देते हैं। जब मतदाता बटन दबाता है, तो उसके हाथ पर वह गंध या पदार्थ लग जाता है, जिससे पोलिंग बूथ के बाहर खड़े कार्यकर्ता यह पहचान करने की कोशिश करते हैं कि व्यक्ति ने किस उम्मीदवार को वोट दिया है। यह सीधे तौर पर मतदाता की स्वतंत्रता और गोपनीयता पर प्रहार है।

यह नया और सख्त निर्देश विशेष रूप से तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के उन क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जहाँ 23 अप्रैल को मतदान होना है। चुनाव आयोग ने इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि सभी मतदान केंद्रों पर पीठासीन अधिकारी प्रत्येक मतदाता के जाने के बाद या समय-समय पर बैलेट यूनिट का सूक्ष्म निरीक्षण करें। आयोग का मानना है कि चुनाव के दौरान भयमुक्त वातावरण और निष्पक्षता तभी बनी रह सकती है जब तकनीक और प्रक्रिया दोनों सुरक्षित हों। किसी भी प्रकार का रंग, स्याही या रसायन बटन पर लगाना न केवल वोट की गोपनीयता को भंग करता है, बल्कि यह ईवीएम की कार्यप्रणाली में तकनीकी बाधा भी उत्पन्न कर सकता है, जिससे मतदान प्रक्रिया धीमी हो सकती है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए विस्तृत प्रोटोकॉल के अनुसार, मतदान शुरू होने से पहले और मतदान के दौरान पीठासीन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बैलेट यूनिट पर सभी उम्मीदवारों के नाम, चुनाव चिह्न और बटन पूरी तरह से साफ और स्पष्ट दिखाई दें। किसी भी बटन पर पारदर्शी टेप, गोंद का अवशेष या अन्य कोई बाहरी चीज नहीं लगी होनी चाहिए। यदि किसी बटन पर कुछ चिपका हुआ पाया जाता है, तो उसे तुरंत साफ किया जाना चाहिए और यदि सफाई संभव न हो, तो मशीन को बदलकर नई मशीन का उपयोग किया जाना चाहिए। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे किसी भी विसंगति को नजरअंदाज न करें, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी पूरे चुनाव की वैधता पर सवालिया निशान खड़ा कर सकती है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इत्र या सुगंधित पदार्थों का उपयोग विशेष रूप से चिंता का विषय है क्योंकि इसे आसानी से देखा नहीं जा सकता, लेकिन यह मतदाता की पहचान और उसके गुप्त मतदान के अधिकार को प्रभावित करता है। चुनावी कानून के तहत, मतदान की गोपनीयता बनाए रखना केवल मतदाता का अधिकार ही नहीं, बल्कि चुनाव आयोग का अनिवार्य कर्तव्य भी है। इस तरह के मामलों को 'ईवीएम टैम्परिंग' या 'चुनावी हस्तक्षेप' की श्रेणी में रखा जाएगा, जिसमें दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें जेल की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी अनुचित प्रथा को अपनाने की हिम्मत न करे। चुनाव आयोग की इस सक्रियता ने उन शरारती तत्वों को कड़ा संदेश दिया है जो तकनीक और मनोविज्ञान का सहारा लेकर चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। आयोग ने आम जनता और मतदाताओं से भी अपील की है कि यदि उन्हें मतदान के दौरान बैलेट यूनिट पर कुछ भी संदिग्ध नजर आता है, तो वे तुरंत वहां मौजूद अधिकारियों को इसकी जानकारी दें। इसके साथ ही, सेक्टर अधिकारियों को निरंतर मोबाइल रहने और रैंडम तरीके से बूथों का निरीक्षण करने को कहा गया है। डिजिटल युग में चुनाव की सुचिता बनाए रखने के लिए आयोग अब ऐसे हर छोटे-बड़े पहलू पर ध्यान दे रहा है जिससे लोकतंत्र की नींव मजबूत बनी रहे और प्रत्येक नागरिक बिना किसी दबाव या पहचान के डर के अपना वोट डाल सके।

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