कर्नाटक CEO का राहुल गांधी को नोटिस- महादेवपुरा में मतदाता धोखाधड़ी के आरोपों पर मांगे सबूत।
Political: कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को एक औपचारिक नोटिस जारी...
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को एक औपचारिक नोटिस जारी कर 2024 के लोकसभा चुनावों में बेंगलुरु सेंट्रल की महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता धोखाधड़ी के उनके आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी सबूत मांगे हैं। यह नोटिस राहुल गांधी के उस दावे के जवाब में जारी किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 70 वर्षीय मतदाता शकुन रानी ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के डेटा के आधार पर दो बार मतदान किया था। सीईओ ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि शकुन रानी ने केवल एक बार मतदान किया था, और राहुल द्वारा दिखाया गया टिक मार्क वाला दस्तावेज मतदान अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया था।
राहुल गांधी ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट के अंतर्गत महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर "वोट चोरी" का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि इस क्षेत्र में 6.5 लाख मतदाताओं में से 1,00,250 वोट धोखाधड़ी के जरिए "चुराए" गए, जिसमें डुप्लिकेट प्रविष्टियां, फर्जी पते और एक ही पते पर सामूहिक पंजीकरण जैसे तरीके शामिल थे। उन्होंने विशेष रूप से शकुन रानी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके वोटर आईडी पर दो टिक मार्क थे, जो मतदान अधिकारी द्वारा डाले गए थे, और यह भारत निर्वाचन आयोग के डेटा पर आधारित था। राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने डिजिटल मतदाता सूची को सार्वजनिक नहीं किया, जिससे इस तरह की धोखाधड़ी को उजागर करना मुश्किल हो गया।
कर्नाटक के सीईओ वी. अंबुकुमार ने राहुल गांधी को लिखे पत्र में कहा, “आपने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि आपके द्वारा दिखाए गए दस्तावेज भारत निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड से हैं। आपने कहा था कि शकुन रानी ने दो बार मतदान किया और उनके वोटर आईडी पर दो टिक मार्क हैं, जो मतदान अधिकारी द्वारा लगाए गए हैं।” हालांकि, सीईओ ने अपनी प्रारंभिक जांच के आधार पर इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि शकुन रानी ने केवल एक बार मतदान किया था, और राहुल द्वारा दिखाया गया टिक मार्क वाला दस्तावेज मतदान अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया था। पत्र में आगे कहा गया, “आपसे अनुरोध है कि कृपया उन प्रासंगिक दस्तावेजों को उपलब्ध कराएं, जिनके आधार पर आपने निष्कर्ष निकाला कि शकुन रानी या किसी अन्य व्यक्ति ने दो बार मतदान किया है, ताकि हमारे कार्यालय द्वारा विस्तृत जांच की जा सके।”
इस नोटिस से पहले, सीईओ ने राहुल गांधी को एक और पत्र भेजा था, जिसमें उन्हें मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर जोड़-घटाव के उनके दावों के लिए शपथपत्र पर हस्ताक्षर करने और उन मतदाताओं के नाम प्रदान करने को कहा गया था, जिन्हें कथित रूप से गलत तरीके से शामिल या हटाया गया था। यह पत्र 1960 के मतदाता पंजीकरण नियमों के नियम 20 (3) (ब) के तहत था, जिसमें झूठा बयान देने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है, जिसमें प्रतिनिधित्व जनता अधिनियम, 1950 की धारा 31 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227 के तहत एक साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
राहुल गांधी के आरोपों ने कर्नाटक और देशभर में राजनीतिक हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने महादेवपुरा में मतदाता सूची की छानबीन के लिए 30-40 लोगों की एक समर्पित टीम बनाई थी, जिसने 6.5 लाख मतदाताओं की सूची में 11,965 डुप्लिकेट मतदाता, 40,009 फर्जी पतों, 10,452 एक ही पते पर सामूहिक पंजीकरण, 4,132 बिना फोटो के वोट और 33,692 फॉर्म 6 के दुरुपयोग के मामले पाए। उन्होंने कहा, “हमारी आंतरिक सर्वेक्षण के अनुसार, कर्नाटक में हमें 16 लोकसभा सीटें मिलनी चाहिए थीं, लेकिन हमें केवल नौ मिलीं।” यह दावा बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट के संदर्भ में था, जहां भाजपा के पी.सी. मोहन ने कांग्रेस के मंसूर अली खान को 32,707 वोटों से हराया था।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने भी इन आरोपों का समर्थन किया और महादेवपुरा और गांधीनगर में मतदाता धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की। उन्होंने कहा, “वोट चोरी केवल महादेवपुरा में नहीं, बल्कि पूरे कर्नाटक में हुई। हमने निर्वाचन आयोग से इस धोखाधड़ी की जांच करने और संबंधित अधिकारियों, चाहे वह ब्लॉक स्तर का अधिकारी हो या रिटर्निंग ऑफिसर, को दंडित करने का अनुरोध किया है।”
निर्वाचन आयोग ने राहुल के दावों को “आधारहीन” और “राजनीति से प्रेरित” करार देते हुए खारिज किया। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची पारदर्शी तरीके से तैयार की गई थी और सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा की गई थी। कर्नाटक सीईओ ने यह भी बताया कि नवंबर 2024 में ड्राफ्ट मतदाता सूची और जनवरी 2025 में अंतिम सूची प्रकाशित की गई थी, लेकिन कांग्रेस ने उस समय कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं की। आयोग ने जोर देकर कहा कि अगर राहुल के पास वास्तव में सबूत हैं, तो उन्हें नियमों के अनुसार शपथपत्र जमा करना चाहिए, अन्यथा उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।
राहुल गांधी ने इन नोटिसों का जवाब देते हुए कहा, “मैं एक राजनेता हूं। मैं जो लोगों से कहता हूं, वह मेरा शब्द है। इसे शपथ के रूप में लें। यह निर्वाचन आयोग का डेटा है, और हम उनका डेटा ही प्रदर्शित कर रहे हैं। उन्होंने यह नहीं कहा कि मेरे द्वारा उल्लिखित मतदाता सूची गलत है। वे ऐसा क्यों नहीं कहते? क्योंकि वे सच्चाई जानते हैं।” उन्होंने अपनी बात को और मजबूत करने के लिए एक वेबसाइट “votechori.in” लॉन्च की, जिसमें लोगों से निर्वाचन आयोग से पारदर्शिता की मांग में शामिल होने का आह्वान किया गया।
इस विवाद ने सोशल मीडिया पर भी तीव्र प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कीं। कुछ यूजर्स ने राहुल के दावों का समर्थन किया, उनका मानना था कि मतदाता सूची में धोखाधड़ी एक गंभीर मुद्दा है। एक यूजर ने लिखा, “राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग की पोल खोल दी। अगर उनके पास सबूत हैं, तो इसे सार्वजनिक करना चाहिए।” वहीं, अन्य ने इसे राजनीतिक नौटंकी करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “यह सब ड्रामा है। अगर सबूत हैं, तो कोर्ट में क्यों नहीं जाते?”
भाजपा ने भी इस मुद्दे पर पलटवार किया। पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा, “राहुल गांधी के आरोप निराधार हैं। उन्हें महादेवपुरा और देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।” कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस मामले में कहा कि राज्य का कानून विभाग इन आरोपों की जांच करेगा और उचित कानूनी कार्रवाई का सुझाव देगा।
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