भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन 2026: एक दशक बाद नई दिल्ली में जुटेगा अफ्रीकी नेतृत्व, नई रणनीतिक साझेदारी पर जोर।
भारत और अफ्रीकी देशों के बीच सदियों पुराने संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के लिए इस महीने नई दिल्ली में 'चौथा भारत-अफ्रीका
- 'IA SPIRIT' के साथ भविष्य की तैयारी: नवाचार, लचीलापन और समावेशी परिवर्तन के लिए भारत-अफ्रीका ने मिलाया हाथ
- ग्लोबल साउथ की गूंज: चौथे भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन में व्यापार, सुरक्षा और डिजिटल तकनीक पर केंद्रित रहेगा संवाद
भारत और अफ्रीकी देशों के बीच सदियों पुराने संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के लिए इस महीने नई दिल्ली में 'चौथा भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन' (IAFS-IV) आयोजित होने जा रहा है। करीब एक दशक के लंबे अंतराल के बाद हो रही यह बैठक न केवल कूटनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उभरती हुई वैश्विक व्यवस्था में 'ग्लोबल साउथ' की सामूहिक शक्ति को प्रदर्शित करने का एक बड़ा मंच भी साबित होगी। 2015 में हुए पिछले शिखर सम्मेलन के बाद से दुनिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं, ऐसे में यह सम्मेलन भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए एक नया रोडमैप तैयार करेगा। भारत और अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक संबंधों को नया आयाम देने के उद्देश्य से आयोजित होने वाला यह चौथा शिखर सम्मेलन 31 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह लगभग 11 साल बाद आयोजित हो रहा है, जो दोनों क्षेत्रों के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों की निरंतरता को दर्शाता है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इस सम्मेलन का आयोजन अफ्रीकी संघ आयोग के सहयोग से किया जा रहा है। यह बैठक केवल एक औपचारिक कूटनीतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह अफ्रीका के विकास में भारत की सक्रिय भागीदारी और अफ्रीकी देशों की बढ़ती वैश्विक भूमिका को स्वीकार करने का एक माध्यम है।
सम्मेलन की तैयारियों को लेकर नई दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठकें पहले ही शुरू हो चुकी हैं, जिसमें सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस बार के शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय (थीम) 'IA SPIRIT: India-Africa Strategic Partnership for Innovation, Resilience, and Inclusive Transformation' रखा गया है। यह विषय भारत और अफ्रीका के बीच सहयोग के बदलते स्वरूप को दर्शाता है, जहाँ अब ध्यान केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित न रहकर नवाचार, तकनीकी विकास और लचीली प्रणालियों के निर्माण पर है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले दिनों इस सम्मेलन के लोगो और वेबसाइट का अनावरण करते हुए स्पष्ट किया था कि भारत का मॉडल अफ्रीका के साथ 'साझेदारी' का है, न कि केवल 'लेन-देन' का। इस थीम के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में ठोस परिणाम प्राप्त करने के लिए विशेष कार्य योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
शिखर सम्मेलन की आधिकारिक बैठकों की शुरुआत 28 मई 2026 को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक (SOM) के साथ होगी। इसके बाद 29 मई को भारत और अफ्रीकी देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक निर्धारित है, जिसमें सम्मेलन के घोषणापत्र और भविष्य के सहयोग के मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा। मुख्य शिखर वार्ता 31 मई को होगी, जहाँ भारत के प्रधानमंत्री और अफ्रीकी देशों के राष्ट्राध्यक्ष आमने-सामने बैठकर वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इन बैठकों के दौरान भारत-अफ्रीका व्यापारिक परिषद की बैठकें भी आयोजित होंगी, जिनमें निजी क्षेत्र के निवेशकों को अफ्रीकी बाजारों में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। चौथे भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन का एक मुख्य आकर्षण 'भारत-अफ्रीका थिंक टैंक' का जमावड़ा होगा। यह मंच दोनों क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को एक साथ लाएगा ताकि भविष्य की चुनौतियों का बौद्धिक समाधान खोजा जा सके। थिंक टैंक की इस बैठक में वैश्विक ऋण संकट, खाद्य सुरक्षा और तकनीक के हस्तांतरण जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (जैसे यूपीआई और आधार) अफ्रीका के वित्तीय समावेशन के लिए एक बेहतरीन मॉडल साबित हो सकता है। थिंक टैंक के माध्यम से निकलकर आने वाले विचार आधिकारिक नीति निर्माण का आधार बनेंगे, जो इस साझेदारी को अधिक टिकाऊ बनाएंगे।
आर्थिक मोर्चे पर यह सम्मेलन भारत के लिए अफ्रीका के विशाल संसाधनों और उभरते हुए बाजार के द्वार खोलने का अवसर प्रदान करेगा। अफ्रीका में भारतीय निवेश लगातार बढ़ रहा है और भारतीय कंपनियां वहां विनिर्माण, कृषि प्रसंस्करण और ऊर्जा क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। सम्मेलन के दौरान कई नए व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जो विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा और सौर ऊर्जा गठबंधन (ISA) के विस्तार पर केंद्रित होंगे। भारत ने हमेशा से अफ्रीका को अपने 'विक्सित भारत 2047' और अफ्रीका के 'एजेंडा 2063' के बीच एक पुल के रूप में देखा है। यह आर्थिक साझेदारी न केवल दोनों क्षेत्रों के विकास में सहायक होगी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भी अधिक विविध बनाएगी। सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग भी इस सम्मेलन के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हैं। समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और रक्षा प्रशिक्षण के क्षेत्र में भारत और अफ्रीकी देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत अफ्रीकी देशों की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए रक्षा उपकरणों के निर्यात और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को बढ़ावा दे रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए पूर्वी अफ्रीकी देशों के साथ भारत का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन के माध्यम से भारत अपनी रक्षा कूटनीति को और अधिक सक्रिय बनाने की दिशा में कदम उठाएगा, जिससे दोनों क्षेत्रों की संप्रभुता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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