सम्राट चौधरी का कड़ा संदेश: 'मेरे अपने घर की सीढ़ियां भी तोड़ी गईं', सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे 'बुलडोजर एक्शन' को लेकर एक अत्यंत

Apr 27, 2026 - 11:36
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सम्राट चौधरी का कड़ा संदेश: 'मेरे अपने घर की सीढ़ियां भी तोड़ी गईं', सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति।
सम्राट चौधरी का कड़ा संदेश: 'मेरे अपने घर की सीढ़ियां भी तोड़ी गईं', सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति।
  • बिहार में बुलडोजर राज पर सम्राट चौधरी की दो टूक: 'अतिक्रमण पर कार्रवाई जारी रहेगी, कानून सबके लिए बराबर'
  • सम्राट चौधरी का बड़ा बयान: निजी जमीन पर निर्माण सुरक्षित, लेकिन अतिक्रमणकारियों पर जमकर गरजेगा सरकारी बुलडोजर

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे 'बुलडोजर एक्शन' को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में कानून का शासन स्थापित करने के लिए अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध यह कार्रवाई किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगी। सम्राट चौधरी ने अपने पैतृक क्षेत्र तारापुर के दौरे के दौरान जनता को संबोधित करते हुए एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसने सभी को चौंका दिया। उन्होंने बताया कि सरकारी नियमों के पालन की शुरुआत उन्होंने स्वयं के घर से की है। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उनके अपने घर की सीढ़ियां भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के दायरे में आ रही थीं, जिन्हें प्रशासन द्वारा तोड़ दिया गया है। उनके इस बयान ने यह संदेश साफ कर दिया है कि कानून की नजर में सत्ता और रसूख का कोई स्थान नहीं है और नियम सभी के लिए समान हैं। बिहार की राजनीति में इन दिनों बुलडोजर एक बड़े प्रशासनिक प्रतीक के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य के विकास के लिए सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त करना अनिवार्य है। उन्होंने तारापुर विधानसभा क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक सप्ताह पूर्व उन्हें इस बात की जानकारी मिली थी कि उनके अपने घर की कुछ सीढ़ियां सरकारी जमीन के दायरे में आ रही हैं। मुख्यमंत्री ने बिना किसी देरी के प्रशासन को अपना काम करने की अनुमति दी और उन सीढ़ियों को ध्वस्त कर दिया गया। सम्राट चौधरी ने कहा कि जब मुख्यमंत्री का घर सुरक्षित नहीं है, तो किसी भी अन्य व्यक्ति द्वारा किया गया अवैध निर्माण कैसे बच सकता है। उनका यह बयान उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है जो राजनीतिक संरक्षण के नाम पर सरकारी भूमि पर कब्जा जमाए बैठे हैं।

मुख्यमंत्री ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को विस्तार से समझाते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी भी निर्दोष नागरिक को परेशान करना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी निजी और वैध जमीन पर निर्माण किया है, तो उस पर बुलडोजर नहीं चलेगा। सरकार केवल उन्हीं ढांचों को निशाना बना रही है जो सरकारी सड़कों, नालों या सरकारी परिसरों की भूमि को घेरकर बनाए गए हैं। सम्राट चौधरी ने जनता से अपील की कि वे एक सुंदर और समृद्ध बिहार के निर्माण में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जब तक अतिक्रमण नहीं हटेगा, तब तक सड़कों का चौड़ीकरण और बुनियादी ढांचे का विकास संभव नहीं है। यह कार्रवाई केवल एक सांकेतिक कदम नहीं है, बल्कि बिहार को आधुनिक बनाने की दिशा में एक सुनियोजित अभियान है। सम्राट चौधरी के गृह मंत्री और अब मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से ही बिहार के विभिन्न जिलों जैसे पटना, मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की छवि को बदलने के लिए कड़े फैसलों की जरूरत है। उन्होंने पूर्व की व्यवस्थाओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब वह समय बीत चुका है जब रसूखदार लोग कानून को अपनी जेब में रखते थे। उन्होंने प्रशासन को खुली छूट दी है कि वे बिना किसी भेदभाव के अवैध कब्जों को चिह्नित करें और उन पर बुलडोजर चलाएं। सम्राट चौधरी का मानना है कि इस सख्त रवैये से ही आम जनता के मन में कानून के प्रति सम्मान और अपराधियों व भू-माफियाओं के मन में भय पैदा होगा।

उत्तर प्रदेश मॉडल की झलक

बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के इस कदम को पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के 'बुलडोजर मॉडल' से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सम्राट चौधरी अपनी छवि एक सख्त प्रशासक के रूप में गढ़ रहे हैं, जो अपराधियों और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी बरतने को तैयार नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि बिहार में निवेश और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए जमीन की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार नवंबर 2026 तक राज्य में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए औद्योगिक गलियारों का निर्माण किया जाना है, जिसके रास्ते में आने वाले हर एक अतिक्रमण को हटाया जाएगा। सम्राट चौधरी ने कहा कि जो लोग विकास की राह में रोड़ा बनेंगे, उन्हें परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को भी चेतावनी दी कि यदि अतिक्रमण को बढ़ावा देने या उसे संरक्षण देने में किसी की संलिप्तता पाई गई, तो उनके खिलाफ भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विपक्षी दलों द्वारा इस बुलडोजर कार्रवाई को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी मुख्यमंत्री ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग इसे बदले की कार्रवाई बता रहे हैं, वे दरअसल उन भू-माफियाओं के हितैषी हैं जिन्होंने वर्षों तक बिहार की संपदा को लूटा है। सम्राट चौधरी ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल गरीब की झोपड़ी तोड़ना नहीं है, बल्कि उन बड़े आलीशान बंगलों और व्यावसायिक परिसरों को भी ध्वस्त करना है जो सरकारी जमीन पर अवैध रूप से तान दिए गए हैं। उन्होंने दोहराया कि न्याय प्रणाली में पारदर्शिता बरती जा रही है और हर कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को पर्याप्त नोटिस और अपना पक्ष रखने का समय दिया जा रहा है। अपने पैतृक गांव और निर्वाचन क्षेत्र के प्रति भावनात्मक जुड़ाव दिखाते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि वह तारापुर की मिट्टी के बेटे हैं और उनका पद उनके लिए सेवा का एक अवसर है। उन्होंने कहा कि जिस तरह तारापुर के लोगों ने उन्हें मान-सम्मान दिया है, वह उसका कर्ज बिहार के विकास के जरिए उतारेंगे। बुलडोजर एक्शन को उन्होंने इसी सेवा का एक हिस्सा बताया, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक व्यवस्थित और साफ-सुथरा प्रदेश सुनिश्चित करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान चुनावी नहीं है, बल्कि यह सुशासन का एक स्थायी हिस्सा बनेगा। सम्राट चौधरी के इस बयान के बाद अब प्रशासनिक अमला और अधिक सक्रिय हो गया है और आने वाले दिनों में बिहार के कई अन्य हिस्सों में भी पीला पंजा गरजता हुआ दिखाई देगा।

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