चुनावी दंगल में जुबानी जंग तेज: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के नौका विहार पर साधा निशाना।

पश्चिम बंगाल की राजनीति और केंद्र सरकार के बीच का गतिरोध एक नए चरम पर पहुंच गया है। हाल ही में प्रधानमंत्री के गंगा नदी में नौका

Apr 25, 2026 - 11:58
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चुनावी दंगल में जुबानी जंग तेज: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के नौका विहार पर साधा निशाना।
चुनावी दंगल में जुबानी जंग तेज: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के नौका विहार पर साधा निशाना।
  • यमुना की सफाई पर सियासी संग्राम: ममता बनर्जी की पीएम को खुली चुनौती, दिल्ली की नदी में डुबकी लगाने की कही बात
  • नमामि गंगे बनाम यमुना प्रदूषण: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री का केंद्र पर तीखा प्रहार, दिल्ली की स्थिति को बताया दयनीय

पश्चिम बंगाल की राजनीति और केंद्र सरकार के बीच का गतिरोध एक नए चरम पर पहुंच गया है। हाल ही में प्रधानमंत्री के गंगा नदी में नौका विहार और धार्मिक अनुष्ठानों की तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नदी सफाई परियोजनाओं पर सवाल उठाए। ममता बनर्जी ने कहा कि गंगा की पवित्रता का प्रदर्शन करना आसान है, लेकिन दिल्ली की यमुना नदी की बदहाली को सुधारना केंद्र की असली परीक्षा है। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है और विकास के दावों के साथ-साथ पर्यावरण और स्वच्छता के मुद्दों पर भी बहस छिड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के दौरान दिल्ली में यमुना नदी के प्रदूषण स्तर को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यदि केंद्र सरकार नदियों की सफाई के अपने दावों को लेकर इतनी ही आश्वस्त है, तो प्रधानमंत्री को एक बार दिल्ली की यमुना नदी के जहरीले झाग वाले पानी में डुबकी लगाकर दिखाना चाहिए। ममता बनर्जी ने तर्क दिया कि गंगा के घाटों पर फोटो खिंचवाना और नौका विहार करना केवल प्रतीकात्मक राजनीति है, जबकि वास्तविकता यह है कि देश की राजधानी से गुजरने वाली प्रमुख नदी आज एक नाले में तब्दील हो चुकी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर 'नमामि गंगे' योजना के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम न दे पाने का आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने बंगाल में गंगा की सफाई के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की तुलना केंद्र की नीतियों से की। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद हुगली (गंगा) के किनारे घाटों के सौंदर्यीकरण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल को मिलने वाले नदी विकास कोष में कटौती की गई है, जबकि दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बड़ी-बड़ी योजनाओं का प्रचार किया जा रहा है। ममता बनर्जी का यह प्रहार सीधे तौर पर केंद्र की 'स्वच्छ भारत' और 'नदी कायाकल्प' नीतियों की विश्वसनीयता को चुनौती देने वाला है।

यमुना का झाग और राजनीति की धार

दिल्ली की यमुना नदी में हर साल सर्दियों और मानसून के दौरान सफेद जहरीला झाग देखा जाता है, जो औद्योगिक कचरे और अनट्रीटेड सीवेज के कारण होता है। यह मुद्दा वर्षों से केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और पड़ोसी राज्यों के बीच विवाद का विषय रहा है। ममता बनर्जी ने इसी ज्वलंत मुद्दे को हथियार बनाकर केंद्र की घेराबंदी की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आगामी चुनावों में प्रदूषण और बुनियादी ढांचा प्रमुख चुनावी मुद्दे बनने जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह बयान केवल पर्यावरण प्रेम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। वे खुद को केंद्र के विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही हैं और सीधे प्रधानमंत्री को चुनौती देकर अपनी राष्ट्रीय छवि को मजबूत करना चाहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केवल उन परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करती है जिनका विजुअल इम्पैक्ट अधिक होता है, जबकि यमुना जैसी कठिन चुनौतियों से मुंह मोड़ लिया जाता है। उनके इस तंज ने न केवल भाजपा नेतृत्व को असहज किया है, बल्कि दिल्ली की प्रशासनिक विफलताओं को भी राष्ट्रीय पटल पर लाकर खड़ा कर दिया है।

ममता बनर्जी ने नमामि गंगे परियोजना के ऑडिट की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का हक है कि गंगा की सफाई के नाम पर आवंटित हजारों करोड़ रुपये कहां खर्च किए गए। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि धार्मिक आस्था और श्रद्धा का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, नदी को मां कहना और फिर उसकी सफाई के नाम पर केवल विज्ञापन देना पाखंड की पराकाष्ठा है। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र को केवल तस्वीरों पर ध्यान देने के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और यमुना जैसी नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए कठोर कानून बनाने चाहिए। केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। भाजपा नेताओं ने ममता बनर्जी के बयान को अपमानजनक और विकास विरोधी करार दिया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता इसे मुख्यमंत्री की निडरता का प्रतीक मान रहे हैं। पश्चिम बंगाल में इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है, जहां यमुना और गंगा की तुलनात्मक तस्वीरें साझा की जा रही हैं। यह विवाद अब केवल दो नेताओं के बीच का नहीं रहा, बल्कि यह दो अलग-अलग प्रशासनिक मॉडल और विकास की परिभाषाओं के बीच की जंग बन गया है।

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