अमित शाह का सख्त संदेश: घुसपैठ पर ‘डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’, भारत कोई धर्मशाला नहीं बनेगा।
नई दिल्ली में एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ और जनसांख्यिकीय परिवर्तन के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। 10 अक्टूबर 2025 को
नई दिल्ली में एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ और जनसांख्यिकीय परिवर्तन के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। 10 अक्टूबर 2025 को दैनिक जागरण के पूर्व संपादक नरेंद्र मोहन की स्मृति में आयोजित व्याख्यान में उन्होंने कहा कि अगर दुनिया का हर व्यक्ति भारत आ जाए तो देश एक धर्मशाला बन जाएगा। शाह ने जोर देकर कहा कि घुसपैठ को राजनीतिक चश्मे से देखना गलत है। ऐसे लोगों को संरक्षण नहीं देना चाहिए जो धार्मिक प्रताड़ना से पीड़ित नहीं हैं और आर्थिक या अन्य कारणों से अवैध रूप से देश में प्रवेश करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वोट देने का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को मिलना चाहिए। भाजपा 1950 के दशक से ही घुसपैठियों के खिलाफ ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ के सिद्धांत पर काम कर रही है।
यह व्याख्यान ‘घुसपैठ, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और लोकतंत्र’ विषय पर था। शाह ने कहा कि भारत विभाजन के समय धर्म के आधार पर बंटा था। पाकिस्तान पूर्व और पश्चिम दोनों तरफ बना, लेकिन वहां हिंदू आबादी घट गई। पाकिस्तान में 1951 में 22.8 प्रतिशत हिंदू थे, जो 1998 तक घटकर 1.6 प्रतिशत रह गए। बांग्लादेश में 1951 में 33 प्रतिशत हिंदू थे, जो 2011 तक घटकर 7.9 प्रतिशत हो गए। इन देशों से भागे हिंदू भारत में शरण लेने आए। लेकिन भारत में मुस्लिम आबादी बढ़ी। 1951 में 9.8 प्रतिशत मुस्लिम थे, जो 2011 तक 14.2 प्रतिशत हो गए। हिंदू आबादी 84.1 प्रतिशत से घटकर 79.8 प्रतिशत रह गई। शाह ने कहा कि यह वृद्धि प्रजनन दर से नहीं, बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से घुसपैठ के कारण हुई।
शाह ने शरणार्थी और घुसपैठिए के बीच अंतर स्पष्ट किया। शरणार्थी वे हैं जो धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए आते हैं। भारत ने हमेशा ऐसे लोगों का स्वागत किया है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) इसी का उदाहरण है। सीएए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को नागरिकता देता है। ये वे लोग हैं जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए थे। शाह ने कहा कि विभाजन के समय पंडित नेहरू ने वादा किया था कि भारत सभी उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों का घर बनेगा। मोदी सरकार ने यह वादा पूरा किया। लेकिन घुसपैठिए वे हैं जो आर्थिक लाभ या अन्य कारणों से अवैध रूप से सीमा पार करते हैं। ऐसे लोगों को देश में बसने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधा। कहा कि कुछ पार्टियां घुसपैठ को वोट बैंक के रूप में देखती हैं। इसलिए वे घुसपैठियों को संरक्षण देती हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में यह समस्या गंभीर है। चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) अभियान का समर्थन करते हुए शाह ने कहा कि मतदाता सूची में घुसपैठियों का नाम शामिल होना संविधान की भावना के विरुद्ध है। कई क्षेत्रों में 30 प्रतिशत तक घुसपैठिए पकड़े गए हैं। एसआईआर से मतदाता सूची साफ होगी। केवल नागरिक ही वोट दे सकेंगे। शाह ने कहा कि भाजपा का सिद्धांत स्पष्ट है। पहले घुसपैठ का पता लगाओ, फिर मतदाता सूची से नाम हटाओ और अंत में देश से बाहर करो। यह नीति 1950 के दशक से चली आ रही है।
शाह ने सीमा सुरक्षा पर भी बात की। कहा कि भारत ने बांग्लादेश सीमा पर 90 प्रतिशत से ज्यादा बाड़ लगाई है। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने 450 किलोमीटर भूमि नहीं दी, इसलिए काम रुका हुआ है। गुजरात और राजस्थान में सीमा होने के बावजूद वहां घुसपैठ नहीं होती, क्योंकि वहां सख्त कार्रवाई होती है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी के दौरान घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के निर्देश दिए। 9 अक्टूबर को सुरक्षा समीक्षा बैठक में शाह ने अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा। आतंकवादी बर्फ का फायदा उठाकर घुसपैठ कर सकते हैं।
यह बयान राजनीतिक बहस छेड़ने वाला है। विपक्ष ने शाह के बयान पर प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस ने कहा कि यह विभाजनकारी भाषण है। लेकिन शाह ने पलटवार किया कि सच्चाई से भागना गलत है। जनसांख्यिकीय परिवर्तन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। अगर अनियंत्रित घुसपैठ जारी रही तो लोकतंत्र कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि भारत एक राष्ट्र है, धर्मशाला नहीं। हर आने वाले को जांच के बाद ही प्रवेश मिलना चाहिए। पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य या व्यापार के लिए आने वालों का स्वागत है, लेकिन सुरक्षा को खतरा डालने वालों को नहीं।
शाह का यह व्याख्यान नरेंद्र मोहन की स्मृति में था। नरेंद्र मोहन दैनिक जागरण के पूर्व संपादक थे, जिन्होंने पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक हस्तियां मौजूद थीं। शाह ने मोहन को याद करते हुए कहा कि पत्रकारिता सत्य की खोज है। घुसपैठ जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा जरूरी है। उन्होंने सीएए को फिर से रेखांकित किया। कहा कि यह कानून भेदभावपूर्ण नहीं है। यह केवल उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के लिए है। रोहिंग्या या अन्य अवैध प्रवासियों को इससे लाभ नहीं मिलेगा।
भारत में घुसपैठ की समस्या पुरानी है। असम में 1979-1985 का आंदोलन इसी के खिलाफ था। भाजपा ने हमेशा इसका विरोध किया। शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने सीमा सुरक्षा मजबूत की। नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 12 से घटकर 6 रह गई। आतंकवाद पर करारा प्रहार किया। अब घुसपैठ पर भी सख्ती बढ़ेगी। उन्होंने चुनाव आयोग की सराहना की। एसआईआर बिहार में चल रहा है, जहां घुसपैठ की शिकायतें ज्यादा हैं। इस अभियान से लाखों नाम साफ हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शाह का बयान सीएए और एनआरसी को मजबूत करने का प्रयास है। जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखना जरूरी है। लेकिन आलोचक कहते हैं कि इससे अल्पसंख्यक समुदाय में भय पैदा हो सकता है। शाह ने स्पष्ट किया कि सीएए मुसलमानों के खिलाफ नहीं। यह पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए है। भारत में मुसलमान सुरक्षित हैं। घुसपैठ रोकना सबका हित है।
यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में है। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने इसका विरोध किया। लेकिन शाह ने कहा कि पड़ोसी देशों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। भारत अकेला बोझ नहीं उठा सकता। सरकार ने इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 पास किया, जिसमें अवैध प्रवास पर सख्त प्रावधान हैं। बायोमेट्रिक डेटा और ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान है।
शाह का संदेश स्पष्ट है। भारत खुला दरवाजा नहीं है। राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं। घुसपैठ रोकने के लिए केंद्र और राज्य मिलकर काम करें। विपक्ष को भी राजनीति से ऊपर उठना चाहिए। अगर सब एकजुट हुए तो देश मजबूत बनेगा। यह व्याख्यान न केवल नीति का बयान था, बल्कि एक चेतावनी भी। आने वाले समय में घुसपैठ पर और सख्त कार्रवाई होगी। भाजपा का ‘डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’ सिद्धांत अमल में लाया जाएगा।
कार्यक्रम के बाद शाह ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि जनता को सच्चाई पता होनी चाहिए। जनसांख्यिकीय परिवर्तन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मोदी सरकार प्रतिबद्ध है। सीमा पर निगरानी बढ़ाई गई है। ड्रोन और तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग पूरी करने का लक्ष्य है। पश्चिम बंगाल को पत्र लिखा गया है। अगर सहयोग न मिला तो केंद्रीय एजेंसियां कार्रवाई करेंगी।
यह मुद्दा चुनावी भी है। बिहार विधानसभा चुनाव आने वाले हैं। एसआईआर से भाजपा को फायदा हो सकता है। विपक्ष आरोप लगाता है कि यह हिंदू-मुस्लिम विभाजन है। लेकिन शाह कहते हैं कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है। सभी समुदायों का हित सुरक्षित रखा जाएगा। भारत एकता का प्रतीक है। घुसपैठ से यह एकता खतरे में पड़ सकती है।
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