Share Market Fall: ईरान पर अमेरिकी हमले से सहमा शेयर बाजार, सेंसेक्स 350 अंक टूटा, ब्रेंट क्रूड $76 के पार

US Attack on Iran Impact: ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट। Sensex 350 अंक टूटा, Nifty 24259 पर खुला। ब्रेंट क्रूड $76 के पार पहुंचा।

Jul 8, 2026 - 12:11
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Share Market Fall: ईरान पर अमेरिकी हमले से सहमा शेयर बाजार, सेंसेक्स 350 अंक टूटा, ब्रेंट क्रूड $76 के पार
Sensex Crash Today
  • US Attack on Iran: पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक बाजारों में हड़कंप, Nifty और Sensex गिरे, डिफेंस शेयरों में तेजी
  • ईरान पर अमेरिका के हमले से शेयर बाजार में हाहाकार, कच्चा तेल 2.5% उछला; इन शेयरों में मची लूट
  • ग्लोबल मार्केट में भूचाल: ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद भारतीय शेयर बाजार धड़ाम, कच्चा तेल हुआ महंगा

पश्चिम एशिया में अचानक गहराए भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में एक बार फिर मंदी के बादल छा गए हैं। ईरान पर अमेरिका के सैन्य हमले (US Attack on Iran) की खबर के बाद बुधवार को भारतीय घरेलू शेयर बाजार (Share Market Fall) भारी गिरावट के साथ खुले। इस तनाव की वजह से बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी (Nifty) ने पिछले तीन दिनों की अपनी पूरी बढ़त गंवा दी और 24259 के स्तर पर खुला, जबकि सेंसेक्स (Sensex) भी 350 अंकों की कमजोरी के साथ 77800 पर कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस संकट के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल ढाई फीसदी की छलांग लगाकर 76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। बाजार में मचे इस हाहाकार के बीच निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षात्मक रुख वाले डिफेंस, फार्मा और हेल्थकेयर काउंटरों की तरफ बढ़ा है।

वैश्विक राजनीतिक पटल पर हुए एक बड़े उलटफेर में अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शेयर बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में फिर से पैदा हुए इस गंभीर सुरक्षा संकट के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, विशेषकर कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका गहरा गई है। इसी का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखा गया, जहाँ पिछले कुछ सत्रों से जारी रिकवरी पर पूरी तरह पानी फिर गया और सुबह बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई है।

बाजार का हाल

बुधवार सुबह जैसे ही अमेरिकी कार्रवाई की खबरें सार्वजनिक हुईं, एशियाई बाजारों समेत भारतीय शेयर बाजार के सेंटीमेंट बिगड़ गए।

निफ्टी की स्थिति: निफ्टी 50 इंडेक्स ने पिछले तीन कारोबारी सत्रों की मेहनत पर पानी फेरते हुए 24259 के स्तर पर ओपनिंग की।

सेंसेक्स का हाल: बीएसई सेंसेक्स 350 अंकों की तगड़ी गिरावट दर्ज करते हुए 77800 के स्तर पर ट्रेंड करने लगा।

बैंक निफ्टी में कमजोरी: बैंकिंग सेक्टर पर भी इसका बुरा असर दिखा और बैंक निफ्टी 273 अंकों की कमजोरी के साथ 57930 के स्तर पर फिसल गया।

कमोडिटी मार्केट की बात करें तो तेल उत्पादक क्षेत्र में युद्ध की आहट से कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उबाल आ गया। ब्रेंट क्रूड का भाव 2.5% उछलकर 76 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। कच्चे तेल की यह महंगाई भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

बाजार का रुझान

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जब भी तनाव बढ़ता है, तब निवेशक जोखिम वाले एसेट्स (जैसे इक्विटी) से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर भागते हैं। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, "क्रूड ऑयल का 76 डॉलर के पार जाना भारतीय रुपये और राजकोषीय घाटे के लिए अच्छा संकेत नहीं है, यही वजह है कि घरेलू बाजार में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है।"

हालांकि, इस मंदी और अनिश्चितता के माहौल में भी कुछ सेक्टर्स को लेकर निवेशकों में भारी उत्साह है। बाजार में चल रही उथल-पुथल के बीच डिफेंस (रक्षा क्षेत्र) के शेयरों में तेजी से खरीदारी लौट आई है। इसके साथ ही सेफ-हेवन माने जाने वाले निफ्टी फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स में भी 1 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि निवेशक फार्मास्यूटिकल्स और डिफेंस जैसे रक्षात्मक सेक्टर्स में खुद को सुरक्षित रख रहे हैं।

इस सैन्य टकराव का प्रभाव बहुआयामी और व्यापक होने की उम्मीद है:

आर्थिक मोर्चे पर: कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत में आयात लागत बढ़ेगी, जिससे आने वाले समय में महंगाई और माल ढुलाई महंगी हो सकती है।

कॉर्पोरेट अर्निंग्स: पेंट, एविएशन और टायर्स जैसे सेक्टर्स, जो सीधे तौर पर कच्चे तेल के डेरिवेटिव्स पर निर्भर हैं, उनके मार्जिन पर दबाव आ सकता है।

निवेशकों की संपत्ति: बाजार के इस शुरुआती क्रैश से निवेशकों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, क्योंकि चौतरफा बिकवाली के कारण अधिकांश लार्जकैप और मिडकैप शेयर लाल निशान में ट्रेड कर रहे हैं।

आने वाले कारोबारी सत्रों में शेयर बाजार की दिशा पूरी तरह से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के स्तर पर निर्भर करेगी। यदि यह संकट राजनयिक स्तर पर नहीं सुलझा और संघर्ष लंबा खिंचा, तो कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी छू सकती हैं, जिससे शेयर बाजार में गिरावट का दौर लंबा हो सकता है। बाजार नियामक और निवेशक अब अमेरिकी प्रशासन और ईरानी नेतृत्व की अगली रणनीतिक प्रतिक्रियाओं पर कड़ी नजर रख रहे हैं। रिटेल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वर्तमान उतार-चढ़ाव वाले बाजार में भारी एकमुश्त निवेश से बचें और फार्मा व डिफेंस जैसे सेक्टर्स में ही चुनिंदा खरीदारी करें।.

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