Rashid Alvi on Congress: कांग्रेस पर बरसे राशिद अल्वी, कहा- 'वरिष्ठों की हो रही अनदेखी, मुसलमान हूँ इसलिए मुझे कहा गया जयचंद'
Rashid Alvi Slams Congress: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने पार्टी के भीतर वरिष्ठों की अनदेखी और खुद को 'जयचंद' कहे जाने पर आलाकमान को घेरा है। पढ़ें पूरी खबर।

- Rashid Alvi Statement: पंजाब असंतोष और एआईसीसी लिस्ट पर राशिद अल्वी का बड़ा बयान, कांग्रेस आलाकमान और मल्लिकार्जुन खरगे से की शिकायत
- 'मुसलमान हूँ इसलिए मेरे खिलाफ बोलना आसान...' कांग्रेस के दिग्गज नेता राशिद अल्वी का अपनी ही पार्टी पर फूटा गुस्सा, लगाए गंभीर आरोप
- Congress Crisis: कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने पार्टी नेतृत्व को घेरा, वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी और खुद को 'जयचंद' कहे जाने पर जताई गहरी नाराजगी
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा हाल ही में जारी की गई संगठनात्मक सूचियों और पंजाब कांग्रेस के भीतर पनपे असंतोष को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद राशिद अल्वी (Rashid Alvi) का बड़ा बयान सामने आया है। शनिवार (4 जुलाई 2026) को मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने पार्टी के भीतर वरिष्ठ और सक्षम नेताओं की लगातार हो रही अनदेखी पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की। अल्वी ने सीधे तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को संबोधित करते हुए कहा कि इन शिकायतों पर विचार करना संगठन के शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही, उन्होंने खुद को अल्पसंख्यक समिति की बैठक में न बुलाए जाने और एक सांसद द्वारा उन्हें 'जयचंद' कहे जाने पर पूरी पार्टी की खामोशी को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। इस बयान के बाद कांग्रेस के आंतरिक मतभेद एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर आ गए हैं।
- एआईसीसी सूची और अनदेखी पर खुला विद्रोह
यह पूरा मामला कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक असंतोष और वरिष्ठ नेताओं के बीच पनप रही उपेक्षा की भावना से जुड़ा है। पंजाब कांग्रेस में नई सूचियों के आने के बाद से ही खींचतान मची हुई थी, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए राशिद अल्वी ने स्वीकार किया कि संगठन के भीतर तकलीफ की स्थिति है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के लिए दशकों तक खून-पसीना बहाने वाले सक्षम चेहरों को दरकिनार किया जा रहा है, जिसके कारण पंजाब से लेकर दिल्ली तक असंतोष की आवाजें बुलंद हो रही हैं।
- 'जयचंद' वाले जुमले और मुस्लिम पहचान का मुद्दा
राशिद अल्वी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ कांग्रेस पार्टी के लिए काम कर रहे हैं और वर्तमान में पार्टी के अंदर गिने-चुने 3-4 वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं में से एक हैं। इसके बावजूद संगठन के भीतर उनकी स्थिति को हाशिए पर धकेला जा रहा है। उन्होंने खुलासा किया कि कांग्रेस की अल्पसंख्यक समिति की महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जाती हैं, लेकिन उन्हें ही उन बैठकों में आमंत्रित नहीं किया जाता।
अपने संबोधन में उन्होंने एक पुरानी कड़वाहट को उजागर करते हुए कहा कि पार्टी के ही एक मौजूदा सांसद ने उन्हें सार्वजनिक रूप से 'जयचंद' (विश्वासघाती का प्रतीक) कहकर संबोधित किया था, लेकिन इस बेहद अपमानजनक टिप्पणी के बाद भी पूरी कांग्रेस पार्टी और आलाकमान खामोश रहा। किसी ने भी उस सांसद के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई या प्रतिवाद नहीं किया। अल्वी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि कांग्रेस के अंदर न जाने कितने 'जयचंद' बैठे हैं, जिनके खिलाफ कभी कोई जुमला नहीं उछाला जाता। लेकिन उनके खिलाफ ऐसा इसलिए बोला गया क्योंकि वह एक मुसलमान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम पहचान के कारण उनके खिलाफ कुछ भी बोलना और निशाना बनाना बेहद आसान समझ लिया गया है।
- इस पूरे राजनीतिक विवाद पर पार्टी के भीतर और बाहर से संतुलित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं:
राशिद अल्वी का रुख: उन्होंने स्पष्ट किया, "मैं लगातार कांग्रेस की विचारधारा के लिए खड़ा रहता हूँ और हमेशा मेहनत करता हूँ। यह कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि संगठन के सिद्धांतों की बात है। पार्टी अध्यक्ष की यह सीधी जिम्मेदारी बनती है कि वे वरिष्ठ नेताओं की इन शिकायतों और उपेक्षा पर गंभीरता से विचार करें।"
कांग्रेस आधिकारिक खेमा: कांग्रेस आलाकमान या पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं की ओर से अभी तक राशिद अल्वी के इस तीखे बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि, पार्टी के कुछ अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह संगठन का आंतरिक मामला है और इसे बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाएगा।
विपक्षी दलों का तंज: भारतीय जनता पार्टी (BJP) और अन्य विपक्षी दलों ने इस बयान को लपकते हुए कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और अपने ही वरिष्ठ नेताओं का अपमान करने का आरोप लगाया है।
- अल्पसंख्यक विंग और चुनावी राज्यों पर असर
राशिद अल्वी जैसे कद्दावर और सौम्य चेहरे द्वारा लगाए गए इन आरोपों का असर पार्टी के आंतरिक ढांचे पर पड़ना तय है।
अल्पसंख्यक समुदाय में संदेश: एक वरिष्ठ मुस्लिम नेता द्वारा खुद को धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाए जाने का दावा करने से पार्टी के अल्पसंख्यक कोर वोट बैंक के बीच असहज स्थिति पैदा हो सकती है।
संगठनात्मक अनुशासन की चुनौती: एआईसीसी और पंजाब कांग्रेस के फैसलों पर सरेआम सवाल उठाने से पार्टी के भीतर असंतुष्ट गुटों को बढ़ावा मिल सकता है, जो आगामी संगठनात्मक चुनावों को प्रभावित करेगा।
नेतृत्व पर दबाव: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर अब वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने और उनके असंतोष को दूर करने का नैतिक दबाव बढ़ गया है।
- आलाकमान के रुख पर टिकी नजरें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस नेतृत्व ने समय रहते राशिद अल्वी की इन चिंताओं और पंजाब कांग्रेस के कलह को दूर नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है। उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष या संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल जल्द ही राशिद अल्वी से व्यक्तिगत मुलाकात कर उन्हें मनाने और उनकी शिकायतों को सुनने का प्रयास कर सकते हैं ताकि डैमेज कंट्रोल किया जा सके।
What's Your Reaction?







