Dhanbad E-Rickshaw Hacking: धनबाद में BAT-BMS ऐप से हैक हो रहे ई-रिक्शा, चलते-चलते रुक रहे पहिए; चालकों की बढ़ी मुसीबत
Dhanbad E-Rickshaw Hacking: झारखंड के धनबाद में BAT-BMS ऐप के जरिए ई-रिक्शा हैक होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। चलते-चलते रिक्शा के पहिए थम रहे हैं।

- E-Rickshaw Hacking in Jharkhand: धनबाद में बैट-बीएमएस ऐप के जरिए ई-रिक्शा हैकिंग का नया खेल, जानिए कैसे ठप हो रही चालकों की रोजी-रोटी
- सावधान! अब ई-रिक्शा भी होने लगे हैं हैक; BAT-BMS App के जरिए अचानक थम जाते हैं पहिए, धनबाद से आई बेहद चौंकाने वाली खबर
- Jharkhand News: धनबाद में BAT-BMS डिजिटल ऐप के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी लॉक करने का बड़ा खुलासा, रोली-रोटी पर संकट
झारखंड के धनबाद जिले से डिजिटल सुरक्षा और तकनीकी धोखाधड़ी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। कोयलांचल क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध धनबाद में इन दिनों BAT-BMS (Battery Management System) ऐप के जरिए ई-रिक्शा को रिमोटली हैक करने का खेल चल रहा है। इस तकनीकी सेंधमारी के कारण सड़कों पर दौड़ते ई-रिक्शा के पहिए अचानक चलते-चलते थम जाते हैं और उनका पूरा पावर सिस्टम ब्लॉक हो जाता है। 3 जुलाई 2026 को स्थानीय चालकों द्वारा दी गई शिकायतों के बाद इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इस तकनीकी गड़बड़ी या सोचे-समझे फ्रॉड के कारण सैकड़ों गरीब ई-रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी पर सीधा संकट खड़ा हो गया है। अब प्रभावित ई-रिक्शा चालक इस तकनीकी समस्या और जबरन वसूली के डर से स्थानीय प्रशासन और डीलर से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
- डिजिटल ऐप के जरिए थम रहे पहिए
धनबाद शहर और इसके आस-पास के इलाकों में चलने वाले आधुनिक ई-रिक्शा में लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए 'बैट-बीएमएस' (BAT-BMS) नामक एक डिजिटल एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है। घटना यह है कि अज्ञात साइबर जालसाजों या असामाजिक तत्वों द्वारा इस सॉफ्टवेयर लूपहोल का फायदा उठाकर ई-रिक्शा की बैटरियों को ऑनलाइन एक्सेस कर हैक किया जा रहा है। जैसे ही रिक्शा हैक होता है, चालक के पैनल से उसका कंट्रोल खत्म हो जाता है, जिससे बीच सड़क पर सवारियों के साथ जा रहे रिक्शा का चलना एकदम बंद हो जाता है।
- कैसे काम करता है ई-रिक्शा हैकिंग का यह खेल
तकनीकी विशेषज्ञों और पीड़ितों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा खेल ब्लूटूथ और इंटरनेट कनेक्टिविटी के जरिए खेला जा रहा है। आधुनिक स्मार्ट बैटरियों में सुरक्षा और मॉनिटरिंग के लिए बीएमएस (बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम) लगा होता है, जो 'BAT-BMS' ऐप से सिंक रहता है।
अपराधी इस ऐप की सुरक्षा क्रेडेंशियल्स में सेंध लगाते हैं या फिर पुराने डिफॉल्ट पासवर्ड का गलत इस्तेमाल करते हैं। इसके जरिए वे रिक्शा की बैटरी को 'रिमोट लॉक' मोड पर डाल देते हैं। जब बैटरी लॉक हो जाती है, तो वह करंट देना बंद कर देती है और ई-रिक्शा बीच रास्ते में ही खड़ा हो जाता है। इसके बाद कतिपय मामलों में चालकों को डिजिटल माध्यमों से ही बैटरी को दोबारा अनलॉक करने के एवज में रुपयों की मांग की जाती है या फिर सर्विस सेंटर के चक्कर काटने के लिए मजबूर किया जाता है। कई बार फाइनेंस कंपनियों या स्थानीय डीलरों द्वारा किश्त (EMI) न चुकाने के नाम पर भी इसका अनधिकृत उपयोग किए जाने की बातें सामने आ रही हैं, जिससे आम ड्राइवर परेशान हैं।
- इस गंभीर तकनीकी संकट को लेकर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं:
ई-रिक्शा चालक संघ: धनबाद ई-रिक्शा चालक संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे गरीब लोग हैं जो प्रतिदिन कमाकर परिवार चलाते हैं। अचानक हो रही इस हैकिंग ने उन्हें सड़क पर ला दिया है। बिना किसी पूर्व सूचना के गाड़ियों का लॉक हो जाना किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ: तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) सेगमेंट में सुरक्षा मानक (Cyber Security Protocol) कमजोर होने की वजह से ऐसे ऐप्स को हैक करना आसान हो जाता है। कंपनियों को तुरंत अपने पासवर्ड और एन्क्रिप्शन सिस्टम को अपग्रेड करना चाहिए।
स्थानीय पुलिस प्रशासन: धनबाद पुलिस के अनुसार, इस डिजिटल लॉकिंग और हैकिंग से जुड़ी मौखिक शिकायतें मिली हैं। मामले की तकनीकी जांच के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि इसके पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ है या यह कोई तकनीकी ग्लिच (Glitch) है।
चालकों और यात्रियों पर दोहरी मार
इस घटना का सबसे बुरा प्रभाव धनबाद की स्थानीय परिवहन व्यवस्था और गरीब चालकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है।
आर्थिक नुकसान: जो चालक रोज 500 से 700 रुपये कमाते थे, उनका रिक्शा बंद होने से उन्हें मरम्मत और अनलॉकिंग के नाम पर भारी शुल्क चुकाना पड़ रहा है।
यात्रियों की सुरक्षा: बीच सड़क पर चलती गाड़ी का अचानक बंद हो जाना किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है, खासकर भारी ट्रैफिक वाले इलाकों में।
ईवी तकनीक पर अविश्वास: इस तरह के फ्रॉड से भविष्य की इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति और उनकी विश्वसनीयता पर भी आम जनता के बीच नकारात्मक असर पड़ रहा है।
- समाधान और सुरक्षा के उपाय
इस समस्या से निपटने के लिए अब ई-रिक्शा बनाने वाली कंपनियों और स्थानीय बैटरी डीलरों को अपनी सुरक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करना होगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि सभी ई-रिक्शा चालक तुरंत अपने BAT-BMS ऐप का डिफॉल्ट पासवर्ड बदलें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करें। पुलिस की साइबर सेल बहुत जल्द इस रैकेट में शामिल संदिग्ध आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रैक कर आरोपियों को बेनकाब करने की तैयारी में है।
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