E20 Fuel Issue: एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से खराब हो रही गाड़ियां? कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार को घेरा, तकनीकी ऑडिट की मांग

Sukhdev Bhagat on E20 Ethanol Fuel: एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब होने के दावों पर कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

Jul 3, 2026 - 16:52
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E20 Fuel Issue: एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से खराब हो रही गाड़ियां? कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार को घेरा, तकनीकी ऑडिट की मांग
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुखदेव भगत
  • Sukhdev Bhagat on Ethanol Fuel: एथेनॉल मिक्स पेट्रोल से वाहनों के इंजन में खराबी का दावा, जानिए कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने क्या कहा
  • एथेनॉल मिक्स पेट्रोल (E20) से क्या सचमुच खराब हो रही हैं गाड़ियाँ? कांग्रेस नेता सुखदेव भगत का बड़ा बयान आया सामने, उठाए गंभीर सवाल
  • Political Update: एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन डैमेज होने के मामले पर बरसे कांग्रेस नेता सुखदेव भगत

देश भर में पर्यावरण संरक्षण और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से लागू की गई एथेनॉल ब्लेंडिंग (पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण) नीति पर अब सियासी और तकनीकी विवाद गहरा गया है। झारखंड के लोहरदगा से कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता सुखदेव भगत (Sukhdev Bhagat) ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (विशेषकर E20 ईंधन) के इस्तेमाल से पुरानी गाड़ियों के इंजन और फ्यूल लाइन्स में आ रही कथित खराबी के मामलों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। 3 जुलाई 2026 को मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने आम उपभोक्ताओं और वाहन चालकों की शिकायतों का हवाला देकर सरकार से इस पूरी योजना की समीक्षा करने का आग्रह किया है। सुखदेव भगत का तर्क है कि बिना व्यापक तकनीकी तैयारी और पुराने वाहनों की अनुकूलता (Compatibility) जांचे इस नीति को जल्दबाजी में थोपने से जनता की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

  • एथेनॉल नीति पर विपक्ष का आक्रामक रुख

केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल में बीस प्रतिशत एथेनॉल मिलाने (E20 Fuel) के लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, बाजार में इस ईंधन की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से वाहन चालकों और मैकेनिकों की शिकायतें आ रही हैं कि यह मिश्रण पुराने वाहनों के इंजन, पिस्टन और कार्बोरेटर को नुकसान पहुंचा रहा है। इस संवेदनशील जनहित के मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने एक आधिकारिक प्रेस वार्ता में कहा कि हरित ऊर्जा (Green Energy) के नाम पर देश के करोड़ों मध्यमवर्गीय वाहन मालिकों की गाड़ियां दांव पर नहीं लगाई जा सकती हैं। उन्होंने इस मामले में उपभोक्ताओं को हो रहे नुकसान के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

  • तकनीकी कमियों और उपभोक्ताओं की चिंताओं का उठाया मुद्दा

कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने अपने बयान में देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर और जमीनी हकीकत का ब्योरा साझा किया। उन्होंने रेखांकित किया कि देश की सड़कों पर दौड़ने वाले पचास प्रतिशत से अधिक वाहन अभी भी पुराने बीएस-4 (BS-IV) या उससे भी पुराने मानकों के हैं। यह गाड़ियाँ तकनीकी रूप से उच्च एथेनॉल मिश्रण (जैसे बीस फीसदी या उससे अधिक) को सहन करने के लिए नहीं बनाई गई हैं।

सुखदेव भगत ने आरोप लगाया कि एथेनॉल की वजह से गाड़ियों के फ्यूल टैंक में नमी या पानी जमा होने (Phase Separation) और रबर के पार्ट्स गलने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि लोग महंगे दामों पर पेट्रोल खरीद रहे हैं और उसके बाद उन्हें गाड़ियों की मरम्मत के लिए हजारों रुपये अलग से खर्च करने पड़ रहे हैं। उन्होंने इसे सरकार की 'अपरिपक्व और जल्दबाजी में लागू की गई नीति' बताया और मांग की कि तेल कंपनियों को पेट्रोल पंपों पर सामान्य (नॉन-ब्लेंडेड) पेट्रोल का विकल्प भी अनिवार्य रूप से रखना चाहिए, ताकि पुराने वाहनों के मालिकों के पास चुनाव का अधिकार हो।

संतुलित राजनीतिक दृष्टिकोण

इस पूरे विवाद पर सत्ता पक्ष और कूटनीतिक हलकों से अलग-अलग राय सामने आ रही है:

विपक्ष (कांग्रेस नेता सुखदेव भगत) का रुख: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम पर्यावरण अनुकूल ईंधन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार को बिना किसी पूर्व तैयारी के इसे आम जनता पर नहीं थोपना चाहिए। जब तक देश में सभी गाड़ियां एथेनॉल कंप्लायंट (E20 Compatible) नहीं हो जातीं, तब तक पुराने वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का काम है। इस मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच होनी चाहिए।"

सरकार और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का पक्ष: दूसरी तरफ, पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का हमेशा से यह तर्क रहा है कि एथेनॉल मिश्रण से देश के विदेशी मुद्रा भंडार की बचत हो रही है और किसानों को गन्ने व अनाज की फसलों का बेहतर दाम मिल रहा है। तेल कंपनियों का दावा है कि तय मानकों के तहत किया जा रहा मिश्रण सुरक्षित है और आधुनिक गाड़ियाँ इसके लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं।

  • ऑटोमोबाइल बाजार और उपभोक्ताओं पर असर

इस राजनीतिक और तकनीकी बहस का व्यापक प्रभाव देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर और आम उपभोक्ताओं पर देखने को मिल रहा है।

आर्थिक मार: मध्यमवर्ग के लोग जो पुरानी बाइकों या कारों का उपयोग करते हैं, वे वाहनों के बार-बार बंद होने और इंजन डैमेज होने की समस्या से डरे हुए हैं।

बाजार में असमंजस: सुखदेव भगत द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के बाद अब पुरानी गाड़ियों के रीसेल मार्केट (Used Car Market) पर भी असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि लोग पुराने वाहनों को खरीदने में संकोच कर रहे हैं।

जागरूकता की कमी: फ्यूल स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती कि वे जो पेट्रोल डलवा रहे हैं, उसमें एथेनॉल की मात्रा कितनी है, जिससे विवाद और बढ़ रहा है।

सुखदेव भगत ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस तकनीकी समस्या का जल्द समाधान नहीं निकाला और पुराने वाहनों के लिए वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की, तो इस मुद्दे को संसद के आगामी सत्र में भी पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि ऑटोमोबाइल कंपनियों, आईआईटी (IIT) के विशेषज्ञों और पेट्रोलियम विनियामक बोर्ड को मिलाकर एक संयुक्त तकनीकी ऑडिट कमेटी बनाई जाए, जो एथेनॉल मिश्रित ईंधन का गाड़ियों के इंजन पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों की निष्पक्ष जांच करे।

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