डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर हुआ सहमत, अमेरिका ने घोषित की तीन सप्ताह के संघर्ष में जीत।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से चर्चा के दौरान एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वैश्विक भू-राजनीति
- ओवल ऑफिस से ट्रंप का ऐलान: ईरान के साथ युद्ध समाप्त, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल-गैस का 'बड़ा तोहफा' मिलने का किया जिक्र
- ईरान में व्यापक सत्ता परिवर्तन का संकेत: जेडी वैंस और मार्को रुबियो के नेतृत्व में नई कूटनीतिक जीत की ओर बढ़ता अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से चर्चा के दौरान एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वैश्विक भू-राजनीति को प्रभावित करने वाला दावा किया है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने के मुद्दे पर पूरी तरह से सहमत हो गया है, जो कि पिछले कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। ट्रंप ने विश्वास के साथ कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा संघर्ष अब अमेरिका की जीत के साथ समाप्त हो गया है। राष्ट्रपति के अनुसार, पिछले तीन सप्ताह से चल रहा तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां तेहरान ने न केवल परमाणु महत्वाकांक्षाओं को त्यागने का वादा किया है, बल्कि अमेरिका के साथ नए सिरे से आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा भी जताई है। यह घोषणा मध्य पूर्व में चल रहे अस्थिरता के दौर में एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में विशेष रूप से 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) का उल्लेख किया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग माना जाता है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने इस क्षेत्र से जुड़े तेल और गैस संबंधी व्यापार में अमेरिका को एक बहुत बड़ा और सकारात्मक 'तोहफा' भेजा है। हालांकि ट्रंप ने इस 'तोहफे' के तकनीकी विवरण साझा नहीं किए, लेकिन उनके शब्दों से स्पष्ट था कि यह ऊर्जा क्षेत्र में कोई बड़ा समझौता या आपूर्ति की गारंटी हो सकती है जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजार के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। ट्रंप ने इस सफलता को अपनी विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि जिस युद्ध की आशंका पूरी दुनिया जता रही थी, उसे कूटनीतिक दबाव और प्रभावी संवाद के जरिए जीत लिया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि अब फारस की खाड़ी में अमेरिकी हितों को पहले से कहीं अधिक सुरक्षा प्राप्त होगी।
इस कूटनीतिक सफलता के पीछे ट्रंप ने अपनी एक उच्च-स्तरीय टीम की भूमिका को विशेष रूप से सराहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी वार्ता प्रक्रिया का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, मध्य पूर्व के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर कर रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान अब अमेरिका के साथ एक व्यापक समझौता करने के लिए बेहद उत्सुक दिखाई दे रहा है। इस टीम का गठन विशेष रूप से मध्य पूर्व की जटिलताओं को सुलझाने के लिए किया गया था, और मार्को रुबियो की सख्त छवि व जेरेड कुशनर के पुराने अनुभवों ने ईरान को वार्ता की मेज पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यह टीम आने वाले दिनों में ईरान के साथ एक ऐसे समझौते को अंतिम रूप देगी जो न केवल अमेरिका बल्कि पूरे क्षेत्र के सहयोगियों के लिए हितकारी होगा। ट्रंप प्रशासन की इस नई पहल को 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) की रणनीति के दूसरे चरण के रूप में देखा जा रहा है। 2026 में ईरान की आर्थिक स्थिति और आंतरिक दबावों ने संभवतः तेहरान को अपनी कट्टरपंथी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा 'तोहफा' अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में ढील पाने के बदले ईरान द्वारा दी गई एक बड़ी व्यापारिक रियायत हो सकती है।
ईरान के भीतर हो रहे आंतरिक बदलावों पर टिप्पणी करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने एक और बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान ईरानी नेतृत्व में पहले ही महत्वपूर्ण और बुनियादी बदलाव आ चुके हैं। ट्रंप के शब्दों में, यह वास्तव में एक 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) जैसी स्थिति है, क्योंकि वर्तमान में जो लोग निर्णय ले रहे हैं, वे उन पुराने नेताओं से बिल्कुल अलग हैं जिन्होंने शुरुआत में अमेरिका और दुनिया के लिए समस्याएं पैदा की थीं। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान का नया नेतृत्व अधिक व्यावहारिक है और वह संघर्ष के बजाय विकास और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि सत्ता में यह बदलाव हिंसक क्रांति के बजाय नीतियों और नेतृत्व के दृष्टिकोण में आए बदलाव के रूप में देखा जाना चाहिए, जिससे अमेरिका के लिए बातचीत करना अब आसान हो गया है।
तीन सप्ताह तक चले इस तीव्र संघर्ष के बाद जीत की घोषणा करते हुए ट्रंप ने अपनी सैन्य और आर्थिक शक्ति के सामंजस्य को आधार बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यह साबित कर दिया है कि वह बिना किसी बड़े युद्ध में उलझे भी अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है। राष्ट्रपति का यह बयान उन आलोचकों के लिए एक जवाब के रूप में देखा जा रहा है जो ईरान के साथ सैन्य टकराव को अनिवार्य मान रहे थे। ट्रंप ने बार-बार इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि ईरान के साथ अब शत्रुता का दौर समाप्त हो रहा है और एक नए आर्थिक युग की शुरुआत हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अब यह समझ चुका है कि परमाणु हथियारों की दौड़ उनके देश के भविष्य के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है, इसलिए उन्होंने पूर्ण सहयोग का रास्ता चुना है।
ओवल ऑफिस की इस प्रेस वार्ता के दौरान ट्रंप का लहजा काफी आश्वस्त नजर आया। उन्होंने मध्य पूर्व में शांति के लिए जेरेड कुशनर के पिछले 'अब्राहम समझौते' (Abraham Accords) के अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान के साथ यह नई संधि शांति की दिशा में एक और बड़ा कदम होगी। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अब ईरान पर लगाए गए कठोर प्रतिबंधों की समीक्षा कर सकता है, बशर्ते तेहरान अपनी प्रतिबद्धताओं पर पूरी तरह खरा उतरे। इस संभावित समझौते से न केवल तेल की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है, बल्कि यह इजरायल और अन्य खाड़ी देशों के साथ ईरान के तनावपूर्ण संबंधों को भी संतुलित करने में मदद करेगा। अमेरिकी प्रशासन अब इस समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए तेहरान के साथ तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू करने की तैयारी में है।
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