इमली के बीज को 'चमत्कारी रत्न' बताकर लाखों की ठगी, स्वयंभू बाबा अशोक खरात के काले साम्राज्य का अंत
छापेमारी के दौरान खरात के आश्रम से कई ऐसी चीजें मिली हैं जो उसके पाखंड को प्रमाणित करती हैं। पुलिस को वहां से भारी मात्रा में नकद, सोने के आभूषण, खोपड़ियां, जानवरों के अंग और तंत्र-मंत्र के काम आने वाले अन्य उपकरण मिले हैं। इसके अलावा, जांच दल को कुछ गुप्त त
- कैंसर और असाध्य रोगों के इलाज का दावा कर लूटता था मासूमों को, पुलिस छापेमारी में मिलीं आपत्तिजनक वस्तुएं
- भक्ति की आड़ में करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करने वाला पाखंडी गिरफ्तार, अंधविश्वास विरोधी कानून के तहत बड़ी कार्रवाई
स्वयंभू बाबा अशोक खरात ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को एक दैवीय शक्ति के रूप में स्थापित कर लिया था। उसने अपनी पैठ ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में इस तरह बनाई थी कि लोग उसे भगवान का अवतार मानने लगे थे। खरात का जाल बिछाने का तरीका बहुत ही व्यवस्थित था; वह पहले लोगों की समस्याओं को सुनता और फिर उन्हें यह विश्वास दिलाता कि उनकी सभी परेशानियों की जड़ 'बुरी शक्तियां' या 'पितृ दोष' हैं। इसके बाद वह अपनी कथित शक्तियों का प्रदर्शन करने के लिए हाथ की सफाई और कुछ रासायनिक प्रयोगों का सहारा लेता था, जिसे देखकर अनपढ़ और परेशान लोग आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे। इस तरह उसने हजारों समर्थकों की एक फौज खड़ी कर ली थी जो उसके एक इशारे पर कुछ भी करने को तैयार रहते थे।
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि अशोक खरात साधारण इमली के बीजों को 'सिद्ध रत्न' या 'ब्रह्मांडीय ऊर्जा का केंद्र' बताकर लोगों को बेचता था। वह दावा करता था कि ये बीज विशेष अनुष्ठानों द्वारा सिद्ध किए गए हैं और इन्हें घर में रखने या धारण करने से गरीबी दूर हो जाएगी और बड़ी से बड़ी बीमारियां ठीक हो जाएंगी। हैरानी की बात यह है कि एक इमली के बीज की कीमत वह 50,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक वसूलता था। लोग अपनी जमा-पूंजी और जेवर तक बेचकर इन बीजों को खरीदते थे। पुलिस ने आरोपी के पास से भारी मात्रा में ऐसे बीज और उन पर की जाने वाली पॉलिश का सामान बरामद किया है, जिससे वह उन्हें कीमती पत्थरों जैसा लुक देता था।
खरात के दरबार में केवल आर्थिक तंगी से परेशान लोग ही नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज भी पहुंचते थे। वह कैंसर, किडनी फेलियर और निसंतानता जैसी समस्याओं के लिए झाड़-फूंक और भस्म का सहारा लेता था। वह मरीजों को आधुनिक चिकित्सा छोड़ने और केवल उसके द्वारा दी गई 'दवाओं' पर निर्भर रहने के लिए मजबूर करता था। जांच में पाया गया है कि उसके द्वारा दी जाने वाली भस्म में कुछ ऐसी नशीली चीजें और भारी धातुएं मिली होती थीं, जिनसे मरीज को अस्थायी रूप से दर्द से राहत महसूस होती थी, लेकिन लंबे समय में यह उनके स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो रही थी। कई ऐसे मामले भी प्रकाश में आए हैं जहाँ इलाज के अभाव में मरीजों की स्थिति और बिगड़ गई। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, अशोक खरात के पास से करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। उसके बैंक खातों में पिछले दो वर्षों में संदिग्ध तरीके से बड़े लेनदेन हुए हैं। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या इस ठगी के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था या वह अकेले ही इस साम्राज्य को चला रहा था। उसके पास से कई लक्जरी गाड़ियां और आलीशान बंगलों के कागजात भी जब्त किए गए हैं।
छापेमारी के दौरान खरात के आश्रम से कई ऐसी चीजें मिली हैं जो उसके पाखंड को प्रमाणित करती हैं। पुलिस को वहां से भारी मात्रा में नकद, सोने के आभूषण, खोपड़ियां, जानवरों के अंग और तंत्र-मंत्र के काम आने वाले अन्य उपकरण मिले हैं। इसके अलावा, जांच दल को कुछ गुप्त तहखाने भी मिले हैं जहाँ वह विशेष 'सिद्धियां' प्राप्त करने का नाटक करता था। वहां मौजूद लोगों से पूछताछ में पता चला कि वह अक्सर रात के अंधेरे में डरावने अनुष्ठान आयोजित करता था ताकि अनुयायियों के मन में डर पैदा किया जा सके। डराने और धमकाने की इस तकनीक का इस्तेमाल वह उन लोगों के खिलाफ करता था जो उसकी फीस देने में आनाकानी करते थे या उस पर संदेह करने लगते थे।
अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद धीरे-धीरे पीड़ित लोग सामने आने लगे हैं। जांच में यह भी पता चला है कि उसने सोशल मीडिया का भी भरपूर इस्तेमाल किया। उसके नाम से बने कई पेज और वीडियो थे जहाँ नकली गवाहों के माध्यम से उसके चमत्कारों का प्रचार किया जाता था। ये वीडियो पेशेवर तरीके से बनाए गए थे ताकि वे सच्चे लगें। वह अक्सर अपनी सभाओं में यह दावा करता था कि उसे किसी बड़े राजनेता या दैवीय सत्ता का संरक्षण प्राप्त है, जिससे लोग डरे रहते थे और पुलिस में शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। वर्तमान में पुलिस उन सभी लोगों के बयान दर्ज कर रही है जिन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अशोक खरात पर महाराष्ट्र मानवनिर्मित अंधविश्वास विरोधी कानून के साथ-साथ धोखाधड़ी और जान जोखिम में डालने की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने उसके उन सहयोगियों को भी रडार पर लिया है जो उसे शिकार ढूंढने में मदद करते थे। ये सहयोगी अक्सर अस्पतालों या अदालतों के बाहर खड़े रहते थे और परेशान लोगों को बातों में फंसाकर खरात के पास ले जाते थे। प्रशासन ने अपील की है कि अगर किसी और व्यक्ति के साथ इस तरह का धोखा हुआ है, तो वह बिना डरे सामने आए। यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी है कि शिक्षा के प्रसार के बावजूद कैसे कुछ लोग धार्मिक आस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं।
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