कोलकाता में ऐतिहासिक बदलाव- 107 वर्षों बाद रेड रोड पर नहीं हुई बकरीद की नमाज, ब्रिगेड परेड ग्राउंड बने नए गवाह

नमाज के लिए निर्धारित नए स्थल यानी ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई थीं। चूंकि यह मैदान राजनीतिक रैलियों और बड़े सांस्कृतिक आयोजनों के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां भीड़ को संभालना सड़कों के मुकाबले काफी आसान और सुरक्षित माना जाता है। कोलकाता पुलिस

May 28, 2026 - 12:28
May 28, 2026 - 12:51
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कोलकाता में ऐतिहासिक बदलाव- 107 वर्षों बाद रेड रोड पर नहीं हुई बकरीद की नमाज, ब्रिगेड परेड ग्राउंड बने नए गवाह
कोलकाता में ऐतिहासिक बदलाव- 107 वर्षों बाद रेड रोड पर नहीं हुई बकरीद की नमाज, ब्रिगेड परेड ग्राउंड बने नए गवाह

  • प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था के चलते बदला गया नमाज का पारंपरिक स्थल, विशाल मैदान में उमड़ा नमाजियों का हुजूम
  • कोलकाता के इतिहास का बड़ा मोड़: यातायात प्रबंधन और नई नीतियों के तहत रेड रोड की जगह ब्रिगेड ग्राउंड में सजी ईद-उल-अजहा की सफें

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में इस साल ईद-उल-अजहा यानी बकरीद के पावन अवसर पर एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला। कोलकाता में पिछले 107 वर्षों से चली आ रही एक बेहद पुरानी और स्थापित परंपरा को बदलते हुए इस बार रेड रोड पर बकरीद की नमाज का आयोजन नहीं किया गया। इसके बजाय, शहर के विशाल और ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड को वार्षिक सामूहिक नमाज के लिए मुख्य स्थल के रूप में चुना गया। साल 1919 के बाद यह पहला ऐसा मौका है जब रेड रोड पर नमाजियों की सफें नहीं सजीं और पूरा आयोजन एक पूरी तरह से नए परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया। इस बदलाव के बावजूद त्योहार को लेकर नमाजियों के उत्साह और आस्था में कोई कमी नजर नहीं आई और सुबह से ही हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करने के लिए ब्रिगेड परेड ग्राउंड में जुटना शुरू हो गए थे।

इस बड़े और महत्वपूर्ण फैसले के पीछे मुख्य रूप से प्रशासनिक नीतियां, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी कारण शामिल रहे हैं। राज्य में हुए हालिया राजनीतिक बदलावों और नई प्रशासनिक प्राथमिकताओं के तहत यह नीति लागू की गई है कि सार्वजनिक सड़कों और मुख्य मार्गों को अवरुद्ध करके किसी भी तरह के धार्मिक या सामाजिक आयोजनों की अनुमति नहीं दी जाएगी, ताकि आम जनता के आवागमन में कोई बाधा उत्पन्न न हो। रेड रोड कोलकाता का एक बेहद व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसे नमाज के लिए बंद किए जाने से पूरे मध्य कोलकाता में यातायात व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता था। इसी समस्या के स्थाई समाधान के लिए पुलिस प्रशासन और आयोजन समिति के बीच कई दौर की उच्च स्तरीय बैठकें हुईं, जिसके बाद सर्वसम्मति से आयोजन स्थल को बदलने का निर्णय लिया गया।

रेड रोड पर नमाज के आयोजन का प्रबंधन ऐतिहासिक रूप से कलकत्ता खिलाफत कमेटी द्वारा संभाला जाता रहा है, जो देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सामाजिक-धार्मिक संगठनों में से एक है। इस समिति ने कानून-व्यवस्था और जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रशासन के इस नए प्रस्ताव को बहुत ही परिपक्वता और सकारात्मकता के साथ स्वीकार कर लिया। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, साल 1919 से पहले कोलकाता में ईद की नमाज शहीद मीनार के मैदान में आयोजित की जाती थी, लेकिन उस वर्ष वहां भारी जलजमाव होने के कारण नमाज को रेड रोड पर स्थानांतरित किया गया था। तब से लेकर आज तक, केवल वैश्विक महामारी कोविड-19 के संकटपूर्ण वर्षों को छोड़कर, हर साल नियमित रूप से रेड रोड ही इस विशाल धार्मिक सभा का केंद्र बना हुआ था, जो अब ब्रिगेड ग्राउंड में तब्दील हो चुका है। रेड रोड की पूरी भूमि और इसके आस-पास का विशाल मैदान क्षेत्र भारतीय सेना के नियंत्रण में आता है। फोर्ट विलियम के सैन्य अधिकारियों द्वारा सामरिक और आंतरिक सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए आयोजन समिति को पहले ही सूचित किया जा चुका था कि इस मुख्य मार्ग पर भविष्य में बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति देना संभव नहीं होगा। इसके बाद ही प्रशासन ने एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में ब्रिगेड परेड ग्राउंड को मंजूरी दी।

नमाज के लिए निर्धारित नए स्थल यानी ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई थीं। चूंकि यह मैदान राजनीतिक रैलियों और बड़े सांस्कृतिक आयोजनों के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां भीड़ को संभालना सड़कों के मुकाबले काफी आसान और सुरक्षित माना जाता है। कोलकाता पुलिस और नगर निगम की टीमों ने मिलकर मैदान में हजारों नमाजियों के बैठने, ध्वनि विस्तारक यंत्रों यानी लाउडस्पीकरों की सटीक दिशा तय करने और सुरक्षा घेरा बनाने का काम युद्ध स्तर पर पूरा किया था। मैदान के भीतर और चारों तरफ कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे और सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे परिसर की निगरानी की जा रही थी ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

बकरीद की सुबह जैसे ही सूरज की पहली किरणें बिखरीं, कोलकाता और उसके आस-पास के उपनगरीय इलाकों से नमाजियों का जत्था ब्रिगेड परेड ग्राउंड की तरफ बढ़ने लगा। पारंपरिक परिधानों में सजे बच्चे, युवा और बुजुर्ग पूरी अकीदत और भाईचारे की भावना के साथ मैदान में दाखिल हुए। नमाज के समय पूरा ब्रिगेड मैदान सफेद टोपियों और कुर्ता-पायजामा पहने लोगों से पटा नजर आया, जो अनुशासन और एकता का एक बेहद विहंगम दृश्य पेश कर रहा था। इमाम साहब के नेतृत्व में सभी ने एक साथ झुककर खुदा की इबादत की और देश में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए विशेष दुआएं मांगीं। नमाज संपन्न होने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की मुबारकबाद दी।

इस आयोजन के सफल समापन के बाद प्रशासन और आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है क्योंकि इस बड़े बदलाव से शहर के मुख्य मार्गों पर चलने वाले वाहनों की रफ्तार को कोई ब्रेक नहीं लगा। अस्पताल जाने वाली एम्बुलेंसों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को इस मार्ग परिवर्तन की वजह से कोई परेशानी नहीं झेलनी पड़ी। पुलिस के आला अधिकारियों ने बताया कि ब्रिगेड परेड ग्राउंड अपनी विशाल क्षमता के कारण इतने बड़े जनसमूह को संभालने के लिए हर लिहाज से एक आदर्श और व्यावहारिक विकल्प साबित हुआ है। इस मैदान का इतिहास रहा है कि इसने वाम मोर्चा और अन्य सरकारों के दौर में भी कई बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मेजबानी बिना किसी व्यवधान के बहुत ही गरिमापूर्ण तरीके से की है।

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