ट्विशा शर्मा मामले में CBI की एंट्री- अब देश की सबसे बड़ी एजेंसी करेगी इस रहस्यमयी मौत का पर्दाफाश
उत्तर प्रदेश के नोएडा की रहने वाली मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई संदिग्ध परिस्थितियों
- सर्वोच्च न्यायालय के कड़े रुख के बाद केंद्रीय एजेंसी ने संभाली कमान: भोपाल पुलिस से केस फाइल लेकर दर्ज की नई एफआईआर
- दहेज प्रताड़ना, मारपीट और रसूख के प्रभाव के गंभीर आरोपों के बीच दिल्ली एम्स की टीम ने किया दूसरा पोस्टमार्टम, सच आएगा सामने
उत्तर प्रदेश के नोएडा की रहने वाली मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला अब देश की सबसे बड़ी CBI के हाथों में चला गया है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस संवेदनशील मामले का स्वतः संज्ञान लिए जाने और कड़े निर्देश जारी किए जाने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने औपचारिक रूप से जांच की कमान संभाल ली है। एजेंसी की एक विशेष टीम भोपाल पहुंच चुकी है और उसने स्थानीय कटारा हिल्स थाने से मामले से जुड़े तमाम दस्तावेज, डायरी, साक्ष्य और फोरेंसिक सामग्री को अपने कब्जे में ले लिया है। इस मामले में मृतका के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित गंभीर धाराओं और दहेज निषेध अधिनियम के तहत मामला दोबारा दर्ज किया गया है। केंद्रीय एजेंसी के इस कदम के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि रसूख और प्रभाव के साए में उलझी इस मौत के पीछे का असली सच जल्द ही पूरी पारदर्शिता के साथ सामने आ सकेगा।
इस पूरे मामले की शुरुआत 12 मई 2026 की रात को हुई, जब भोपाल के कटारा हिल्स स्थित बाग मुगालिया एक्सटेंशन में ट्विशा शर्मा का शव उनके ससुराल में संदिग्ध हालत में फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया गया था। मिस पुणे रह चुकीं 32 वर्षीय ट्विशा शर्मा का विवाह दिसंबर 2025 में भोपाल के रहने वाले वकील समर्थ सिंह के साथ हुआ था, जो पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के पुत्र हैं। विवाह के महज पांच महीने के भीतर ही इस तरह से एक हंसती-खेलती युवती की संदिग्ध मौत ने गहरे सवाल खड़े कर दिए। घटना के तुरंत बाद मृतका के मायके पक्ष ने आरोप लगाया कि शादी के समय से ही और विशेष रूप से शादी वाले दिन भी अतिरिक्त रुपयों की मांग की गई थी, जिसके चलते ट्विशा को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। इस हाई-प्रोफाइल मामले में मृतका के पति और पूर्व न्यायाधीश सास का नाम शामिल होने के कारण शुरू से ही जांच को प्रभावित करने और रसूख का इस्तेमाल करने की आशंकाएं जताई जा रही थीं।
शुरुआती दौर में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच की दिशा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे, जिसके चलते यह मामला देश के सर्वोच्च कानूनी मंच तक पहुंच गया। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया था कि स्थानीय पुलिस ने घटना के शुरुआती घंटों में न तो अपराध स्थल को ठीक से सुरक्षित किया और न ही जरूरी साक्ष्यों को समय पर एकत्र किया। यह भी शिकायत की गई थी कि पूर्व जिला जज की बहू होने के कारण आरोपियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा था। इसी पृष्ठभूमि में सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश भी शामिल थे, ने मामले में 'संस्थागत पूर्वाग्रह और प्रक्रियात्मक विसंगतियों' का जिक्र करते हुए सख्त नाराजगी व्यक्त की। अदालत का स्पष्ट मानना था कि जब आरोपियों में से एक का संबंध न्यायपालिका से और दूसरा वकालत के पेशे से हो, तो आम जनता और पीड़ित परिवार के मन में जांच की निष्पक्षता को लेकर कोई संदेह नहीं रहना चाहिए। इसी वजह से स्वतंत्र और केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने के फैसले को तुरंत मंजूरी दी गई।
CBI द्वारा दर्ज की गई नई एफआईआर में बेहद चौंकाने वाले और गंभीर तथ्य सामने आए हैं, जो इस मामले को पूरी तरह से प्रताड़ना की ओर मोड़ते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शादी के दिन ही दो लाख रुपये के अतिरिक्त दहेज की मांग की गई थी और इसके बाद भी लगातार रुपयों और महंगी चीजों के लिए दबाव बनाया जा रहा था। मेडिकल और शुरुआती पोस्टमार्टम जांच से यह तो साफ हुआ है कि ट्विशा की मौत फांसी के कारण दम घुटने से हुई थी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसके शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चोटों के गंभीर निशान पाए गए हैं। ये निशान इस बात की प्रबल आशंका पैदा करते हैं कि मौत से ठीक पहले या उसके आसपास ट्विशा के साथ गंभीर मारपीट या धक्का-मुक्की की गई थी। इसके अतिरिक्त, स्थानीय पुलिस की एसआईटी द्वारा की गई अंतिम दौर की पूछताछ में गर्भपात और सात लाख रुपये के लेन-देन से जुड़े कुछ नए कोण भी सामने आए थे, जिनकी गहराई से पड़ताल अब केंद्रीय टीम द्वारा की जाएगी।
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मृतका के परिजनों ने स्थानीय स्तर पर हुई पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर अविश्वास जताते हुए शव का अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया था। परिजनों की लगातार मांग और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के विशेष हस्तक्षेप के बाद दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से डॉक्टरों की एक चार सदस्यीय विशेषज्ञ टीम को भोपाल बुलाया गया। इस केंद्रीय मेडिकल टीम ने करीब तीन घंटे तक मृतका के शव का दोबारा बेहद सूक्ष्मता से पोस्टमार्टम किया और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए। दिल्ली एम्स की टीम द्वारा किए गए इस दूसरे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने और जरूरी विधिक साक्ष्य एकत्र किए जाने के बाद, मौत के करीब 12 दिन बाद ट्विशा के शव को परिजनों को सौंपा जा सका, जिसके बाद नम आंखों से उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दूसरे पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट अब सीधे CBI को सौंपी जाएगी, जो इस रहस्यमयी मौत की गुत्थी को सुलझाने में सबसे अहम वैज्ञानिक सबूत साबित होगी।
न्यायालय ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मीडिया और जनता के बीच चल रहे कयासों और बहसों पर भी कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी भी पक्ष के बयानों को मीडिया में सनसनीखेज तरीके से प्रसारित न किया जाए ताकि चल रही आधिकारिक जांच प्रभावित न हो। अदालत का मानना था कि संवेदनशील गवाहों के बयानों को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाने से निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का हनन होता है। वहीं दूसरी ओर, आरोपियों की कानूनी राहत को लेकर भी कानूनी गलियारों में हलचल तेज है। पूर्व जिला जज सास को मिली अग्रिम जमानत को राज्य सरकार और मृतका के पिता दोनों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिस पर त्वरित सुनवाई की तारीख तय की गई है। आरोपी पक्ष जहां मृतका के मानसिक स्वास्थ्य और अन्य निजी आदतों का हवाला देकर खुद को बेकसूर बता रहा है, वहीं पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह रसूख के बल पर अपनी खाल बचाने का एक सुनियोजित प्रयास है।
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