बांग्लादेश में बकरीद पर कुर्बान होने जा रहा था अनोखा 'डोनल्ड ट्रंप' भैंसा, ऐन वक्त पर सरकार ने लिया हिरासत में
इस अनोखे जीव को देखने के लिए नारायणगंज के उस कृषि फार्म पर रोजाना हजारों लोगों की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। दूर-दराज के जिलों से लोग अपनी गाड़ियों और नावों का सफर तय करके सिर्फ इस भैंसे के साथ एक सेल्फी लेने और उसका वीडियो बनाने के लिए पहुंच रहे थे। इसके शांत और बे
- सुरक्षा कारणों और भारी जनभावनाओं के मद्देनजर प्रशासन ने लगाई रोक, राष्ट्रीय चिड़ियाघर बना अनोखे जीव का नया आशियाना
- सोशल मीडिया पर सनसनी बने सुनहरे बालों वाले दुर्लभ एल्बिनो भैंसे की कुर्बानी टली, मालिक को मिलेगा उचित मुआवजा
पड़ोसी देश बांग्लादेश में बकरीद के पावन त्योहार से ठीक चंद घंटे पहले एक ऐसा अनूठा वाकया सामने आया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अपनी खास शारीरिक बनावट के कारण जबरदस्त सुर्खियां बटोरने वाले एक दुर्लभ एल्बिनो भैंसे की कुर्बानी पर बांग्लादेश की सरकार ने आखिरी वक्त पर रोक लगा दी है। इस भैंसे का नाम इसके अनोखे रूप-रंग और चेहरे पर लटकते सुनहरे बालों के कारण 'डोनल्ड ट्रंप' रखा गया था। त्योहार के मौके पर धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार इसकी कुर्बानी पूरी तरह से तय हो चुकी थी और इसके खरीदार ने इसकी पूरी तैयारी भी कर ली थी। लेकिन ऐन वक्त पर देश के गृह मंत्रालय और प्रशासनिक अधिकारियों ने दखल देते हुए इस बहुचर्चित जीव की जान बचा ली और इसे अपनी सुरक्षात्मक हिरासत में ले लिया है।
यह पूरा मामला बांग्लादेश की राजधानी ढाका के नजदीकी इलाके नारायणगंज और केरानीगंज से जुड़ा हुआ है। नारायणगंज के एक कृषि फार्म में पले-बढ़े इस 4 साल के भैंसे का वजन लगभग 700 किलोग्राम है। इस भैंसे की त्वचा का रंग आम भैंसों की तरह काला न होकर हल्का मटमैला और क्रीम रंग का है, जबकि इसकी नाक पूरी तरह से गुलाबी है। सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात इसके माथे और सिर पर मौजूद सुनहरे और चमकदार बाल हैं, जो हूबहू अमेरिकी राजनेता डोनल्ड ट्रंप के सिग्नेचर हेयरस्टाइल से मेल खाते हैं। इसी अनूठी समानता के कारण फार्म के संचालकों ने मजाक में इसका नाम डोनल्ड ट्रंप रख दिया था। जैसे ही इस भैंसे की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित हुए, यह देखते ही देखते पूरे बांग्लादेश में एक बड़ी कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बन गया।
इस अनोखे जीव को देखने के लिए नारायणगंज के उस कृषि फार्म पर रोजाना हजारों लोगों की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। दूर-दराज के जिलों से लोग अपनी गाड़ियों और नावों का सफर तय करके सिर्फ इस भैंसे के साथ एक सेल्फी लेने और उसका वीडियो बनाने के लिए पहुंच रहे थे। इसके शांत और बेहद मिलनसार स्वभाव ने लोगों को और ज्यादा प्रभावित किया। भारी मांग और लोकप्रियता के बीच, इस भैंसे को केरानीगंज के एक खरीदार ने लाइव वजन के हिसाब से लगभग 550 टका प्रति किलोग्राम की दर से लाखों रुपये में खरीद लिया था। खरीदार का उद्देश्य बकरीद के दूसरे दिन अल्लाह की राह में इसकी कुर्बानी देना था, जिसके लिए वे इसे अपने घर भी ले आए थे। लेकिन जैसे-जैसे त्योहार का समय नजदीक आया, इस भैंसे को लेकर देश के भीतर सुरक्षा और कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का अंदेशा बढ़ने लगा। जीव विज्ञान के अनुसार, बांग्लादेश जैसे देशों में एल्बिनो भैंसों का पाया जाना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। शरीर में मेलेनिन नामक तत्व की भारी कमी के कारण इनका रंग सफेद या क्रीम जैसा हो जाता है। यही वजह है कि इस भैंसे को केवल एक कुर्बानी का जानवर न मानकर एक दुर्लभ प्राकृतिक धरोहर के रूप में देखा जाने लगा।
बकरीद के दिन जैसे ही इसकी कुर्बानी की खबरें आम हुईं, प्रशासन के पास सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर कई तरह की चिंताएं पहुंचने लगीं। भारी भीड़ के चलते केरानीगंज इलाके में जाम और अशांति की स्थिति पैदा होने लगी थी, जिसके बाद देश के गृह मंत्री ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। सरकार के निर्देश पर स्थानीय पुलिस और पशुपालन विभाग के अधिकारी भारी सुरक्षा बल के साथ खरीदार के घर पहुंचे। अधिकारियों ने खरीदार को समझाया कि इस जीव के प्रति जनता की भावनाएं और सुरक्षा चिंताएं बहुत गहरी जुड़ी हुई हैं। इसके बाद सरकार ने भैंसे को अपने संरक्षण में ले लिया और आधिकारिक घोषणा की कि इस अनोखे जीव को ढाका के राष्ट्रीय चिड़ियाघर में हमेशा के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, जहां इसके लिए एक अलग शेड और विशेष देखभाल करने वाले कर्मचारी की नियुक्ति भी कर दी गई है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने भैंसे के मालिक और खरीदार को पूरी तरह से आश्वस्त किया है कि इस कदम से उन्हें कोई आर्थिक नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। सरकार ने पीड़ित पक्ष को पूरा वित्तीय मुआवजा देने या इसके बदले में उसी वजन का दूसरा स्वस्थ पशु प्रदान करने का वादा किया है, जिसे पाकर खरीदार का परिवार भी पूरी तरह सहमत हो गया। पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यह एल्बिनो भैंसा अभी अपनी उम्र के लिहाज से काफी युवा है और इसे आने वाले कई सालों तक वैज्ञानिक अनुसंधान और जनप्रदर्शनी के लिए जीवित रखा जा सकता है। इस फैसले के बाद जहां एक तरफ धार्मिक परंपराओं का सम्मान बनाए रखा गया, वहीं दूसरी तरफ एक अत्यंत दुर्लभ जीव को असमय खत्म होने से भी बचा लिया गया, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
इस 'डोनल्ड ट्रंप' भैंसे की लोकप्रियता केवल बांग्लादेश की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसने खूब सुर्खियां बटोरीं। वैश्विक स्तर पर जारी राजनीतिक तनावों के बीच मध्य-पूर्व के कुछ देशों, विशेषकर ईरान के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडलों ने इस भैंसे का वीडियो साझा करते हुए अमेरिकी नेतृत्व पर तंज भी कसे थे। विदेशी मीडिया में इस तरह की चर्चाओं ने बांग्लादेश सरकार को और सतर्क कर दिया, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि एक धार्मिक त्योहार के मौके पर किसी जानवर की वजह से कोई अवांछित अंतरराष्ट्रीय या कूटनीतिक विवाद खड़ा हो। इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के इस दौर में किसी मूक पशु का इस कदर वैश्विक राजनीति और चर्चाओं का हिस्सा बन जाना अपने आप में एक बेहद अनोखी और विस्मयकारी घटना है।
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