UP News : शामली में ट्रेन पलटाने की साजिश नाकाम- दिल्ली-सहारनपुर रेल मार्ग पर 12 फीट लोहे का पाइप, पायलट की सतर्कता से टला बड़ा हादसा।
उत्तर प्रदेश के शामली जिले में दिल्ली-सहारनपुर रेल मार्ग पर शनिवार रात एक सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ, जब दिल्ली-शामली मेमू ट्रेन (64021) के ...
शामली : उत्तर प्रदेश के शामली जिले में दिल्ली-सहारनपुर रेल मार्ग पर शनिवार रात एक सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ, जब दिल्ली-शामली मेमू ट्रेन (64021) के रेलवे ट्रैक पर 12 फीट लंबा लोहे का पाइप, पत्थर और टूटी हुई कंक्रीट की ट्यूब पाए गए। इस घटना को रेलवे और पुलिस ने एक संभावित ट्रेन दुर्घटना को अंजाम देने की साजिश करार दिया है। ट्रेन के लोको पायलट की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के कारण एक बड़ा रेल हादसा टल गया, जिससे स personally सैकड़ों यात्रियों की जान बच गई। यह घटना उत्तर प्रदेश में मई 2025 में ट्रेन पलटाने की चौथी कोशिश के रूप में सामने आई है, जिसने रेलवे सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। शमली कोतवाली पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), और सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है, और अज्ञात लोगों के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 150 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
- एक सुनियोजित साजिश?
घटना शनिवार की रात करीब 10:16 बजे की है, जब दिल्ली से शामली जा रही मेमू ट्रेन (64021) शामली रेलवे स्टेशन के पास, बलवा गांव के जंगली इलाके में किलोमीटर मार्कर 85-15/16 के बीच से गुजर रही थी। ट्रेन जैसे ही इस सुनसान क्षेत्र से गुजरी, लोको पायलट की नजर रेलवे ट्रैक पर रखे 12 फीट लंबे लोहे के पाइप, कई पत्थरों और एक टूटी हुई कंक्रीट की ट्यूब पर पड़ी। पायलट ने तुरंत आपातकालीन ब्रेक लगाए, जिससे ट्रेन समय रहते रुक गई और एक संभावित दुर्घटना टल गई। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह ट्रेन उसी रात 9:10 बजे उसी मार्ग से गुजरी थी, और उस समय ट्रैक पर कोई संदिग्ध वस्तु नहीं देखी गई थी। इससे यह साफ होता है कि पाइप और अन्य वस्तुएं रात 9:10 से 10:16 बजे के बीच ट्रैक पर रखी गई थीं, जो एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है। ट्रेन को रुकने के बाद, रेलवे कर्मचारियों ने करीब 30 मिनट तक ट्रैक से बाधाओं को हटाया, जिसके बाद ट्रेन को शामली रेलवे स्टेशन की ओर रवाना किया गया। इस दौरान यात्रियों को जंगल में खड़ी ट्रेन में इंतजार करना पड़ा, जिससे उनमें डर और अशांति का माहौल रहा।
घटना की सूचना मिलते ही शमली कोतवाली पुलिस, आरपीएफ, और जीआरपी की टीमें मौके पर पहुंचीं। सरकारी रेलवे पुलिस के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) चंद्रवीर सिंह ने बताया कि लोहे का पाइप 12 फीट लंबा और 8 इंच व्यास का था, जो इतना भारी था कि ट्रेन के इंजन के साथ टकराने पर गंभीर क्षति पहुंचा सकता था। इसके अलावा, ट्रैक पर रखे गए पत्थर और कंक्रीट की ट्यूब भी रेल की पटरियों को नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त थे। शमली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रामसेवक ने घटनास्थल का दौरा किया और इसे एक सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने कहा, "कुछ अज्ञात शरारती तत्वों ने रेलवे ट्रैक पर भारी लोहे का पाइप और अन्य वस्तुएं रखी थीं। लोको पायलट की सतर्कता ने एक संभावित आपदा को रोक दिया।" पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 150 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है, जो रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या ट्रेन संचालन को बाधित करने की साजिश से संबंधित है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस साजिश के पीछे कौन लोग शामिल हैं और उनका मकसद क्या था।
- उत्तर प्रदेश में ट्रेन पलटाने की बढ़ती घटनाएं
यह घटना उत्तर प्रदेश में मई 2025 में ट्रेन पलटाने की चौथी कोशिश के रूप में सामने आई है। इससे पहले, मई में ही तीन अन्य घटनाएं दर्ज की गई थीं:
नई दिल्ली-भुवनेश्वर तेजस राजधानी एक्सप्रेस: मई 2025 में भैरपुर और मेजा रोड रेलवे स्टेशनों के बीच ट्रैक पर पत्थर रखे गए थे, जिसे लोको पायलट ने समय रहते देख लिया और हादसा टल गया।
दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस (20504): 19 मई को डलेलनगर स्टेशन के पास ट्रैक पर लकड़ी का लट्ठा रखा गया था, जिसे लोको पायलट ने देखकर ट्रेन रोक दी।
काठगोदाम एक्सप्रेस (15044): उसी दिन उमर ताली स्टेशन के पास भी लकड़ी का लट्ठा ट्रैक पर पाया गया, जिसे हटाकर हादसा रोका गया।
इनके अलावा, हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश में कई अन्य घटनाएं सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, अप्रैल 2025 में लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में दिल्ली-बाउंड गरीब रथ एक्सप्रेस के ट्रैक पर एक आम के पेड़ की शाखा रखी गई थी, और उसी महीने उतरैटिया जंक्शन और बक्कास स्टेशनों के बीच एक 6 फीट लंबा और 3 फीट चौड़ा धातु का दरवाजा पाया गया था, जिसने एक मालगाड़ी को नुकसान पहुंचाया।
इन घटनाओं ने रेलवे सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भारतीय रेलवे के अनुसार, जून 2023 से अब तक देशभर में 24 ऐसी घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें गैस सिलेंडर, साइकिल, लोहे की छड़ें, और सीमेंट ब्लॉक जैसी वस्तुएं ट्रैक पर रखी गई थीं। उत्तर प्रदेश में ही अगस्त 2024 से अब तक 18 ऐसी कोशिशें दर्ज की गई हैं, जिनमें से अधिकांश की जांच चल रही है।
यह घटना भारतीय रेलवे के सामने सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करती है। रेलवे ट्रैक, जो देश की जीवनरेखा माने जाते हैं, बार-बार शरारती तत्वों के निशाने पर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन साजिशों के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें स्थानीय असंतोष, आपराधिक गतिविधियां, या संगठित आतंकवादी मंसूबे शामिल हो सकते हैं। रेलवे ने हाल के वर्षों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे कि ट्रैक पर निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी का उपयोग, लेकिन विशाल रेल नेटवर्क को पूरी तरह सुरक्षित करना एक जटिल चुनौती है। रेलवे मंत्रालय ने हाल ही में 'कवच' प्रणाली को लागू करने की दिशा में काम शुरू किया है, जो एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। यह प्रणाली ट्रेनों को टक्कर से बचाने और संदिग्ध बाधाओं को समय रहते पहचानने में सक्षम है। हालांकि, इसे दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा मार्गों पर पूरी तरह लागू करने में अभी समय लगेगा।
घटना के बाद सोशल मीडिया, खासकर एक्स पर, लोगों ने इस साजिश को लेकर गहरी चिंता जताई। एक यूजर ने लिखा, "पायलट की सतर्कता ने सैकड़ों जिंदगियां बचाईं, लेकिन बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं? रेलवे और पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।" कुछ यूजर्स ने इसे आतंकवादी साजिश का हिस्सा बताया और केंद्र व राज्य सरकारों से रेलवे सुरक्षा बढ़ाने की मांग की। वहीं, कुछ लोगों ने लोको पायलट की तारीफ करते हुए उन्हें "असली नायक" करार दिया। शामली में दिल्ली-सहारनपुर रेल मार्ग पर ट्रेन पलटाने की यह साजिश न केवल रेलवे सुरक्षा के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि लोको पायलट की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। उत्तरी रेलवे के दिल्ली डिवीजन के एक अधिकारी ने कहा, "लोको पायलट की सतर्कता के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। हम इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं, और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।" शमली कोतवाली पुलिस ने भी आश्वासन दिया कि जल्द ही इस साजिश के पीछे के लोगों को पकड़ा जाएगा।
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