चंडीगढ़ के रिहायशी इलाके में 3 गैस सिलेंडर फटने से मचा भीषण हाहाकार: मलबे में तब्दील हुए आशियाने, चारों तरफ पसरा मातम
केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के एक घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में एलपीजी गैस सिलेंडरों के फटने से एक बेहद खौफनाक और विनाशकारी
- एक के बाद एक तीन सिलेंडरों के जोरदार धमाकों से दहल उठा पूरा क्षेत्र: आसमान में उठा धुएं का गुबार, कई लोग गंभीर रूप से झुलसे
- दमकल विभाग और राहत बचाव दल ने संभाली कमान: युद्ध स्तर पर चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन, घायलों को पीजीआई में कराया गया भर्ती
केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के एक घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में एलपीजी गैस सिलेंडरों के फटने से एक बेहद खौफनाक और विनाशकारी हादसा सामने आया है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। एक के बाद एक लगातार तीन घरेलू सिलेंडरों में हुए सिलसिलेवार भीषण धमाकों के कारण समूचे क्षेत्र में हाहाकार मच गया और देखते ही देखते कई मकान मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। धमाके इतने जोरदार और शक्तिशाली थे कि उनकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई, जिससे आसपास की सोसायटियों और घरों में रहने वाले लोग गहरे खौफ में आ गए। हादसे के तुरंत बाद घरों में भीषण आग लग गई, जिसने पल भर में विकराल रूप धारण कर लिया। इस भयावह आपदा के कारण आसमान में काले धुएं का एक बहुत बड़ा गुबार छा गया और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई।
यह दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली दुर्घटना चंडीगढ़ के एक घनी आबादी वाले स्लम और रिहायशी पॉकेट के पास घटित हुई, जहां सुबह के समय लोग अपने दैनिक कार्यों और रसोई में व्यस्त थे। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सबसे पहले एक घर की रसोई में गैस रिसाव के कारण अचानक आग भड़क उठी, जिसने वहां रखे मुख्य गैस सिलेंडर को अपनी चपेट में ले लिया। इससे पहले कि घर में मौजूद लोग कुछ समझ पाते या बाहर भाग पाते, वह पहला सिलेंडर एक बहुत बड़े धमाके के साथ फट गया। इस पहले विस्फोट की तीव्रता इतनी भयानक थी कि आग ने तुरंत पड़ोस के दो अन्य सटे हुए मकानों को भी अपनी जद में ले लिया, जिसके कारण उन घरों में रखे दो और सिलेंडर भी एक-एक करके जोरदार आवाज के साथ फट गए और तबाही का मंजर पैदा हो गया।
सिलेंडरों के इस सिलसिलेवार विस्फोट के कारण प्रभावित मकानों की छतें और दीवारें पूरी तरह से ढह गईं और वहां कंक्रीट का भारी मलबा जमा हो गया। धमाकों की चपेट में आने से कई स्थानीय निवासी, महिलाएं और मासूम बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए, वहीं कुछ लोग ढही हुई दीवारों के मलबे के नीचे दब गए। इस विनाशकारी मंजर को देखकर आसपास के पड़ोसी अपनी जान बचाकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे, जिससे पूरी सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय युवाओं ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए तुरंत अपने स्तर पर आग बुझाने और मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया और साथ ही पुलिस नियंत्रण कक्ष और अग्निशमन विभाग को इस आपातकालीन स्थिति की सूचना दी।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए चंडीगढ़ दमकल विभाग की आधा दर्जन से अधिक गाड़ियां, आपदा प्रबंधन की टीमें, एम्बुलेंस और स्थानीय पुलिस बल भारी संख्या में तुरंत मौके पर पहुंच गए। दमकलकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर चारों तरफ से जल रही भीषण आग पर पानी और विशेष केमिकल की बौछारें करना शुरू किया ताकि आग को अन्य रिहायशी ब्लॉक में फैलने से रोका जा सके। आपदा प्रबंधन और पुलिस के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए गैस कटर और आधुनिक उपकरणों की मदद से कंक्रीट के भारी मलबे को हटाना शुरू किया, जिसके नीचे कई लोग दबे हुए थे। दमकलकर्मियों की कड़ी मशक्कत और घंटों की भारी जद्दोजहद के बाद आखिरकार आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका और मलबे से घायलों को सुरक्षित निकाला गया।
राहत कर्मियों द्वारा मलबे और आग के बीच से निकाले गए सभी घायलों को तुरंत ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एम्बुलेंस के जरिए चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच-32) के बर्न वार्ड में स्थानांतरित किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, घायलों में से कुछ लोगों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि वे सत्तर प्रतिशत से अधिक झुलस चुके हैं और धुएं के कारण उनके श्वसन तंत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों की एक विशेष टीम को घायलों की चौबीस घंटे निगरानी और आपातकालीन उपचार के लिए तैनात कर दिया है ताकि किसी भी मरीज की स्थिति को बिगड़ने से बचाया जा सके।
इस भीषण हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और नागरिक उड्डयन व सुरक्षा टीमों ने भी घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि घनी आबादी वाले इन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध रूप से सिलेंडरों के भंडारण या दोषपूर्ण गैस पाइपों का उपयोग इस तरह की घटनाओं को आमंत्रण देता है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के रहने और खाने-पीने के लिए अस्थाई आश्रय स्थलों की व्यवस्था की है क्योंकि उनके आशियाने इस धमाके में पूरी तरह से जमींदोज हो चुके हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा आर्थिक सहायता और नुकसान के आकलन के लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया गया है जो अपनी रिपोर्ट जल्द सौंपेगी।
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