अहमदाबाद में RBI करेंसी चेस्ट से 8 करोड़ 70 लाख की चोरी, 4 महीने बाद हुआ सनसनीखेज खुलासा।
गुजरात के अहमदाबाद से बैंकिंग इतिहास की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली वित्तीय सुरक्षा चूक का सनसनीखेज मामला सामने आया
गुजरात के अहमदाबाद से बैंकिंग इतिहास की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली वित्तीय सुरक्षा चूक का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मुख्य करेंसी चेस्ट से आठ करोड़ सत्तर लाख रुपये की भारी-भरकम राशि गायब होने की पुष्टि हुई है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी नकदी की यह ऐतिहासिक चोरी एक या दो दिन में नहीं, बल्कि पिछले कई महीनों के दौरान बेहद शातिर ढंग से अंजाम दी गई थी, जिसका आधिकारिक खुलासा घटना के करीब चार महीने बाद हुआ है। वित्तीय जगत के इस सबसे सुरक्षित माने जाने वाले केंद्र में हुई इस अभूतपूर्व सेंधमारी ने बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक ऑडिट प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इस महाघोटाले और चोरी की भनक लगते ही रिजर्व बैंक के शीर्ष प्रबंधन और स्थानीय पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है, जिसके बाद तत्काल प्रभाव से मामले की उच्च स्तरीय आपराधिक जांच शुरू कर दी गई है।
यह पूरा घटनाक्रम अहमदाबाद के नवरंगपुरा क्षेत्र में स्थित भारतीय रिजर्व बैंक की मुख्य शाखा और उससे जुड़े अत्यधिक सुरक्षित करेंसी चेस्ट परिसर का है, जहां राज्य भर के बैंकों के लिए नकदी का प्रबंधन और भंडारण किया जाता है। प्राथमिक विधिक जांच के अनुसार, इस विशाल वित्तीय हेराफेरी की शुरुआत लगभग चार महीने पहले हुई थी, जब चेस्ट के भीतर नोटों की गिनती और बंडलों के रखरखाव की विधिक जिम्मेदारी संभालने वाले कुछ अंदरूनी कर्मचारियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत नकदी को धीरे-धीरे गायब करना शुरू किया। चूंकि करेंसी चेस्ट के भीतर दैनिक आधार पर अरबों रुपये का लेन-देन होता है, इसलिए आरोपियों ने एक साथ बड़ी रकम निकालने के बजाय हर दिन छोटे-छोटे बंडलों से नोट गायब किए, ताकि किसी भी दैनिक मिलान या नियमित जांच में यह विसंगति तुरंत पकड़ में न आ सके।
इस सुनियोजित और शातिर चोरी का आधिकारिक खुलासा तब हुआ जब रिजर्व बैंक के केंद्रीय मुख्यालय के निर्देश पर एक विशेष और व्यापक त्रैमासिक वित्तीय ऑडिट टीम ने अहमदाबाद चेस्ट की तिजोरियों में मौजूद भौतिक नकदी का मिलान डिजिटल बहीखातों से करना शुरू किया। जब ऑडिट अधिकारियों ने पांच सौ और दो सौ रुपये के नोटों के भारी बंडलों को अत्याधुनिक मशीनों के जरिए दोबारा गिना और तिजोरी के लॉकरों की गहन संवीक्षा की, तो उनके होश उड़ गए। बहीखातों में दर्ज आंकड़ों और तिजोरी में मौजूद वास्तविक नोटों के बीच पूरे आठ करोड़ सत्तर लाख रुपये का एक बहुत बड़ा अंतर पाया गया। इतनी बड़ी वित्तीय विसंगति की पुष्टि होते ही ऑडिट टीम ने तुरंत अपनी विस्तृत गोपनीय रिपोर्ट अहमदाबाद के मुख्य प्रबंधक और केंद्रीय सतर्कता विंग को सौंपी, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ।
रिज़र्व बैंक के स्थानीय प्रबंधन की लिखित शिकायत और आधिकारिक तहरीर के आधार पर अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा और नवरंगपुरा थाने ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न संगीन धाराओं, जिसमें लोक सेवक द्वारा विश्वासघात, आपराधिक साजिश और चोरी शामिल हैं, के तहत एक व्यापक मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। पुलिस के आला अधिकारियों ने मामले की असाधारण संवेदनशीलता और राष्ट्रीय वित्तीय सुरक्षा से जुड़े होने के कारण तुरंत एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। पुलिस की इस विशेष टीम ने सबसे पहले करेंसी चेस्ट के भीतर पिछले छह महीनों के दौरान तैनात रहे सभी अधिकारियों, खजांची (कैशियर), सुरक्षा गार्डों और संविदा पर काम करने वाले सफाईकर्मियों की सूची तैयार की है। इन सभी संदिग्धों के बैंक खातों के हालिया लेन-देन और उनकी संपत्ति के विवरण को खंगाला जा रहा है ताकि अचानक आए किसी बड़े वित्तीय बदलाव का पता लगाया जा सके।
जांच दल के लिए सबसे बड़ी चुनौती और हैरानी का विषय यह है कि रिजर्व बैंक का यह करेंसी चेस्ट पूरी तरह से थ्री-लेयर (त्रिकोणीय) सुरक्षा घेरे, बायोमेट्रिक लॉक्स, मोशन सेंसर्स और चौबीस घंटे काम करने वाले अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों से लैस रहता है, जहां बिना विशेष अनुमति और दोहरे विधिक कोड के कोई भी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। ऐसे अभेद्य दुर्ग में बिना किसी ताले को तोड़े या बिना किसी बाहरी तोड़फोड़ के इतनी बड़ी रकम का गायब होना यह पूरी तरह साबित करता है कि इस वारदात के पीछे किसी बाहरी गिरोह का हाथ नहीं, बल्कि तिजोरी की चाबी और कोड तक सीधी पहुंच रखने वाले बेहद उच्च पदस्थ अंदरूनी अधिकारियों की संलिप्तता है। पुलिस अब पिछले चार महीनों के हजारों घंटों के सीसीटीवी फुटेज के बैकअप को रिकवर करके डिजिटल फॉरेंसिक लैब की मदद से उसकी फ्रेम-बाय-फ्रेम जांच कर रही है ताकि नोटों को बाहर ले जाने के विजुअल साक्ष्य मिल सकें।
इस ऐतिहासिक चोरी की घटना के सामने आने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड ने भी पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बना ली है और अहमदाबाद शाखा से हर दिन की प्रगति रिपोर्ट मांगी जा रही है। इस घटना के बाद देश भर के अन्य सभी प्रमुख शहरों में स्थित रिजर्व बैंक के करेंसी चेस्टों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने तथा वहां मौजूद नकदी का तत्काल भौतिक सत्यापन करने के आपातकालीन निर्देश जारी कर दिए गए हैं। पुलिस को संदेह है कि चोरी की गई इस भारी-भरकम राशि को हवाला नेटवर्क के जरिए बाजार में खपाया गया है या फिर रियल एस्टेट और बेनामी संपत्तियों में निवेश कर दिया गया है, जिसके लिए आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय एजेंसियों की भी मदद ली जा सकती है।
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