ओडिशा सरकार का बड़ा फैसला- पीएम आवास योजना शहरी के तहत नया आशियाना खरीदना हुआ बेहद किफायती, पंजीकरण शुल्क में भारी कटौती की तैयारी

इस कल्याणकारी कदम के पीछे एक और महत्वपूर्ण कूटनीतिक उद्देश्य महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण करना भी है। योजना के नियमों के अनुसार, इन आवासों का आवंटन मुख्य रूप से परिवार की महिला मुखिया के नाम पर या संयुक्त रूप से किया जाता है। ऐसे में पंजीकरण शुल्क को न्यूनतम स्तर पर लाने से श

Jun 20, 2026 - 12:50
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ओडिशा सरकार का बड़ा फैसला- पीएम आवास योजना शहरी के तहत नया आशियाना खरीदना हुआ बेहद किफायती, पंजीकरण शुल्क में भारी कटौती की तैयारी
ओडिशा सरकार का बड़ा फैसला- पीएम आवास योजना शहरी के तहत नया आशियाना खरीदना हुआ बेहद किफायती, पंजीकरण शुल्क में भारी कटौती की तैयारी

  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को बड़ी कूटनीतिक राहत: एक प्रतिशत से भी कम होगा आवास रजिस्ट्री का खर्च, कैबिनेट की आगामी बैठक में प्रस्ताव को मिल सकती है मंजूरी
  • घर का सपना होगा साकार: शहरी निर्धनों के लिए ओडिशा में नया नीतिगत बदलाव, स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण लागत घटने से सीधे तौर पर लाभार्थियों को मिलेगा आर्थिक संबल

ओडिशा राज्य के शहरी क्षेत्रों में जीवन यापन करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए एक बेहद राहत भरी प्रशासनिक खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने लोक कल्याणकारी नीतियों के तहत केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के अंतर्गत आवंटित होने वाले मकानों की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अत्यधिक सुगम और सस्ता बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रशासनिक स्तर पर चल रही कूटनीतिक तैयारियों के अनुसार, अब इन आवासों के पंजीकरण के लिए लाभार्थियों को अपनी जेब बहुत अधिक ढीली नहीं करनी पड़ेगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि जमीन और मकान की खरीद के समय लगने वाले अतिरिक्त सरकारी शुल्कों के बोझ को कम करके वास्तविक हकदारों को उनके खुद के पक्के मकान की चाबी जल्द से पहले सौंपी जा सके।

इस नीतिगत बदलाव के तहत सबसे महत्वपूर्ण कदम रजिस्ट्री के समय लगने वाले स्टांप शुल्क और पंजीकरण फीस में की जाने वाली अभूतपूर्व कटौती है। वर्तमान प्रशासनिक प्रस्तावों के अनुसार, राज्य का आवास और शहरी विकास विभाग इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि कुल आवास मूल्य के एक प्रतिशत से भी कम दर पर लाभार्थियों के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कर दी जाए। पहले इस प्रक्रिया में लाभार्थियों को एक बड़ी धनराशि सरकारी खजाने में जमा करनी पड़ती थी, जिससे कई बार गरीब परिवार आवंटन के बावजूद रजिस्ट्री कराने में आर्थिक रूप से असमर्थ महसूस करते थे। इस नई व्यवस्था के लागू होने से प्रति आवास हजारों रुपयों की सीधी बचत होगी, जो इन परिवारों को अपने नए घर को बसाने और अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।

नीतिगत प्रस्ताव की मुख्य बात: इस विशेष छूट का सीधा और शत-प्रतिशत लाभ केवल उन्हीं परिवारों को हस्तांतरित किया जाएगा जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की श्रेणी के अंतर्गत पूरी तरह से सत्यापित और कूटनीतिक रूप से सूचीबद्ध हैं।

राज्य की राजधानी भुवनेश्वर सहित कटक, राउरकेला, संबलपुर और ब्रह्मपुर जैसे प्रमुख शहरी निकायों में इस योजना के तहत हजारों मकानों का निर्माण कार्य अंतिम चरणों में है या पूरा हो चुका है। सरकार को विभिन्न माध्यमों से यह कूटनीतिक फीडबैक मिल रहा था कि कई लाभार्थी मकान तैयार होने के बाद भी केवल उच्च रजिस्ट्री शुल्क के कारण मालिकाना हक पाने से कतरा रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय ने संबंधित विभागों को एक ऐसी व्यावहारिक नियमावली तैयार करने का निर्देश दिया था जो वित्तीय रूप से व्यावहारिक हो। आगामी कैबिनेट की बैठक में इस संशोधित प्रस्ताव को औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जहाँ से हरी झंडी मिलने के बाद इसे पूरे राज्य में एक साथ प्रभावी ढंग से लागू कर दिया जाएगा।

इस कल्याणकारी कदम के पीछे एक और महत्वपूर्ण कूटनीतिक उद्देश्य महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण करना भी है। योजना के नियमों के अनुसार, इन आवासों का आवंटन मुख्य रूप से परिवार की महिला मुखिया के नाम पर या संयुक्त रूप से किया जाता है। ऐसे में पंजीकरण शुल्क को न्यूनतम स्तर पर लाने से शहरी मलिन बस्तियों और किराए के मकानों में रहने वाली महिलाओं को अपने नाम पर संपत्ति रखने का गौरवपूर्ण अवसर मिलेगा। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से न केवल शहरी बुनियादी ढांचे का विकास तेज होगा, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन स्तर में भी गुणात्मक सुधार देखने को मिलेगा।

योजना के क्रियान्वयन को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाए रखने के लिए डिजिटल तकनीकों का भी व्यापक स्तर पर समावेश किया जा रहा है। कूटनीतिक रूप से यह तय किया गया है कि रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन सिंगल-विंडो सिस्टम के माध्यम से संचालित किया जाएगा ताकि लाभार्थियों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और न ही किसी बिचौलिए का सामना करना पड़े। इस डिजिटल पंजीकरण पोर्टल के माध्यम से लाभार्थी घर बैठे ही अपने दस्तावेजों का सत्यापन करा सकेंगे और न्यूनतम निर्धारित शुल्क का भुगतान सीधे बैंक खातों के जरिए कर सकेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में तेजी आएगी।

भविष्य के शहरी नियोजन के लिहाज से ओडिशा सरकार का यह निर्णय अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल बन सकता है। समाज के वंचित तबके को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ पहुँचाने वाली इस नीति से आने वाले महीनों में शहरी आवास क्षेत्र की पूरी तस्वीर बदलने की उम्मीद है। पक्के मकान की सुरक्षा और मालिकाना हक मिलने से इन परिवारों के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कूटनीतिक रूप से उठाए गए इस जनहितैषी कदम की गूंज आने वाले समय में राज्य की जमीनी राजनीति और सामाजिक ताने-बाने पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। इस वित्तीय रियायत से राज्य के खजाने पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ के संदर्भ में भी कूटनीतिक संतुलन बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यद्यपि स्टांप ड्यूटी घटने से राजस्व में आंशिक कमी दर्ज की जाएगी, लेकिन सरकार का मानना है कि इस कदम से रुकी हुई आवास परियोजनाओं में तेजी आएगी और बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में स्थानांतरित होंगे, जिससे शहरी क्षेत्रों में आंतरिक आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। निर्माण क्षेत्र में आने वाली यह कूटनीतिक तेजी अंततः राज्य की जीडीपी और स्थानीय रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

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