Trending: सात साल के एक मासूम छात्र का यौन उत्पीड़न डांस टीचर को 52 साल की सजा

तिरुवनंतपुरम की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की जज अंजू मीरा बिरला ने शनिवार, 28 जून 2025 को इस मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने सुनील कुमार को प्रोटेक्शन ऑफ...

Jun 29, 2025 - 12:57
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Trending: सात साल के एक मासूम छात्र का यौन उत्पीड़न डांस टीचर को 52 साल की सजा
Photo: Social Media

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में छह साल पुराने एक दिल दहला देने वाले यौन उत्पीड़न मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने एक डांस टीचर को सात साल के मासूम बच्चे के यौन उत्पीड़न का दोषी पाया और उसे 52 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने 3.25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। सजा की अवधि एक साथ चलेगी, जिसके कारण दोषी को वास्तव में 20 साल जेल में बिताने होंगे।

  • क्या है पूरा मामला?

यह मामला 2017 से 2019 के बीच का है, जब कोल्लम के रहने वाले 46 वर्षीय डांस टीचर सुनील कुमार ने तिरुवनंतपुरम में एक सात साल के बच्चे के साथ यौन उत्पीड़न किया। सुनील कुमार बच्चे को डांस क्लास के दौरान एक अलग कमरे में ले जाकर इस घृणित अपराध को अंजाम देता था। बच्चे ने शुरुआत में डांस क्लास में जाने से मना किया, लेकिन उसके माता-पिता ने इसे आलस समझकर नजरअंदाज कर दिया। दोषी ने बच्चे को धमकियां दीं कि वह किसी को कुछ न बताए, जिसके कारण बच्चा डर के मारे चुप रहा। मामला तब सामने आया जब बच्चे के माता-पिता ने उसके छोटे भाई को भी उसी डांस क्लास में भेजने की योजना बनाई। इस दौरान बच्चे ने हिम्मत जुटाकर अपने साथ हुई आपबीती अपने परिवार को बताई। इसके बाद परिजनों ने पंगोड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की। जांच में पंगोड पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और मामले को कोर्ट तक पहुंचाया।

  • कोर्ट का फैसला

तिरुवनंतपुरम की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की जज अंजू मीरा बिरला ने शनिवार, 28 जून 2025 को इस मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने सुनील कुमार को प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (POCSO) एक्ट के तहत दोषी करार दिया। जज ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए 52 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई और 3.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अगर दोषी जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे साढ़े तीन साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

  • दोषी ने दी थी सफाई

सुनील कुमार ने कोर्ट में अपनी बेगुनाही का दावा किया था। उसने कहा कि उसने बच्चे को केवल डांटा था क्योंकि वह एक अन्य बच्चे को छू रहा था। उसने यह भी दावा किया कि डांस क्लास के अलावा कोई दूसरा कमरा उपलब्ध नहीं था। हालांकि, कोर्ट ने इन दावों को खारिज करते हुए सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर उसे दोषी ठहराया। मामले की जांच पंगोड पुलिस स्टेशन ने की, जिसमें सबूतों को इकट्ठा करने और चार्जशीट दाखिल करने में तेजी दिखाई गई। अभियोजन पक्ष की ओर से पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने मजबूत सबूत और गवाह पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह सख्त फैसला सुनाया। इस फैसले ने समाज में बच्चों की सुरक्षा और यौन उत्पीड़न जैसे जघन्य अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत पर फिर से चर्चा छेड़ दी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही यह भी मांग की है कि बच्चों को ऐसी घटनियों से बचाने के लिए और सख्त कदम उठाए जाएं।

  • बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या करें?

जागरूकता: माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में बदलाव पर नजर रखनी चाहिए और उनसे खुलकर बात करनी चाहिए।
शिक्षा: बच्चों को 'गुड टच' और 'बैड टच' के बारे में समझाना जरूरी है ताकि वे ऐसी घटनाओं को पहचान सकें और बताने की हिम्मत जुटा सकें।
कानूनी कार्रवाई: यौन उत्पीड़न के मामलों में तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करें और बच्चों का साथ दें।
सुरक्षित माहौल: स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम और निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए।

यह फैसला न केवल एक अपराधी को सजा देता है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि बच्चों के खिलाफ अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तिरुवनंतपुरम की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस मामले में त्वरित और कड़ा फैसला सुनाकर न्याय की मिसाल कायम की है।

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