तेजस्वी यादव का जेडीयू पर तीखा प्रहार: ललन सिंह, संजय झा और विजय चौधरी चला रहे हैं पार्टी, नीतीश कुमार को नष्ट कर दिया।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियां चरम पर हैं। नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही विपक्षी दलों ने हमले तेज कर दिए हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियां चरम पर हैं। नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही विपक्षी दलों ने हमले तेज कर दिए हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने बुधवार को रघुपुर विधानसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करते हुए जनता दल यूनाइटेड पर सीधी चोट की। उन्होंने कहा कि जेडीयू अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नियंत्रण में नहीं है, बल्कि ललन सिंह, संजय झा और विजय चौधरी जैसे तीन नेताओं के हाथों में है। तेजस्वी ने इन नेताओं पर बीजेपी के इशारों पर नाचने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन्होंने नीतीश कुमार को नष्ट कर दिया है। यह बयान राजनीतिक हलकों में जोरदार बहस छेड़ रहा है, क्योंकि यह एनडीए के भीतर खींचतान को उजागर करता है।
तेजस्वी ने नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा, "अब जेडीयू नीतीश कुमार नहीं चला रहे। जेडीयू को ललन सिंह, संजय झा और विजय चौधरी चला रहे हैं। जेडीयू नीतीश कुमार के पास नहीं रहा। ये तीनों नेता बीजेपी को बेच दिए गए हैं और इन्होंने नीतीश कुमार को नष्ट कर दिया है।" यह बयान हाजीपुर के कलेक्ट्रेट में नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद दिया गया। उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती और संजय यादव जैसे परिवार के सदस्य मौजूद थे। रघुपुर सीट तेजस्वी के लिए खास है, क्योंकि यहां से उनके माता-पिता ने विधायक के रूप में चुनाव जीता था। तेजस्वी ने कहा कि वे न केवल सरकार बनाएंगे, बल्कि बिहार को समृद्ध भी करेंगे। उन्होंने दावा किया कि बिहार की जनता बदलाव चाहती है और महागठबंधन की सरकार बनेगी।
यह आरोप नया नहीं है। तेजस्वी ने पिछले कई महीनों से नीतीश कुमार की सेहत और पार्टी पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए हैं। अप्रैल 2025 में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के एक बयान पर उन्होंने कहा था कि बीजेपी नीतीश को मुख्यमंत्री बने रहने नहीं देगी। उन्होंने ललन सिंह और संजय झा पर बीजेपी के हाथों बिकने का आरोप लगाया था। दिसंबर 2024 में उन्होंने नीतीश को "अपने ही लोगों के कैद में" बताया था। जून 2025 में उन्होंने "जमाई आयोग" का जिक्र किया, जिसमें जेडीयू नेताओं के रिश्तेदारों को सरकारी पद दिए जाने का आरोप लगाया। सितंबर 2025 में उन्होंने कहा कि बिहार भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के बम पर बैठा है। ये बयान विपक्ष की रणनीति का हिस्सा लगते हैं, जो नीतीश की छवि को कमजोर करने पर केंद्रित हैं।
ललन सिंह, संजय झा और विजय चौधरी जेडीयू के प्रमुख चेहरे हैं। राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और केंद्र में केंद्रीय कृषि मंत्री। वे मुंगेर से लोकसभा सांसद हैं। ललन सिंह नीतीश के पुराने सहयोगी हैं, लेकिन विपक्ष उन्हें बीजेपी के करीब मानता है। संजय झा जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद हैं। वे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यों को संभालते हैं और बीजेपी नेताओं से मजबूत संबंध रखते हैं। विजय चौधरी बिहार सरकार में मंत्री हैं, जो ललित नगर से छह बार विधायक रह चुके हैं। वे भूमिहार-ब्राह्मण समुदाय से हैं और नीतीश के साथ 2005 से जुड़े हैं। इन तीनों को विपक्ष "भुंजा पार्टी" कहकर तंज कसता है, जो जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व नौकरशाहों का कथित समूह है। तेजस्वी और प्रशांत किशोर जैसे नेता दावा करते हैं कि यह समूह नीतीश के नाम पर राज्य चला रहा है।
बिहार की राजनीति में जेडीयू का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। नीतीश कुमार ने 1994 में समता पार्टी बनाई, जो 2003 में जनता दल यूनाइटेड बनी। पार्टी का आधार कुर्मी, कोइरी और अत्यंत पिछड़ा वर्ग है। नीतीश ने विकास और शराबबंदी जैसे मुद्दों पर जोर दिया। लेकिन 2015 और 2022 में महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के साथ आने से उनकी छवि "पलटू राम" की बन गई। 2024 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने 12 सीटें जीतीं, लेकिन विधानसभा में सत्ता बरकरार रखी। अब 2025 चुनाव में एनडीए ने सीटों का बंटवारा किया है, जिसमें जेडीयू और बीजेपी को 101-101 सीटें मिली हैं। लोक जनशक्ति पार्टी को 29 सीटें दी गईं। जेडीयू ने पहली सूची में 57 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए, जिनमें उमेश कुशवाहा (महानंद), श्रवण कुमार (नालंदा) और सुनील कुमार (भोर) शामिल हैं। यह सूची नीतीश ने मंजूर की, लेकिन विपक्ष कहता है कि फैसले इन तीनों के हाथ में हैं।
तेजस्वी का यह बयान एनडीए के लिए झटका है। बीजेपी और जेडीयू के बीच तनाव की खबरें आ रही हैं। उपेन्द्र कुशवाहा जैसे नेता असंतुष्ट हैं, जबकि जीतन राम मांझी और सम्राट चौधरी नीतीश की आलोचना कर चुके हैं। तेजस्वी ने कहा कि एनडीए अब "नैय्या डूबेगी अबकी बार" का मतलब रखता है। उन्होंने वादा किया कि उनकी सरकार रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस करेगी। रघुपुर सीट पर मुकाबला कड़ा है। जन सुराज पार्टी ने चंचल कुमार सिंह को मैदान में उतारा है, हालांकि प्रशांत किशोर ने खुद लड़ने से इंकार कर दिया। तेजस्वी ने कहा कि वे सभी 243 सीटों पर लड़ रहे हैं।
विपक्ष का यह हमला जातिगत समीकरण पर भी केंद्रित लगता है। जेडीयू को पिछड़ों का दल माना जाता था, लेकिन ललन सिंह (भूमिहार), संजय झा (ब्राह्मण) और विजय चौधरी (भूमिहार) जैसे ऊपरी जाति के नेताओं का दबदबा बढ़ने से आधार कमजोर हुआ है। तेजस्वी ने अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि नीतीश का कुर्मी आधार खिसक रहा है। आरजेडी मुस्लिम-यादव समीकरण पर निर्भर है, लेकिन तेजस्वी युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। बिहार चुनाव आयोग ने पहले चरण की वोटिंग 6 और 11 नवंबर तय की है, जबकि नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। नामांकन प्रक्रिया जारी है, जिसमें विजय सिन्हा ने लाखीसराय से पर्चा भरा।
जेडीयू ने तेजस्वी के बयान पर पलटवार किया। कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि तेजस्वी को बिहार की प्रगति समझ नहीं आ रही। उन्होंने कहा कि 2005 के बाद जेडीयू ने राज्य को बदला है। ललन सिंह ने चुप्पी साधी, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह विपक्ष का हताशा का नतीजा है। नीतीश कुमार ने नामांकन प्रक्रिया में सक्रियता दिखाई, लेकिन उनकी सेहत पर सवाल बने हुए हैं। विपक्ष दावा करता है कि वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में असहज नजर आते हैं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि यह बयान महागठबंधन को मजबूत करेगा, लेकिन एनडीए का गठबंधन टूटने की संभावना कम है।
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