मुर्शिदाबाद की जनसभा में ममता बनर्जी पर बरसे ओवैसी, भाजपा के साथ पुराने गठबंधन का याद दिलाया इतिहास

मुर्शिदाबाद की रैली में ओवैसी ने पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभिन्न सरकारी आंकड़ों और रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में मुस्लिम समुदाय की स्थिति मानव विकास सूचकांक

Apr 13, 2026 - 17:38
 0  7
मुर्शिदाबाद की जनसभा में ममता बनर्जी पर बरसे ओवैसी, भाजपा के साथ पुराने गठबंधन का याद दिलाया इतिहास
मुर्शिदाबाद की जनसभा में ममता बनर्जी पर बरसे ओवैसी, भाजपा के साथ पुराने गठबंधन का याद दिलाया इतिहास

  • अल्पसंख्यकों के हक और नेतृत्व पर ओवैसी का बड़ा प्रहार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को बताया भाजपा की 'बी टीम'
  • चुनावी सरगर्मी के बीच ओवैसी ने बंगाल की सियासत में लगाया तड़का, ममता और मोदी के रिश्तों को लेकर किए तीखे सवाल

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर जमकर निशाना साधा। मुर्शिदाबाद की धरती, जो ऐतिहासिक रूप से अल्पसंख्यक राजनीति का केंद्र रही है, वहां ओवैसी ने अपने भाषण के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि बंगाल के मुसलमानों को अब अपना स्वतंत्र नेतृत्व विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि उन्होंने समुदाय का उपयोग केवल वोट बैंक के रूप में किया है और विकास के नाम पर उन्हें हाशिए पर धकेल दिया है। ओवैसी का यह हमला तब आया है जब राज्य में विधानसभा चुनावों की आहट तेज हो गई है और राजनीतिक दल अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।

अपने संबोधन के दौरान ओवैसी ने उन ऐतिहासिक पन्नों को पलटा जब ममता बनर्जी केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा थीं। उन्होंने जनता को याद दिलाया कि एक समय था जब वर्तमान मुख्यमंत्री भाजपा के साथ गठबंधन में थीं और उन्होंने केंद्रीय कैबिनेट में मंत्री पद भी संभाला था। ओवैसी ने सवाल किया कि जो नेता आज खुद को धर्मनिरपेक्षता का सबसे बड़ा पैरोकार बताती हैं, वे उस समय कहां थीं जब वे हिंदुत्ववादी विचारधारा वाली पार्टी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सरकार चला रही थीं। उन्होंने तर्क दिया कि ममता बनर्जी का भाजपा विरोध केवल चुनावी अवसरवादिता है और उनके पुराने रिश्ते यह साबित करते हैं कि वे वक्त आने पर किसी भी तरफ झुक सकती हैं।

मुर्शिदाबाद की रैली में ओवैसी ने पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभिन्न सरकारी आंकड़ों और रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में मुस्लिम समुदाय की स्थिति मानव विकास सूचकांक के मामले में अत्यंत दयनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में अल्पसंख्यकों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में उचित भागीदारी नहीं मिली है। ओवैसी ने कहा कि जब तक समुदाय के पास अपना स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व नहीं होगा, तब तक उन्हें अन्य दलों के रहमोकरम पर रहना पड़ेगा, जो केवल चुनाव के समय उनसे मीठी बातें करते हैं और सत्ता मिलने के बाद उन्हें भूल जाते हैं।

गठबंधन की टूट और राजनीतिक अस्थिरता

बंगाल चुनाव 2026 के मद्देनजर पहले ओवैसी ने हुमायूं कबीर की 'आम जनता उन्नयन पार्टी' (एजेपी) के साथ गठबंधन किया था। हालांकि, हाल ही में एक विवादित वीडियो सामने आने के बाद एआईएमआईएम ने इस गठबंधन को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब पार्टी ने मुर्शिदाबाद, मालदा और आसनसोल जैसे अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की घोषणा की है, जिससे राज्य का चुनावी समीकरण और अधिक जटिल हो गया है।

भाषण के एक अन्य हिस्से में ओवैसी ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को 'दिखावा' करार दिया। उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच एक गुप्त समझौता है, जो पर्दे के पीछे से काम करता है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे इस 'भाई-बहन' की जोड़ी के खेल को समझें। ओवैसी ने कहा कि एक तरफ भाजपा ध्रुवीकरण की राजनीति करती है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी डर दिखाकर मुसलमानों का वोट हासिल करती हैं। इस भय की राजनीति ने समुदाय को विकास की मुख्यधारा से काट दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी के सामने सिर नहीं झुकाएगी और अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।

मुर्शिदाबाद में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए ओवैसी ने यह विश्वास जताया कि इस बार बंगाल की राजनीति में बदलाव की लहर चलेगी। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने लंबे समय तक मुसलमानों को डराया है कि यदि वे टीएमसी को वोट नहीं देंगे, तो भाजपा सत्ता में आ जाएगी। ओवैसी ने इस नैरेटिव को चुनौती देते हुए कहा कि अब लोग जाग चुके हैं और वे अपनी आवाज खुद बुलंद करना चाहते हैं। उन्होंने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे घर-घर जाकर लोगों को सरकार की विफलताओं के बारे में बताएं और उन्हें एक ऐसे विकल्प के साथ जोड़ें जो उनकी अस्मिता और अधिकारों की बात करता हो।

मुख्यमंत्री द्वारा ओवैसी को बाहरी बताने और भाजपा की मदद करने के आरोपों पर भी उन्होंने पलटवार किया। ओवैसी ने कहा कि जब वे देश के किसी भी कोने में जाते हैं, तो उन्हें 'वोट कटवा' कहा जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि वे उन लोगों के लिए लड़ रहे हैं जिन्हें मुख्यधारा की पार्टियों ने धोखा दिया है। उन्होंने सवाल किया कि यदि तृणमूल कांग्रेस ने वास्तव में काम किया होता, तो उन्हें डरने की जरूरत क्यों पड़ती। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि वे अपने रिपोर्ट कार्ड के साथ जनता के बीच आएं और बताएं कि पिछले दशकों में अल्पसंख्यकों के जीवन स्तर में कितना सुधार हुआ है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow