Kunal Ghosh Allegations: ममता बनर्जी के वफादारों को निशाना बना रही भाजपा सरकार, कुणाल घोष का गंभीर आरोप
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के वफादार विधायकों को निशाना बनाया जा रहा है।

- West Bengal Politics: 'ममता के करीबियों पर बनाया जा रहा दबाव', टीएमसी नेता कुणाल घोष के बयान से मची खलबली
- पश्चिम बंगाल में नया सियासी घमासान: कुणाल घोष का दावा- ममता बनर्जी के वफादार विधायकों को फंसा रही सरकार
- Bengal Political Row: टीएमसी नेता कुणाल घोष का बड़ा आरोप, बोले- ममता बनर्जी के करीबियों को पुराने मामलों में फंसाया जा रहा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहा शह-मात का खेल एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और तेजतर्रार प्रवक्ता कुणाल घोष ने राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए कुणाल घोष ने दावा किया कि टीएमसी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान का फायदा उठाकर राज्य सरकार पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे वफादार विधायकों और नेताओं को चुन-चुनकर निशाना बना रही है। घोष ने आरोप लगाया कि जो नेता ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं, उन्हें पुराने मुकदमों और नए मनगढ़ंत आरोपों में फंसाकर प्रशासनिक दबाव में लाया जा रहा है। इस बयान के बाद बंगाल के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है।
यह पूरा मामला तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष के उस हालिया बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। कुणाल घोष का कहना है कि राज्य की भाजपा सरकार टीएमसी के भीतर के मतभेदों का इस्तेमाल एक राजनीतिक हथियार के रूप में कर रही है। उनका आरोप है कि जो विधायक या सांगठनिक नेता पूरी तरह से ममता बनर्जी की विचारधारा और उनके बनाए मूल संगठन के प्रति समर्पित हैं, केवल उन्हीं के खिलाफ कानूनी और दंडात्मक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि पार्टी को कमजोर किया जा सके।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच की कड़वाहट कम होने का नाम नहीं ले रही है। हाल के दिनों में टीएमसी के कुछ विधायकों और नेताओं के खिलाफ पुलिस तथा जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ी है। इसी पृष्ठभूमि में कुणाल घोष ने एक प्रेस वार्ता बुलाई और सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल दागे।
कुणाल घोष ने घटनाक्रम का विश्लेषण करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक मतभेद कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन सरकार इस स्थिति का फायदा उठा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "प्रशासन का रवैया पूरी तरह से एकतरफा है। जो नेता ममता बनर्जी के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं, उन्हें परेशान करने के लिए पुराने बंद हो चुके मामलों को दोबारा खोला जा रहा है। उन पर तरह-तरह के आरोप लगाकर आत्मसमर्पण करने या पाला बदलने का दबाव बनाया जा रहा है।" घोष ने यह भी जोड़ा कि इसके विपरीत, जो नेता दूसरे खेमे की तरफ झुकाव दिखा रहे हैं या शांत हैं, उनके खिलाफ चल रही जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
कुणाल घोष के इन आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ताओं ने इन दावों को पूरी तरह आधारहीन और काल्पनिक बताते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा है। भाजपा का तर्क है कि जिन नेताओं के खिलाफ सबूत मिल रहे हैं, चाहे वे किसी भी गुट के हों, प्रशासन केवल उनके खिलाफ विधिक प्रक्रिया अपना रहा है। भाजपा नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि टीएमसी अपनी अंदरूनी कलह और गुटबाजी को छिपाने के लिए सरकार पर झूठे आरोप मढ़ रही है। दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस के ममता गुट के कई विधायकों ने कुणाल घोष के सुर में सुर मिलाते हुए कहा है कि वे किसी भी तरह के दमनकारी हथकंडे के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
कुणाल घोष के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर सांगठनिक स्तर पर अंदरूनी खींचतान अब एक नाजुक मोड़ पर है। इस बयान के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी के वफादारों को खुलकर डिफेंड करके कुणाल घोष ने पार्टी के भीतर के वफादार कैडर को एकजुट करने की कोशिश की है। वहीं, आम जनता के बीच इस बयान से यह संदेश जा रहा है कि राज्य की पुलिस और जांच एजेंसियां राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर काम कर रही हैं, जिससे प्रशासनिक साख पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस बड़े सियासी धमाके के बाद आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति और अधिक गरमाने की उम्मीद है। तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने और इसे एक बड़े राजनीतिक उत्पीड़न के रूप में पेश करने की रणनीति बना रही है। वहीं, कानूनी मोर्चे पर भी टीएमसी के विधिक सेल के नेता उन मामलों को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं जिन्हें कुणाल घोष ने 'पुराना और राजनीति से प्रेरित' बताया है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री और राज्य का गृह विभाग इन गंभीर आरोपों पर क्या कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करता है या फिर आने वाले दिनों में जांच का दायरा और अधिक आक्रामक होता है।
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