Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा, आरोपी अविनाश शुक्ला से बरामद हुई सबसे ज्यादा रकम

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपी अविनाश शुक्ला से सबसे ज्यादा नकदी बरामद हुई है। जांच में वाराणसी की सुरक्षा एजेंसी का कनेक्शन भी आया सामने।

Jul 2, 2026 - 12:45
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Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा, आरोपी अविनाश शुक्ला से बरामद हुई सबसे ज्यादा रकम
Ram Mandir Donation Theft
  • Ayodhya Ram Mandir Theft Case: वाराणसी की सुरक्षा एजेंसी ने हायर किए थे कर्मचारी, अविनाश शुक्ला के पास मिला भारी कैश
  • Ram Mandir Theft Case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में वाराणसी कनेक्शन! आरोपी अविनाश शुक्ला के पास से मिला नोटों का सबसे बड़ा ढेर
  • Ayodhya Ram Mandir Case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी का बड़ा एक्शन, मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से भारी नकदी बरामद

उत्तर प्रदेश की अयोध्या नगरी में स्थित भव्य राम मंदिर के चढ़ावे और दानपात्र में से की जा रही चोरी के सनसनीखेज मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। विशेष जांच दल (SIT) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त जांच में यह बात सामने आई है कि अब तक गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपियों में से सबसे ज्यादा नकदी आरोपी अविनाश शुक्ला के ठिकानों से बरामद की गई है। इसके साथ ही इस पूरे रैकेट का 'वाराणसी कनेक्शन' भी उजागर हुआ है, जिसके तहत पता चला है कि राम मंदिर में चढ़ावे और नकदी की गिनती के लिए तैनात किए गए अधिकांश कर्मचारी वाराणसी की एक निजी सुरक्षा एजेंसी के माध्यम से आउटसोर्स किए गए थे। इस गंभीर मामले की जांच के बाद राम मंदिर ट्रस्ट और एसबीआई के स्थानीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

घटना क्या है?

अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान की राशि में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी और चोरी का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने करीब 80 लाख रुपये के आसपास की नकदी बरामद की है, जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी अकेले अविनाश शुक्ला नाम के एक आउटसोर्स कर्मचारी की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि चढ़ावे के रूप में मिलने वाली भारी-भरकम राशि को बैंक में जमा करने से पहले ही बड़ी चालाकी से गायब कर दिया जाता था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गहराई से सबूत जुटाने में लगी है।

वाराणसी कनेक्शन

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये के गबन के आरोप लगाए गए। इसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट की शिकायत पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने जब मंदिर में कैश काउंटिंग (नकदी की गिनती) करने वाले स्टाफ की पृष्ठभूमि खंगाली, तो एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से छह कर्मचारी वाराणसी की एक सुरक्षा एजेंसी 'सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज' के पे-रोल पर थे। इस एजेंसी को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की स्थानीय शाखा ने कैश काउंटिंग के काम के लिए अनुबंधित किया था। नियमों को ताक पर रखकर इन कर्मचारियों को इस बेहद संवेदनशील काम में लगाया गया था, जहां इन्होंने कथित तौर पर इस बड़ी चोरी को अंजाम दिया।

बरामदगी के आंकड़े

पुलिस रिकॉर्ड और अदालती दस्तावेजों के अनुसार, इस मामले में कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। आरोपियों के पास से की गई बरामदगी का ब्योरा इस प्रकार है:

अविनाश शुक्ला से सबसे बड़ी बरामदगी: मुख्य आरोपियों में से एक अविनाश शुक्ला के ठिकानों और उसके भाई के जरिए पुलिस ने कुल 20.39 लाख रुपये की भारी नकदी बरामद की है। इसके अलावा उसके पास से कुछ विदेशी मुद्रा भी मिली है।

अन्य आरोपियों से बरामदगी: पुलिस ने करुणेश पांडेय से 18.07 लाख रुपये, अनुकल्प मिश्रा से 16.82 लाख रुपये और लवकुश मिश्रा से 14.25 लाख रुपये समेत अन्य आरोपियों से भी नकदी बरामद की है।

ट्रस्ट की प्रतिक्रिया: इस पूरे विवाद के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वहीं, मामले की जांच कर रही पुलिस ने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की बात कही है।

इस घटना का गहरा प्रभाव न केवल राम मंदिर के सुरक्षा और प्रबंधन तंत्र पर पड़ा है, बल्कि देश-विदेश के उन करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को भी ठेस पहुंची है जो अपनी गाढ़ी कमाई का अंश मंदिर में दान करते हैं। इस खुलासे के बाद से ही धार्मिक स्थलों पर नकदी प्रबंधन के लिए बने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और ट्रस्ट के प्रबंधन पर लगातार हमलावर है। घटना के बाद अब मंदिर परिसर में कैश हैंडलिंग के पूरे तंत्र को नए सिरे से पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की मांग तेज हो गई है।

अयोध्या पुलिस ने अदालत में अर्जी दाखिल कर मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की दो दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है, ताकि उससे जेल से बाहर लाकर गहन पूछताछ की जा सके। पुलिस को संदेह है कि इस हेराफेरी में कुछ बैंक कर्मी और ट्रस्ट के अंदरूनी लोग भी शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही वाराणसी की संबंधित सुरक्षा एजेंसी के मालिकों को भी पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया जा सकता है। आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी बरामदगी और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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