Maharashtra Politics Update: शिवसेना UBT को लगा तगड़ा झटका, आदित्य ठाकरे के करीबी सचिन अहिर मुख्यमंत्री शिंदे की सेना में शामिल

Sachin Ahir Joins Shinde Faction: महाराष्ट्र में शिवसेना UBT को एक और बड़ा झटका लगा है। 6 लोकसभा सांसदों के बाद अब विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहिर भी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं।

Jun 30, 2026 - 13:44
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Maharashtra Politics Update: शिवसेना UBT को लगा तगड़ा झटका, आदित्य ठाकरे के करीबी सचिन अहिर मुख्यमंत्री शिंदे की सेना में शामिल
Sachin Ahir joins Shinde Sena
  • Sachin Ahir Joins Shinde Sena: उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका, 6 सांसदों के बाद अब MLC सचिन अहिर भी शिंदे गुट में शामिल
  • महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा भूचाल: 6 सांसदों के बाद अब इस कद्दावर नेता ने छोड़ा उद्धव ठाकरे का साथ, शिंदे गुट में हुए शामिल
  • Maharashtra Political Crisis: शिवसेना UBT के विधान परिषद सदस्य सचिन अहिर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी में शामिल, उपसभापति पद के लिए भरा पर्चा

महाराष्ट्र की राजनीति से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे को एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे हैं। हाल ही में पार्टी के 6 लोकसभा सांसदों के पाला बदलने के बाद, अब मुंबई में शिवसेना UBT के कद्दावर नेता और विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहिर ने भी उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया है। मंगलवार, 30 जून 2026 को सचिन अहिर आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। पाला बदलने के तुरंत बाद उन्होंने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है। इस राजनीतिक उलटफेर के बाद महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (MVA) खेमे में खलबली मच गई है।

यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की सियासत में उद्धव ठाकरे गुट के लिए एक अत्यंत गंभीर संगठनात्मक क्षति है। पिछले कुछ ही दिनों के भीतर जहां पार्टी के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली असली शिवसेना का दामन थाम लिया था, वहीं अब विधान परिषद में भी पार्टी को बड़ा डेंट लगा है। पूर्व राज्य मंत्री और मुंबई के वर्ली क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता सचिन अहिर का शिवसेना UBT छोड़ना इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। महायुति सरकार ने इसे एक रणनीतिक जीत के रूप में पेश करते हुए सचिन अहिर को तुरंत विधान परिषद के उपसभापति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

राजनीतिक गलियारों में पिछले कुछ दिनों से इस बात की सुगबुगाहट तेज थी कि लोकसभा सांसदों के विद्रोह के बाद कुछ और विधायक और विधान परिषद सदस्य भी पाला बदल सकते हैं। मंगलवार की सुबह इन अटकलों पर उस समय विराम लग गया जब सचिन अहिर अचानक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार के साथ नजर आए।

सत्तारूढ़ गठबंधन (महायुति) के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में सचिन अहिर ने विधिवत रूप से एकनाथ शिंदे की शिवसेना की सदस्यता ग्रहण की। इसके तुरंत बाद, वे विधान भवन पहुंचे और विधान परिषद के उपसभापति पद के चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान महायुति के तमाम बड़े नेता उनके साथ खड़े दिखाई दिए, जो यह दर्शाता है कि यह पूरी योजना बेहद गुप्त और सुनियोजित तरीके से तैयार की गई थी।

इस पूरे घटनाक्रम पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री संजय शिरसाट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक बार फिर शिवसेना UBT पर एक सफल राजनीतिक ऑपरेशन किया है। सचिन अहिर जैसे जमीनी और कोर शिवसैनिक का वहां दम घुट रहा था, जिसके कारण यह विस्फोट हुआ है। हमारा अनुमान है कि आने वाले दिनों में आदित्य ठाकरे को छोड़कर बाकी सभी लोग असली शिवसेना में शामिल हो जाएंगे।"

दूसरी तरफ, शिवसेना UBT के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने बागियों को कड़ी चुनौती दी है। राउत ने कहा, "यदि किसी में हिम्मत है तो वह इस्तीफा दे और जनता के बीच दोबारा चुनाव लड़कर दिखाए। गद्दारी करने वाले कभी पनप नहीं सकते। निष्ठावान शिवसैनिकों का यह समंदर इन गद्दारों को बहा ले जाएगा। हमारी पार्टी राख से दोबारा उठ खड़ी होगी।"

सचिन अहिर का जाना उद्धव ठाकरे और विशेष रूप से उनके बेटे आदित्य ठाकरे के लिए एक बहुत बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका माना जा रहा है। साल 2019 में जब आदित्य ठाकरे ने वर्ली विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ने का फैसला किया था, तब राकांपा (NCP) छोड़कर शिवसेना में आए सचिन अहिर ने ही वर्ली में उनके लिए जमीन तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। मुंबई और विशेषकर श्रमिक यूनियनों (जैसे राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ) में अहिर का बड़ा प्रभाव है। ऐसे में मुंबई नगर निगम (BMC) और आगामी चुनावों से ठीक पहले उनका जाना ठाकरे गुट की कमर तोड़ने जैसा है।

इस बड़े उलटफेर के बाद अब महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद का चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है। महायुति के पास पर्याप्त संख्या बल होने के कारण सचिन अहिर की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं, उद्धव ठाकरे के सामने अब अपनी बची हुई पार्टी और बचे हुए विधायकों को एकजुट रखने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। ठाकरे इस समय लगातार जनसभाएं कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर नेताओं का इस तरह पार्टी छोड़ना उनके लिए आने वाले चुनावों की राह को बेहद कठिन बना रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में अगले कुछ दिनों में कुछ और बड़े चेहरों के पाला बदलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

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