प्रधानमंत्री मोदी ने ब्यूनस आयर्स में जनरल जोस डे सैन मार्टिन को दी श्रद्धांजलि, भारत-अर्जेंटीना संबंधों को नई ऊँचाई देने की पहल

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पाँच देशों की यात्रा के तीसरे चरण में अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में जनरल जोस डे सैन मार्टिन ...

Jul 6, 2025 - 13:50
 0  26
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्यूनस आयर्स में जनरल जोस डे सैन मार्टिन को दी श्रद्धांजलि, भारत-अर्जेंटीना संबंधों को नई ऊँचाई देने की पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पाँच देशों की यात्रा के तीसरे चरण में अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में जनरल जोस डे सैन मार्टिन की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी यात्रा की शुरुआत की। यह पहल न केवल अर्जेंटीना के राष्ट्रीय नायक और स्वतंत्रता सेनानी को सम्मान देने का प्रतीक थी, बल्कि भारत और अर्जेंटीना के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों को भी रेखांकित करती है। जनरल जोस डे सैन मार्टिन, जिन्हें अर्जेंटीना, चिली, और पेरू के मुक्तिदाता के रूप में जाना जाता है, लैटिन अमेरिका की स्वतंत्रता की लड़ाई का प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स पोस्ट में कहा, “ब्यूनस आयर्स में जनरल जोस डे सैन मार्टिन को श्रद्धांजलि दी। उनके साहस और नेतृत्व ने अर्जेंटीना के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन अर्जेंटीना के लोगों के लिए देशभक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बना हुआ है।” यह दौरा, जो 57 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का अर्जेंटीना का पहला द्विपक्षीय दौरा है, दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • जनरल जोस डे सैन मार्टिन और उनका ऐतिहासिक महत्व

जनरल जोस डे सैन मार्टिन (1778-1850) अर्जेंटीना के इतिहास में एक किंवदंती हैं, जिन्होंने 1813 से 1820 के बीच अर्जेंटीना, चिली, और पेरू को स्पेनिश औपनिवेशिक शासन से मुक्ति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1813 में सैन लोरेंजो की लड़ाई में स्पेनिश सेना को हराने से लेकर आर्मी ऑफ द एंडीज का गठन और चिली व पेरू की मुक्ति तक, सैन मार्टिन का नेतृत्व लैटिन अमेरिका की स्वतंत्रता का प्रतीक बन गया। ब्यूनस आयर्स में 1862 में फ्रांसीसी मूर्तिकार लुई जोसेफ डौमास द्वारा निर्मित उनकी अश्वारोही प्रतिमा, जिसे मोनुमेंटो अल जनरल सैन मार्टिन के नाम से जाना जाता है, अर्जेंटीना की राष्ट्रीय गौरव की पहचान है। प्रधानमंत्री मोदी ने 5 जुलाई 2025 को इस स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और जनरल सैन मार्टिन के साहस और देशभक्ति की सराहना की। यह पहल भारत की उस परंपरा का हिस्सा है, जिसमें विदेशी नेताओं के सम्मान में उनके राष्ट्रीय नायकों को श्रद्धांजलि दी जाती है, जो आपसी सम्मान और सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है। यह कदम भारत के वैश्विक स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान और स्वतंत्रता व संप्रभुता के साझा मूल्यों को रेखांकित करता है।

  • मोदी का अर्जेंटीना दौरा

प्रधानमंत्री मोदी का ब्यूनस आयर्स दौरा 4-5 जुलाई 2025 को हुआ, जो 1968 में इंदिरा गांधी के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का अर्जेंटीना का पहला द्विपक्षीय दौरा था। यह दौरा उनकी पाँच देशों की यात्रा (घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील, और नामीबिया) का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य ग्लोबल साउथ के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करना था। मोदी का यह दौरा अर्जेंटीना के राष्ट्रपति हावियर मिलेई के निमंत्रण पर हुआ, जिन्होंने ब्यूनस आयर्स में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक हार्दिक आलिंगन साझा किया, जो भारत-अर्जेंटीना के बढ़ते संबंधों का प्रतीक था।

मोदी की यात्रा की शुरुआत सैन मार्टिन मेमोरियल पर श्रद्धांजलि के साथ हुई, जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति मिलेई के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा, कृषि, खनन, तेल और गैस, नवीकरणीय ऊर्जा, व्यापार, निवेश, और लोगों से लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा की। भारत और अर्जेंटीना ने 2019 में अपनी साझेदारी को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया था, और यह दौरा 2024 में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में और भी महत्वपूर्ण हो गया। इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य भारत की स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अर्जेंटीना के विशाल खनिज संसाधनों, विशेष रूप से लिथियम, का उपयोग करना था। अर्जेंटीना दुनिया के दूसरी सबसे बड़ी शेल गैस और चौथे सबसे बड़े शेल तेल भंडारों वाला देश है, और इसके पास लिथियम, तांबा, और अन्य दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के समृद्ध भंडार हैं। अगस्त 2022 में दोनों देशों के बीच खनिज संसाधनों में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे, और जनवरी 2025 में इसकी संयुक्त कार्य समूह की पहली बैठक हुई थी। भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी KABIL ने 2024 से अर्जेंटीना में लिथियम खनन के लिए कुछ रियायतें हासिल की हैं। मोदी ने राष्ट्रपति मिलेई को भारत की ड्रोन दीदी पहल के बारे में बताया, जिसमें ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन के उपयोग से कृषि उत्पादकता बढ़ाने में शामिल किया गया है। उन्होंने कोविड के दौरान दवाओं के आपातकालीन परिवहन और अब सब्जियों व मछलियों के परिवहन के लिए ड्रोन के उपयोग के बारे में भी चर्चा की। यह दोनों देशों के बीच तकनीकी और कृषि सहयोग को बढ़ावा देने का एक उदाहरण था।

प्रधानमंत्री मोदी को ब्यूनस आयर्स के एल्वेयर पैलेस होटल में भारतीय प्रवासियों ने उत्साहपूर्ण स्वागत किया। “मोदी-मोदी”, “जय हिंद”, और “भारत माता की जय” के नारों के साथ भारतीय समुदाय ने पारंपरिक नृत्य प्रदर्शन के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया। मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए दूरी कोई बाधा नहीं है! ब्यूनस आयर्स में भारतीय समुदाय के गर्मजोशी भरे स्वागत से सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। यह देखकर वास्तव में हृदयस्पर्शी है कि घर से हजारों किलोमीटर दूर भी भारत की भावना हमारे भारतीय समुदाय के माध्यम से चमक रही है।” मोदी ने ब्यूनस आयर्स में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी की प्रतिमाओं पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जो 1924 में टैगोर की अर्जेंटीना यात्रा और भारत की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।

मोदी का यह दौरा न केवल भारत-अर्जेंटीना संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी को भी रेखांकित करता है। अर्जेंटीना के साथ सहयोग, विशेष रूप से लिथियम और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में, भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। यह दौरा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (ब्राजील) से पहले हुआ, जो भारत की वैश्विक मंचों पर बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर उत्साह देखा गया। एक एक्स यूजर ने लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री जी, यह जानकर बहुत खुशी हुई कि आपने अर्जेंटीना के महान नायक जनरल जोस डी सैन मार्टिन को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी विरासत निश्चित रूप से भारत और अर्जेंटीना के बीच संबंधों को और मजबूत करेगी।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ब्यूनस आयर्स में जनरल जोस डे सैन मार्टिन को श्रद्धांजलि अर्पित करना एक प्रतीकात्मक और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम था। यह न केवल अर्जेंटीना के राष्ट्रीय नायक के प्रति सम्मान को दर्शाता है, बल्कि भारत और अर्जेंटीना के बीच सांस्कृतिक और रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करता है। 57 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह दौरा दोनों देशों के बीच व्यापार, खनन, रक्षा, और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देगा।

Also Read- Political: महाराष्ट्र में 3 अक्टूबर को शास्त्रीय मराठी भाषा दिवस घोषित, हिंदी और मराठी भाषाओँ पर विवादों के बीच आया बड़ा फैसला।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow