ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद पर दी सफाई, से पहले बंगाल को निशाना बनाने का लगाया आरोप।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सिलीगुड़ी दौरे को लेकर उठे प्रोटोकॉल विवाद पर

Mar 9, 2026 - 11:12
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ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद पर दी सफाई, से पहले बंगाल को निशाना बनाने का लगाया आरोप।
ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद पर दी सफाई, से पहले बंगाल को निशाना बनाने का लगाया आरोप।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सिलीगुड़ी दौरे को लेकर उठे प्रोटोकॉल विवाद पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की ओर से कोई प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इवेंट का आयोजन एक प्राइवेट संगठन द्वारा किया गया था और वेन्यू का चयन एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने किया था, जिसकी वजह से यदि कोई मिस-मैनेजमेंट हुआ तो उसकी जिम्मेदारी आयोजकों पर है। ममता ने कोलकाता में अपने धरना मंच से बोलते हुए यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बंगाल को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है, और केंद्र सरकार तथा भाजपा इस मुद्दे को तूल देकर राज्य की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने शनिवार को सिलीगुड़ी के पास गोसाईंपुर में आयोजित 9वीं इंटरनेशनल संताल कॉन्फ्रेंस में वेन्यू के अचानक बदलाव और कम उपस्थिति पर निराशा जताई थी, साथ ही मुख्यमंत्री और मंत्रियों की गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाया था। ममता ने इसका जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार को इवेंट की विस्तृत जानकारी नहीं थी और न ही उन्हें आमंत्रित किया गया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर दस्तावेज साझा करते हुए दिखाया कि राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा अनुमोदित लाइनअप में सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब, दार्जीलिंग के डीएम और सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नर शामिल थे, जिन्होंने राष्ट्रपति को रिसीव और विदा किया। इस विवाद ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है, जहां केंद्र ने राज्य सरकार से रविवार शाम 5 बजे तक रिपोर्ट मांगी है। ममता ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि भाजपा राष्ट्रपति के पद का दुरुपयोग कर रही है, जबकि राज्य सरकार संविधान और राष्ट्रपति पद का सम्मान करती है। इस घटना ने चुनावी माहौल को और गर्मा दिया है, जहां भाजपा ने ममता पर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा शनिवार को हुआ था, जहां वे दार्जीलिंग जिले के बिधाननगर में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने वाली थीं, लेकिन सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों से वेन्यू को सिलीगुड़ी के पास गोसाईंपुर में शिफ्ट कर दिया गया। मुर्मू ने इवेंट में कम उपस्थिति पर दुख जताया और कहा कि संताल समुदाय के कई सदस्य नहीं पहुंच सके, शायद वेन्यू चेंज की वजह से। उन्होंने ममता बनर्जी को अपनी छोटी बहन बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्री क्यों नहीं आए, जबकि राष्ट्रपति का दौरा राज्य के लिए महत्वपूर्ण था। मुर्मू ने यह भी कहा कि वे बंगाल की बेटी हैं और ममता से कोई नाराजगी नहीं है, लेकिन कार्यक्रम की व्यवस्था पर सवाल उठाया। इस बयान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीएमसी पर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसे कृत्य अक्षम्य हैं। ममता ने इसका जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रपति जब भी चुनाव के समय आती हैं, तो राजनीतिक आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन वे पद का सम्मान करती हैं। उन्होंने भाजपा से पूछा कि भाजपा शासित राज्यों में आदिवासियों पर होने वाले अत्याचारों पर राष्ट्रपति क्यों चुप रहती हैं। ममता ने दस्तावेजों के जरिए दिखाया कि राज्य सरकार ने इवेंट से दो दिन पहले राष्ट्रपति सचिवालय को आयोजकों की अपर्याप्त तैयारी के बारे में सूचित किया था, लेकिन कार्यक्रम तय समय पर हुआ। उन्होंने कहा कि डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ने कोई लापरवाही नहीं बरती और सिलीगुड़ी मेयर ने प्रोटोकॉल का पालन किया। इस विवाद ने केंद्र-राज्य संबंधों पर सवाल उठाए हैं, जहां केंद्र ने मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती से शाम 5 बजे तक रिपोर्ट मांगी है।

इनसेट: ममता बनर्जी का बयान ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम में कोई प्रोटोकॉल ब्रेक नहीं हुआ। इवेंट प्राइवेट आयोजकों का था और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने वेन्यू दिया। राज्य सरकार को डिटेल्स नहीं पता थे और मेयर ने रिसीव किया। चुनाव से पहले बंगाल को टारगेट किया जा रहा है।

विवाद की जड़ में इंटरनेशनल संताल कॉन्फ्रेंस का आयोजन है, जो एक प्राइवेट संगठन इंटरनेशनल संताल काउंसिल द्वारा किया गया था। राष्ट्रपति मुर्मू को मुख्य अतिथि बनाया गया था, लेकिन वेन्यू को बिधाननगर से गोसाईंपुर शिफ्ट किया गया, जो बागडोगरा एयरपोर्ट के पास है। मुर्मू ने कहा कि शिफ्टिंग से संताल समुदाय के लोग नहीं पहुंच सके और कार्यक्रम में गंदगी, महिलाओं के लिए टॉयलेट की कमी और ग्रीन रूम की खराब व्यवस्था थी। उन्होंने आदिवासी समुदाय के विकास पर सवाल उठाया और कहा कि बंगाल में आदिवासियों के लिए क्या किया गया है। ममता ने इसका जवाब देते हुए कहा कि आयोजकों को पहले ही अपर्याप्त तैयारी के बारे में बताया गया था, लेकिन कार्यक्रम जारी रहा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति सचिवालय को सूचित किया था कि आयोजक तैयार नहीं हैं, फिर भी इवेंट हुआ। ममता ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वे राष्ट्रपति पद का दुरुपयोग कर चुनावी फायदा उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में आदिवासियों पर अत्याचार होते हैं, लेकिन राष्ट्रपति वहां चुप रहती हैं। इस विवाद ने आदिवासी वोट बैंक पर फोकस ला दिया है, जहां बंगाल में संताल समुदाय बड़ा वोटर बेस है। भाजपा ने ममता से इस्तीफे की मांग की है, जबकि टीएमसी ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है।

केंद्र सरकार ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल सरकार से रविवार शाम 5 बजे तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में वेन्यू चेंज, प्रोटोकॉल ब्रेक, रूट व्यवस्था और एयरपोर्ट पर केवल मेयर की मौजूदगी पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। केंद्र का कहना है कि राष्ट्रपति का दौरा राज्य सरकार की जिम्मेदारी होता है और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। ममता ने इसका जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सभी प्रोटोकॉल का पालन किया और राष्ट्रपति को उचित सम्मान दिया गया। उन्होंने दस्तावेज साझा किए, जिसमें दिखाया गया कि लाइनअप में मुख्यमंत्री या मंत्री शामिल नहीं थे और इवेंट प्राइवेट था। ममता ने कहा कि यदि राष्ट्रपति चुनाव के समय आती हैं, तो राजनीतिक आरोप लगने स्वाभाविक हैं, लेकिन वे पद का सम्मान करती हैं। इस विवाद ने प्रधानमंत्री मोदी को भी शामिल कर लिया, जिन्होंने कहा कि टीएमसी ने राष्ट्रपति का अपमान किया है। ममता ने मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा राष्ट्रपति पद को राजनीतिक हथियार बना रही है। यह घटना चुनावी साल में केंद्र-राज्य टकराव को बढ़ा सकती है।

इस विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां भाजपा ने ममता सरकार पर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाकर हमला तेज कर दिया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि ममता का व्यवहार अक्षम्य है और उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। वहीं, टीएमसी ने कहा कि यह भाजपा की साजिश है, जो चुनाव से पहले राज्य को बदनाम करना चाहती है। ममता ने कहा कि बंगाल हमेशा से आदिवासियों का सम्मान करता है और राज्य में उनके लिए कई योजनाएं चल रही हैं। उन्होंने भाजपा से पूछा कि मनिपुर और अन्य राज्यों में आदिवासियों पर अत्याचार क्यों हो रहे हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने बयान में ममता को छोटी बहन बताया और कोई नाराजगी नहीं जताई, लेकिन व्यवस्था पर सवाल उठाया। ममता ने कहा कि राष्ट्रपति बंगाल की बेटी हैं और उनका स्वागत है, लेकिन राजनीतिक दबाव में बयान दिए जा रहे हैं। इस विवाद ने आदिवासी समुदाय को केंद्र में ला दिया है, जहां संताल कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य उनके विकास पर चर्चा था। चुनावी माहौल में यह मुद्दा वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।

विवाद की जांच में केंद्र ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है, जो शाम 5 बजे तक जमा करनी है। रिपोर्ट में वेन्यू शिफ्टिंग के कारण, प्रोटोकॉल की डिटेल्स और राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। ममता ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी दस्तावेज साझा कर दिए हैं और कोई लापरवाही नहीं बरती गई। उन्होंने कहा कि आयोजकों को पहले ही कमी के बारे में बताया गया था, लेकिन राष्ट्रपति सचिवालय ने कार्यक्रम जारी रखा। ममता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि बंगाल संविधान की मां का सम्मान करता है और राष्ट्रपति पद को पवित्र मानता है। इस विवाद ने अन्य राज्यों में भी चर्चा पैदा की है, जहां विपक्षी दलों ने भाजपा पर राष्ट्रपति पद का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। ममता ने कहा कि यदि राष्ट्रपति चुनाव के समय आती हैं, तो यह भाजपा की सलाह पर होता है। आगे की जांच से और खुलासे हो सकते हैं।

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