बिहार के सहरसा में मिड-डे मील बना जहर, भोजन के बाद 250 से अधिक स्कूली बच्चों की हालत बिगड़ी

मिड-डे मील की इस बड़ी लापरवाही ने बिहार के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। नियमों के मुताबिक, बच्चों को भोजन परोसने से पहले स्कूल के प्रधानाध्यापक और कम से कम एक शिक्षक को स्वयं भोजन चखना अनिवार्य होता है। इस मामले में

May 8, 2026 - 07:00
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बिहार के सहरसा में मिड-डे मील बना जहर, भोजन के बाद 250 से अधिक स्कूली बच्चों की हालत बिगड़ी
बिहार के सहरसा में मिड-डे मील बना जहर, भोजन के बाद 250 से अधिक स्कूली बच्चों की हालत बिगड़ी

  • दाल के बर्तन में सांप मिलने की खबर से हड़कंप, सहरसा के स्कूल में लापरवाही ने दांव पर लगाई मासूमों की जान
  • मिड-डे मील त्रासदी: राजकीय मध्य विद्यालय बलुआहा में अफरा-तफरी, अस्पताल में भर्ती हुए सैकड़ों बीमार बच्चे

बिहार के सहरसा जिले से एक अत्यंत विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जहां सरकारी स्कूल में दिए जाने वाले दोपहर के भोजन (मिड-डे मील) ने सैकड़ों मासूम बच्चों की जान जोखिम में डाल दी। महिषी प्रखंड के अंतर्गत आने वाले राजकीय मध्य विद्यालय बलुआहा में गुरुवार को सामान्य दिनों की तरह ही बच्चों को भोजन परोसा गया था। भोजन ग्रहण करने के कुछ ही देर बाद, एक-एक कर बच्चों ने पेट में तेज दर्द, जी मिचलाने और उल्टी की शिकायत शुरू कर दी। देखते ही देखते बीमार बच्चों की संख्या इतनी बढ़ गई कि स्कूल प्रशासन और वहां मौजूद शिक्षकों के हाथ-पांव फूल गए। प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार, 250 से अधिक बच्चे इस विषाक्त भोजन का शिकार हुए हैं, जिन्हें आनन-फानन में स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की भयावहता तब और बढ़ गई जब भोजन परोसने के दौरान ही बच्चों और रसोइयों की नजर उस बर्तन पर पड़ी जिसमें पकी हुई दाल रखी गई थी। चश्मदीदों और परिजनों के दावों के अनुसार, दाल के उस बड़े बर्तन के तलहटी में एक मरा हुआ सांप पाया गया। यह खबर आग की तरह पूरे बलुआहा गांव और महिषी प्रखंड में फैल गई। जैसे ही परिजनों को इस बात की भनक लगी, वे बदहवास होकर स्कूल की ओर दौड़ पड़े। स्कूल परिसर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का केंद्र बन गया। कई बच्चे दर्द से तड़पते हुए जमीन पर गिर पड़े थे, जिन्हें पुलिस की गाड़ियों, एंबुलेंस और निजी वाहनों की मदद से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है।

अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। चिकित्सकों की एक बड़ी टीम बच्चों के उपचार में जुटी हुई है और प्रारंभिक जांच में इसे 'फूड पॉइजनिंग' यानी खाद्य विषाक्तता का गंभीर मामला बताया गया है। सहरसा के सिविल सर्जन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रभावित बच्चों के लिए पर्याप्त बेड और दवाओं के इंतजाम के निर्देश दिए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश बच्चों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के एक साथ बीमार होने ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सहरसा जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से एक जांच कमेटी का गठन कर दिया है जो भोजन की गुणवत्ता और घटना के कारणों का पता लगाएगी। प्रशासन इस बात की गहनता से जांच कर रहा है कि दाल में सांप गिरने की घटना किस स्तर पर हुई। क्या सांप पहले से दाल के कच्चे सामान में मौजूद था, या भोजन पकने के बाद उसे खुले में रखने के दौरान यह हादसा हुआ? इसके साथ ही स्कूल के जल स्रोत और सफाई व्यवस्था की भी जांच की जा रही है। मिड-डे मील की इस बड़ी लापरवाही ने बिहार के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। नियमों के मुताबिक, बच्चों को भोजन परोसने से पहले स्कूल के प्रधानाध्यापक और कम से कम एक शिक्षक को स्वयं भोजन चखना अनिवार्य होता है। इस मामले में यह जांच का विषय है कि क्या इस अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं। यदि भोजन को पहले चखा गया था, तो उस समय विषैले तत्वों की पहचान क्यों नहीं हो सकी? स्थानीय लोगों का आक्रोश चरम पर है, क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब राज्य के किसी सरकारी स्कूल में मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें आई हैं। इस घटना ने एक बार फिर उन एनजीओ और एजेंसियों की भूमिका को संदेह के घेरे में ला दिया है जो स्कूलों में भोजन की आपूर्ति का जिम्मा संभालते हैं।

प्रशासनिक टीम ने स्कूल पहुंचकर रसोई घर और भोजन बनाने वाली सामग्री के नमूने जब्त कर लिए हैं। फोरेंसिक लैब और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को इन नमूनों की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। जांच टीम यह भी देख रही है कि जिस स्थान पर भोजन पकाया जाता है, वहां स्वच्छता के मानकों का कितना पालन किया जा रहा था। स्कूल के बर्तनों की साफ-सफाई और भंडारण की व्यवस्था में बड़ी खामियां पाए जाने की संभावना जताई गई है। जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों को आश्वस्त किया है कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह स्कूल प्रशासन हो या भोजन आपूर्तिकर्ता एजेंसी, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा। शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों ने भी इस मामले में रिपोर्ट तलब की है। महिषी प्रखंड के शिक्षा अधिकारी से लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी तक को जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए हैं। यह घटना उस समय हुई है जब सरकार लगातार स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए पोषण युक्त भोजन के दावे कर रही है। सहरसा की इस त्रासदी ने इन दावों की पोल खोल दी है और यह साफ कर दिया है कि धरातल पर मासूमों की सेहत के साथ किस कदर खिलवाड़ किया जा रहा है। आने वाले दिनों में जिले के अन्य स्कूलों में भी मिड-डे मील की व्यवस्था का औचक निरीक्षण करने की योजना बनाई गई है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

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