नासिक टीसीएस घोटाले की मास्टरमाइंड निदा खान चढ़ी पुलिस के हत्थे, 25 दिनों तक लुका-छिपी के खेल का हुआ अंत

निदा खान के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने उसके पास से कई डिजिटल उपकरण, लैपटॉप और फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिनका उपयोग वह युवाओं को झांसे में लेने के लिए करती थी

May 8, 2026 - 07:10
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नासिक टीसीएस घोटाले की मास्टरमाइंड निदा खान चढ़ी पुलिस के हत्थे, 25 दिनों तक लुका-छिपी के खेल का हुआ अंत
नासिक टीसीएस घोटाले की मास्टरमाइंड निदा खान चढ़ी पुलिस के हत्थे, 25 दिनों तक लुका-छिपी के खेल का हुआ अंत

  • उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र तक चली छापेमारी के बाद गिरफ्तार हुई निदा खान, नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी का है आरोप
  • नासिक पुलिस की बड़ी कामयाबी: टीसीएस कांड की मुख्य आरोपी का पकड़ा जाना बनेगा बड़े सिंडिकेट के खात्मे का आधार

महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए चर्चित 'टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज' (TCS) भर्ती घोटाले और ठगी के मामले में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस पूरे फर्जीवाड़े की मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड मानी जा रही निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पिछले 25 दिनों से निदा पुलिस के लिए एक बड़ी पहेली बनी हुई थी और लगातार अपनी लोकेशन बदलकर चकमा दे रही थी। इस गिरफ्तारी को नासिक पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि निदा के पास इस घोटाले से जुड़ी कई ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां हैं, जो इस गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में मदद करेंगी। निदा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कई राज्यों में जाल बिछाया था और तकनीकी निगरानी की मदद से उसे धर दबोचा। नासिक टीसीएस कांड का मामला तब सामने आया था जब कई युवाओं ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें प्रतिष्ठित आईटी कंपनी टीसीएस में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की चपत लगाई गई है। निदा खान और उसके सहयोगियों ने फर्जी नियुक्ति पत्र, कंपनी के जाली लेटरहेड और ईमेल आईडी का इस्तेमाल कर युवाओं को विश्वास में लिया था। जांच में यह पाया गया कि यह केवल कुछ लाख रुपये का मामला नहीं है, बल्कि यह करोड़ों रुपये का एक संगठित सिंडिकेट है जो पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बना रहा था। निदा इस गिरोह की कमान संभाल रही थी और उसी के निर्देश पर युवाओं से पैसे ऐंठे जाते थे। जब मामला पुलिस तक पहुंचा, तो निदा तुरंत फरार हो गई, जिसके बाद से उसकी तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई थीं।

गिरफ्तारी की प्रक्रिया के दौरान पुलिस को कई चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना करना पड़ा। फरार होने के बाद निदा खान ने अपने सभी मोबाइल फोन बंद कर दिए थे और वह केवल इंटरनेट कॉलिंग के जरिए अपने संपर्कों से बात कर रही थी। उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए वेशभूषा में भी बदलाव किए थे और अलग-अलग शहरों के सस्ते होटलों और किराए के कमरों में शरण ले रखी थी। नासिक पुलिस की अपराध शाखा ने उसकी लोकेशन ट्रैक करने के लिए उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में छापेमारी की। अंततः, तकनीकी विश्लेषण और मानवीय खुफिया जानकारी के सटीक समन्वय से पुलिस ने उसे उस समय गिरफ्तार किया जब वह उत्तर प्रदेश के एक सुरक्षित ठिकाने से अपना स्थान बदलने की कोशिश कर रही थी। पुलिस को संदेह है कि निदा खान के तार कई बड़े शहरों के प्लेसमेंट एजेंटों से जुड़े हुए हैं। अब तक की जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस गिरोह ने केवल नासिक ही नहीं, बल्कि पुणे और मुंबई जैसे शहरों में भी सैकड़ों युवाओं को अपना शिकार बनाया है। निदा खान के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने उसके पास से कई डिजिटल उपकरण, लैपटॉप और फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिनका उपयोग वह युवाओं को झांसे में लेने के लिए करती थी। शुरुआती पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है कि निदा ने बहुत ही पेशेवर तरीके से टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी की चयन प्रक्रिया की नकल तैयार की थी, ताकि किसी को भी शक न हो। उसने बाकायदा इंटरव्यू राउंड भी आयोजित किए थे, जिससे आवेदकों को यह लगे कि पूरी प्रक्रिया वैध और पारदर्शी है। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि उसके खातों में आए करोड़ों रुपये कहां ट्रांसफर किए गए और इस राशि का उपयोग कहां किया गया।

इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग अब उन बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया में है, जिनका उपयोग लेन-देन के लिए किया गया था। निदा खान की गिरफ्तारी के बाद अब उन लोगों के नाम भी सामने आने की उम्मीद है जो पर्दे के पीछे रहकर उसे कानूनी और आर्थिक सहायता प्रदान कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि निदा केवल एक चेहरा है, जबकि इस नेटवर्क के पीछे कुछ ऐसे लोग भी हो सकते हैं जिन्हें आईटी सेक्टर की गहरी समझ है और जो कंपनी के आंतरिक कामकाज से परिचित हैं। पुलिस अब निदा को अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी की मांग करेगी ताकि विस्तृत पूछताछ के जरिए इस पूरे रैकेट की जड़ों तक पहुंचा जा सके। नासिक और आसपास के इलाकों के युवाओं में इस गिरफ्तारी के बाद एक राहत की लहर है, हालांकि कई परिवार अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी गंवा चुके हैं। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे नौकरी के नाम पर किसी को भी नकद या ऑनलाइन भुगतान न करें और हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ही आवेदन करें। निदा खान का 25 दिनों तक फरार रहना यह दर्शाता है कि वह कितनी शातिर थी और उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले से ही तैयारी कर रखी थी। हालांकि, कानून के लंबे हाथों ने आखिरकार उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। इस मामले में आगे की कड़ियाँ जोड़ने के लिए अब उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच की जा रही है।

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