बकरीद पर बकरे का यह खास हिस्सा होता है सबसे ज्यादा लोकप्रिय, स्वाद और बनावट के मामले में माना जाता है सर्वश्रेष्ठ

रान के बाद जिस हिस्से को मटन प्रेमी सबसे ज्यादा तवज्जो देते हैं, वह है बकरे का अगला हिस्सा जिसे 'दस्ती' या शोल्डर कहा जाता है। दस्ती का मांस बकरे के सबसे ज्यादा चलने-फिरने वाले हिस्से से आता है, इसलिए इसमें प्राकृतिक रूप से वसा यानी फैट की मात्रा बहुत अच्छी और संतुलित होती है। इस हिस्से में मौजूद फैट की वजह

May 28, 2026 - 12:26
May 28, 2026 - 12:51
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बकरीद पर बकरे का यह खास हिस्सा होता है सबसे ज्यादा लोकप्रिय, स्वाद और बनावट के मामले में माना जाता है सर्वश्रेष्ठ
बकरीद पर बकरे का यह खास हिस्सा होता है सबसे ज्यादा लोकप्रिय, स्वाद और बनावट के मामले में माना जाता है सर्वश्रेष्ठ

  • मटन के शौकीनों की पहली पसंद बनता है बकरे का यह अंग, हर खास पकवान के लिए कसाई से की जाती है इसी की मांग
  • चांप और दस्ती के स्वाद के बीच क्यों सबसे आगे निकल जाता है रान का मांस, जानिए इसके पीछे का पूरा विज्ञान

त्योहारों के सीजन में, विशेषकर बकरीद यानी ईद-उल-अजहा के पावन मौके पर, मटन के शौकीनों के बीच बकरे के विभिन्न हिस्सों के मांस को लेकर एक अलग ही कौतूहल और चर्चा देखने को मिलती है। आमतौर पर लोग बाजार से मटन खरीदकर लाते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को इस बात की गहरी समझ होती है कि बकरे के शरीर का कौन सा हिस्सा किस पकवान के लिए सबसे उत्तम होता है और त्योहार के दिनों में किस हिस्से की मांग सबसे ज्यादा बढ़ जाती है। मटन के अलग-अलग कट्स का अपना एक विशिष्ट स्वाद, बनावट और पकाने का समय होता है। इस खास मौके पर कसाई की दुकान से लेकर घरों की रसोई तक, बकरे के एक विशेष हिस्से को हासिल करने की होड़ मची रहती है, क्योंकि उस हिस्से का मांस न केवल सबसे ज्यादा स्वादिष्ट होता है बल्कि वह त्योहार के पारंपरिक व्यंजनों की जान माना जाता है।

इस पूरे विश्लेषण में सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण नाम बकरे के पिछले हिस्से यानी पैर का आता है, जिसे उर्दू और रसोइयों की भाषा में 'रान' कहा जाता है। बकरीद के मौके पर बकरे की रान सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला और सबसे लोकप्रिय हिस्सा माना जाता है। इस हिस्से के मांस की खासियत यह होती है कि यह पूरी तरह से मस्कुलर यानी गठीला और कम वसा वाला होता है। रान के मांस में हड्डियों की बनावट ऐसी होती है कि इसके भीतर से निकलने वाला गूदा और मज्जा ग्रेवी को एक अलग ही गाढ़ापन और लाजवाब जायका प्रदान करता है। यही कारण है कि त्योहार के दिनों में बनने वाले शाही कोरमा, मटन निहारी और रान रोस्ट जैसे भारी और धीमी आंच पर पकने वाले व्यंजनों के लिए लोग सबसे पहले इसी हिस्से की मांग करते हैं।

रान के बाद जिस हिस्से को मटन प्रेमी सबसे ज्यादा तवज्जो देते हैं, वह है बकरे का अगला हिस्सा जिसे 'दस्ती' या शोल्डर कहा जाता है। दस्ती का मांस बकरे के सबसे ज्यादा चलने-फिरने वाले हिस्से से आता है, इसलिए इसमें प्राकृतिक रूप से वसा यानी फैट की मात्रा बहुत अच्छी और संतुलित होती है। इस हिस्से में मौजूद फैट की वजह से मांस बेहद रसीला और मुलायम बनता है। जब मटन को धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाया जाता है, तो दस्ती का फैट धीरे-धीरे पिघलकर मांस के रेशों में समा जाता है, जिससे वह मुंह में घुल जाने वाला बन जाता है। त्योहार के दिन बनने वाली खुशबूदार मटन बिरयानी और कश्मीरी रोगन जोश जैसे व्यंजनों के लिए दस्ती के मांस को सबसे बेहतरीन माना जाता है, क्योंकि यह मसालों को अपने भीतर बहुत अच्छी तरह से सोख लेता है। बकरे के जिस हिस्से की मांसपेशियां सबसे ज्यादा काम करती हैं, जैसे पैर और कंधा, वहां का मांस थोड़ा सख्त होता है लेकिन उसमें स्वाद सबसे गहरा होता है। ऐसे हिस्से को हमेशा धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाने की आवश्यकता होती है, जबकि कम काम करने वाली मांसपेशियों वाले हिस्से जैसे पीठ का मांस बहुत जल्दी पक जाता है।

बकरीद के मेनू में इसके बाद जिस हिस्से का जलवा सबसे ज्यादा देखने को मिलता है, वह है 'चांप' यानी बकरे की पसलियां और छाती का हिस्सा। मटन चांप को मटन के सबसे महंगे और प्रीमियम कट्स में गिना जाता है। पसलियों के इस मांस की बनावट में वसा की एक पतली परत हड्डियों के ऊपर लिपटी होती है, जो इसे भूनने या ग्रिल करने के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है। त्योहार के शाम की दावतों में बनने वाले मटन चांप फ्राई, तंदूरी चांप और सीख कबाब के लिए इसी हिस्से का उपयोग किया जाता है। जब इस हिस्से को कोयले की आंच पर या तवे पर मसालों के साथ पकाया जाता है, तो हड्डियों के साथ लगा मांस एक ऐसा लाजवाब और क्रिस्पी स्वाद देता है जो मटन के किसी अन्य हिस्से में मिलना असंभव है।

इन मुख्य हिस्सों के अलावा बकरे की पीठ का हिस्सा, जिसे 'पुठ' या लोइन कहा जाता है, अपनी अत्यधिक कोमलता के लिए जाना जाता है। पुठ का मांस बकरे के शरीर का सबसे नर्म हिस्सा होता है क्योंकि इस हिस्से की मांसपेशियों पर शारीरिक रूप से सबसे कम दबाव पड़ता है। इस मांस में कोई अतिरिक्त जोड़ या सख्त ऊतक नहीं होते हैं, जिसके कारण यह बहुत ही कम समय में पककर तैयार हो जाता है। घर में झटपट बनने वाले मटन स्ट्यू, सूखे कबाब या फिर बोनलेस मटन टिक्का बनाने के लिए पुठ के टुकड़ों को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। कम समय और कम मेहनत में एक बेहतरीन और बिना किसी झंझट के पकने वाला मटन चाहने वाले लोगों के लिए यह हिस्सा पहली पसंद होता है।

त्योहार के दौरान बकरे के मुख्य मांस के अलावा कुछ अन्य हिस्से भी होते हैं जिनकी अपनी एक अलग और समर्पित प्रशंसक श्रेणी होती है। इसमें बकरे के पैर का निचला हिस्सा यानी 'पाया' और गर्दन का मांस शामिल है। पाया का उपयोग मुख्य रूप से त्योहार के अगले दिन सुबह के नाश्ते में खाए जाने वाले गाढ़े सूप या शोरबे के लिए किया जाता है, जिसमें प्रचुर मात्रा में जिलेटिन और कोलेजन पाया जाता है जो सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ, गर्दन का मांस अपनी घनी बनावट और गहरे स्वाद के लिए सूप और भारी तरी वाले मटन करी में इस्तेमाल होता है। कसाई अक्सर पूरे बकरे के मांस को काटते समय इन सभी हिस्सों को एक निश्चित अनुपात में मिलाते हैं ताकि खरीदार को हर तरह का स्वाद मिल सके।

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