जांबिया के पूर्व राष्ट्रपति एडगर लुंगू का शव आठ महीने बाद भी फ्रिज में, मृत्यु के बाद परिवार और उत्तराधिकारियों में संपत्ति-शव पर विवाद।

जांबिया के पूर्व राष्ट्रपति एडगर चागवा लुंगू की मृत्यु 5 जून 2025 को दक्षिण अफ्रीका के एक अस्पताल में हुई थी, लेकिन आठ महीने बीत जाने

Feb 25, 2026 - 12:34
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जांबिया के पूर्व राष्ट्रपति एडगर लुंगू का शव आठ महीने बाद भी फ्रिज में, मृत्यु के बाद परिवार और उत्तराधिकारियों में संपत्ति-शव पर विवाद।
जांबिया के पूर्व राष्ट्रपति एडगर लुंगू का शव आठ महीने बाद भी फ्रिज में, मृत्यु के बाद परिवार और उत्तराधिकारियों में संपत्ति-शव पर विवाद।

जांबिया के पूर्व राष्ट्रपति एडगर चागवा लुंगू की मृत्यु 5 जून 2025 को दक्षिण अफ्रीका के एक अस्पताल में हुई थी, लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी उनका शव अंतिम संस्कार के लिए नहीं दिया गया है। शव अभी भी जोहान्सबर्ग के एक शवगृह में बर्फ के कमरे में रखा हुआ है। परिवार और उनके उत्तराधिकारियों के बीच संपत्ति, राजनीतिक विरासत और अंतिम संस्कार के स्थान को लेकर गहरा विवाद चल रहा है। इस विवाद की वजह से शव को रिलीज नहीं किया जा रहा है और कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंच गई है। लुंगू के परिवार के एक हिस्से का कहना है कि अंतिम संस्कार जांबिया में होना चाहिए, जबकि अन्य सदस्य दक्षिण अफ्रीका में ही अंतिम संस्कार कराना चाहते हैं। इस बीच शव को संरक्षित रखने के लिए हर महीने भारी खर्च हो रहा है, जिसे लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं।

एडगर लुंगू का निधन 79 वर्ष की आयु में हृदय संबंधी जटिलताओं के कारण हुआ था। वे जून 2015 से अगस्त 2021 तक जांबिया के राष्ट्रपति रहे और पट्रीओटिक फ्रंट पार्टी के प्रमुख नेता थे। उनकी मृत्यु के बाद जांबिया में शोक की लहर दौड़ गई थी और देश भर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई थी। लेकिन अंतिम संस्कार को लेकर परिवार में मतभेद शुरू हो गए। एक पक्ष चाहता है कि शव को लुंगू के पैतृक गांव में ले जाकर पारंपरिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया जाए, जबकि दूसरा पक्ष दक्षिण अफ्रीका में ही अंतिम संस्कार कराने पर अड़ा हुआ है। इस विवाद ने कानूनी पेचीदगियां पैदा कर दी हैं और कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं। शव को अभी तक किसी भी पक्ष को सौंपा नहीं गया है।

शव को आठ महीने से ज्यादा समय तक फ्रिज में रखने का खर्च बहुत अधिक है। शवगृह को हर महीने संरक्षण शुल्क देना पड़ता है, जिसमें बिजली, रखरखाव और अन्य खर्च शामिल हैं। परिवार के दोनों गुट इस खर्च को लेकर भी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। एक पक्ष का कहना है कि दूसरे पक्ष ने जानबूझकर शव को रिलीज नहीं होने दिया ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके। दूसरा पक्ष आरोप लगाता है कि पहले पक्ष ने संपत्ति पर कब्जा करने के लिए शव को बहाना बनाया है। इस विवाद ने पूर्व राष्ट्रपति की राजनीतिक और पारिवारिक विरासत को भी प्रभावित किया है। लुंगू के बच्चे और रिश्तेदारों के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर भी पहले से ही मुकदमे चल रहे थे, जो अब इस शव विवाद से और उलझ गए हैं।

जांबिया सरकार ने इस मामले में तटस्थ रुख अपनाया है और कहा है कि यह परिवार का निजी मामला है। लेकिन देश में कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वह हस्तक्षेप कर शव को जल्द अंतिम संस्कार के लिए मुक्त कराए। पूर्व राष्ट्रपति की मृत्यु के बाद जांबिया में उनके योगदान को लेकर बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों के लिए दोषी ठहराते हैं, जबकि उनके समर्थक उन्हें विकास और स्थिरता का प्रतीक मानते हैं। इस विवाद ने उनकी छवि को और जटिल बना दिया है। शव को लेकर चल रहा यह विवाद जांबिया की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

शव को इतने लंबे समय तक रखने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ गए हैं। शवगृह के विशेषज्ञों का कहना है कि इतने दिनों तक शव को संरक्षित रखना मुश्किल होता है और इसमें तकनीकी चुनौतियां आती हैं। परिवार के दोनों पक्षों ने कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं, जिसमें एक पक्ष शव को जांबिया ले जाने की अनुमति मांग रहा है और दूसरा पक्ष दक्षिण अफ्रीका में ही अंतिम संस्कार की मांग कर रहा है। कोर्ट ने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है और मामले की सुनवाई जारी है। इस दौरान शव को फ्रिज में रखने का खर्च लगातार बढ़ रहा है।

यह मामला पूर्व राष्ट्रपतियों के अंतिम संस्कार और परिवार में विरासत को लेकर चलने वाले विवादों का एक दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण बन गया है। जांबिया में लुंगू की मृत्यु के बाद उनके योगदान को लेकर बहस जारी है। कुछ लोग उन्हें याद करते हुए उनके विकास कार्यों की सराहना करते हैं, जबकि अन्य उनके कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार के आरोपों को दोहराते हैं। शव विवाद ने इन बहसों को और तेज कर दिया है। परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति और राजनीतिक विरासत को लेकर पहले से चल रहे विवाद अब इस शव को लेकर और गहरा गए हैं।

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