पाकिस्तान की तारीफ के बाद चीन का प्रोपेगैंडा, भारत पर हमले में नाकामी का दावा। 

भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई 2025 को हुए सीजफायर समझौते के बाद, चीन ने अपनी कूटनीतिक रणनीति को एक नए स्तर पर...

May 13, 2025 - 13:43
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पाकिस्तान की तारीफ के बाद चीन का प्रोपेगैंडा, भारत पर हमले में नाकामी का दावा। 

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई 2025 को हुए सीजफायर समझौते के बाद, चीन ने अपनी कूटनीतिक रणनीति को एक नए स्तर पर ले जाते हुए भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा शुरू किया है। चीनी विदेश मंत्रालय और राज्य नियंत्रित मीडिया, जैसे चाइना डेली और ग्लोबल टाइम्स, ने दावा किया है कि भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के तहत किए गए हमले "नाकाम" रहे और पाकिस्तान ने अपनी सैन्य ताकत के दम पर भारत को "मुंहतोड़ जवाब" दिया। यह दावा तब सामने आया जब चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत में पाकिस्तान के "संयम और जिम्मेदार रवैये" की सराहना की और उसे "लौह मित्र" करार दिया।

  • चीन का प्रोपेगैंडा और दावे: 

चाइना डेली के एक संपादकीय में दावा किया गया कि भारत के हमलों से पाकिस्तान को कोई खास नुकसान नहीं हुआ, जबकि पाकिस्तान ने अपनी वायुसेना, विशेष रूप से चीनी निर्मित J-10C फाइटर जेट्स, के जरिए भारत के दो राफेल विमानों को मार गिराया। हालांकि, भारत ने इन दावों का खंडन किया और कहा कि उसने कोई विमान नहीं खोया। भारतीय वायुसेना ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक लेख में कहा कि भारत की सैन्य कार्रवाई "असफल" रही और पाकिस्तान ने अपनी रक्षा प्रणालियों, विशेष रूप से चीनी निर्मित HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम, के जरिए भारतीय मिसाइलों को नाकाम कर दिया। इसके जवाब में, भारतीय सैन्य प्रवक्ताओं ने पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरें जारी कीं, जो पाकिस्तान के भोलारी एयरबेस पर हुए नुकसान को दर्शाती हैं, जहां एक हैंगर और अन्य सैन्य ढांचे तबाह हो गए। चीन ने यह भी दावा किया कि उसने क्षेत्र में शांति स्थापित करने में "महत्वपूर्ण भूमिका" निभाई, जिसे भारतीय विदेश मंत्रालय ने "अतिशयोक्ति" करार दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि सीजफायर समझौता भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच सीधी बातचीत का नतीजा था, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी।

  • चीन की दोहरी चाल:

चीन ने एक ओर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से बातचीत में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान को "संयम" के लिए शाबाशी दी। यह दोहरा रवैया सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना, जहां कई भारतीय यूजर्स ने दावा किया कि चीन ने पहलगाम हमले को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान को उकसाया ताकि भारत को युद्धग्रस्त देश के रूप में पेश किया जा सके और अमेरिकी कंपनियों को भारत में निवेश से रोका जा सके।

  • भारत का जवाब:

भारतीय सशस्त्र बलों ने चीनी दावों को "पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा का हिस्सा" करार दिया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, एयर मार्शल एके भट्टी ने पाकिस्तान के नुर खान और भोलारी एयरबेस पर हुए नुकसान की तस्वीरें दिखाईं, जो भारतीय क्रूज मिसाइलों, संभवतः ब्रह्मोस, से हुए हमलों का सबूत थीं। भारत ने यह भी खुलासा किया कि पाकिस्तान ने अपने हमलों में चीनी आपूर्ति वाले मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिसे भारत ने पहली बार सार्वजनिक रूप से उजागर किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को एक रैली में कहा, "भारत ने अपनी कार्रवाई केवल रोकी है, खत्म नहीं की। अगर भविष्य में कोई आतंकी हमला हुआ, तो भारत अपने तरीके से जवाब देगा।" उन्होंने पाकिस्तान के "परमाणु ब्लैकमेल" को खारिज करते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति पर अडिग रहेगा।

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सोशल मीडिया, विशेष रूप से X, पर चीनी प्रोपेगैंडा के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने दावा किया कि चीन अपनी सैन्य तकनीक को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है और भारत के खिलाफ युद्ध में उसकी विफलता की "रिपोर्ट" मांग रहा है। कुछ ने यह भी कहा कि चीन ने पहलगाम हमले को प्रायोजित किया ताकि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़े और अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश से हिचकें। हालांकि, ये दावे असत्यापित हैं और इन्हें सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए।

ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को शुरू हुआ, जब भारत ने 22 अप्रैल के पहलगाम हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए। इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों से जुड़े आतंकवादी मारे गए। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें उसने भारतीय सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, लेकिन भारत की S-400 रक्षा प्रणाली ने इनमें से अधिकांश को नाकाम कर दिया।

चीन का प्रोपेगैंडा भारत की सैन्य कार्रवाई को कमजोर दिखाने और पाकिस्तान को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि चीनी सैन्य तकनीक को बढ़ावा देने की रणनीति भी हो सकती है। भारत ने इन दावों का तथ्यपरक जवाब देकर अपनी स्थिति मजबूत की है, लेकिन यह घटना दर्शाती है कि दक्षिण एशिया में कूटनीतिक और सूचना युद्ध कितना जटिल हो चुका है।

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