ईरान में Donald Trump के खिलाफ फतवा जारी, Trump की हत्या करने वाले को 870 करोड़ रुपये का इनाम, वैश्विक तनाव बढ़ा।
ईरान में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ फतवा जारी किया गया है। इस फतवे में दोनों ...
ईरान में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ फतवा जारी किया गया है। इस फतवे में दोनों नेताओं को "इस्लाम का दुश्मन" करार देते हुए उनकी हत्या की सुपारी दी गई है। खबरों के अनुसार, ट्रंप की हत्या करने वाले को 100 बिलियन ईरानी तोमान, यानी लगभग 870 करोड़ रुपये का इनाम देने का ऐलान किया गया है। यह फतवा ईरान के दो कट्टरपंथी मौलवियों और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी सलाहकार जावेद लारीजानी द्वारा समर्थित बताया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक कूटनीति में तनाव पैदा कर दिया है और अमेरिका, इजराइल समेत कई देशों ने इसकी कड़ी निंदा की है।
8 जुलाई 2025 को ईरान के दो कट्टरपंथी मौलवियों ने ट्रंप और नेतन्याहू को "मोहरेब" (ईश्वर का दुश्मन) घोषित करते हुए उनके खिलाफ फतवा जारी किया। इसके बाद, ईरान की वेबसाइट THAAR.IR पर इन नेताओं की हत्या के लिए चंदा जुटाने का अभियान शुरू हुआ, जिसमें कुछ ही दिनों में 20 मिलियन डॉलर (लगभग 167 करोड़ रुपये) से अधिक राशि जुटाई गई। वेस्ट अजरबैजान प्रांत के एक मौलवी ने ट्रंप की हत्या के लिए 100 बिलियन तोमान (लगभग 870 करोड़ रुपये) के इनाम की घोषणा की। यह ऐलान ईरान की सरकारी इस्लामिक प्रचार संस्था के एक अधिकारी ने किया।
इसके साथ ही, खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार जावेद लारीजानी ने 10 जुलाई 2025 को ईरानी सरकारी टेलीविजन पर कहा कि ट्रंप अपने फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो आवास में भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरानी ड्रोन इतने शक्तिशाली हैं कि वे ट्रंप को सनबाथ लेते समय निशाना बना सकते हैं। लारीजानी ने कहा, "ट्रंप ने ऐसे काम किए हैं कि वह अब सनबाथ भी नहीं ले सकते। एक छोटा ड्रोन उनकी नाभि पर वार कर सकता है।" इस बयान ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा दिया।
हालांकि, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इस फतवे में सरकार या खामेनेई की संलिप्तता से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि यह फतवा सरकारी नीति नहीं दर्शाता और यह कुछ मौलवियों का व्यक्तिगत कदम है।
इस फतवे का मुख्य कारण जनवरी 2020 में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या है, जिसके लिए ईरान ट्रंप को जिम्मेदार मानता है। उस समय ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति थे और उन्होंने सुलेमानी पर ड्रोन हमले का आदेश दिया था। ईरान ने इसे राष्ट्रीय अपमान माना और तब से बदले की धमकी देता रहा है। हाल ही में, जून 2025 में अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों—नतांज, फोर्डो, और इस्फहान—पर हमले ने तनाव को और बढ़ा दिया। ट्रंप ने दावा किया कि इन हमलों में ईरान की परमाणु क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा, हालांकि अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, यह क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई, बल्कि कुछ महीनों के लिए धीमी हुई।
ईरान और इजराइल के बीच जून 2025 में हुए युद्ध ने भी इस फतवे को हवा दी। इस युद्ध में ईरान ने कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डे अल-उदीद पर मिसाइलें दागी थीं, जिसके जवाब में अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले किए। ट्रंप ने इस युद्ध में मध्यस्थता की और 24 जून 2025 को सीजफायर की घोषणा की, लेकिन ईरान ने इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि अगर इजराइल हमले रोकेगा, तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा। इस तनावपूर्ण माहौल में फतवा और इनाम की घोषणा ने स्थिति को और जटिल कर दिया।
इस फतवे ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हलचल मचा दी है। अमेरिका ने इसे "सीधा उकसावा" करार दिया, जबकि इजराइल ने इसे "खूनी साजिश" बताया। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां, जैसे FBI और CIA, पहले से ही ट्रंप की हत्या की साजिश की आशंका जता रही थीं, और इस फतवे ने उनकी चिंता बढ़ा दी। ट्रंप ने इस धमकी का जवाब देते हुए कहा, "मुझे सनबाथ लिए सात साल हो गए हैं। मुझे नहीं लगता कि कोई खतरा है, लेकिन हो भी सकता है।" उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम हैं, और अमेरिकी आसमान में कोई ड्रोन बिना अनुमति उड़ नहीं सकता।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस फतवे की निंदा की और इसे ईरान की आतंकी नीतियों का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इजराइल और अमेरिका मिलकर इसका जवाब देंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ईरान पर अमेरिकी और इजराइली हमलों की निंदा की, लेकिन फतवे पर कोई टिप्पणी नहीं की।
X पर इस फतवे को लेकर कई पोस्ट्स वायरल हुईं। एक यूजर ने लिखा, "ईरान का फतवा ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ नफरत को दर्शाता है।" एक अन्य ने कहा, "यह फतवा 1989 के सलमान रुश्दी मामले की याद दिलाता है।" हालांकि, ये पोस्ट्स लोगों की भावनाओं को दर्शाती हैं, लेकिन तथ्यों की पुष्टि के लिए विश्वसनीय नहीं हैं।
यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने किसी विदेशी हस्ती के खिलाफ फतवा जारी किया है। 1989 में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता रुहोल्लाह खोमैनी ने ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी की किताब द सैटेनिक वर्सेज को इस्लाम का अपमान मानते हुए उनके खिलाफ फतवा जारी किया था। इस फतवे के बाद रुश्दी को सालों तक सुरक्षा घेरे में रहना पड़ा, और 2022 में उन पर अमेरिका में हमला हुआ, जिसमें उनकी एक आंख चली गई। ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ फतवा भी उसी शब्दावली का इस्तेमाल करता है, जिसमें उन्हें "मोहरेब" (ईश्वर का दुश्मन) कहा गया है। यह समानता वैश्विक चिंता का कारण बन रही है, क्योंकि यह फतवा भी हिंसा को बढ़ावा दे सकता है।
इस फतवे ने ट्रंप और नेतन्याहू की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रंप की सुरक्षा बढ़ा दी है, खासकर उनके फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो आवास के आसपास। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की सुरक्षा इतनी पुख्ता है कि ड्रोन हमला लगभग असंभव है, क्योंकि उनके आवास के आसपास नो-फ्लाई जोन लागू है और फाइटर जेट तैनात रहते हैं। फिर भी, ईरान के स्लीपर सेल, जो पश्चिमी देशों में सक्रिय हैं, खतरा पैदा कर सकते हैं। इन स्लीपर सेल को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) से बम बनाने और हमले की ट्रेनिंग मिली हुई है।
कूटनीतिक स्तर पर, इस फतवे ने ईरान-अमेरिका और ईरान-इजराइल संबंधों को और तनावपूर्ण बना दिया है। अमेरिका ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, क्योंकि किसी देश के नेता के खिलाफ फतवा जारी करना कूटनीतिक नियमों के खिलाफ है। ईरान के राष्ट्रपति के इंकार के बावजूद, इस फतवे को खामेनेई के करीबी लोगों का समर्थन प्राप्त है, जिससे यह विश्वास करना मुश्किल है कि यह पूरी तरह गैर-सरकारी है।
ट्रंप ने अपने कार्यकाल में ईरान के खिलाफ सख्त नीति अपनाई थी। 2017 में उन्होंने ईरान के साथ परमाणु समझौता (JCPOA) तोड़ दिया था और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। 2025 में सत्ता में लौटने के बाद, उन्होंने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले का आदेश दिया, जिसे इजराइल ने समर्थन दिया। हालांकि, ट्रंप ने सीजफायर की मध्यस्थता की और ईरान को तेल बेचने की छूट दी, जिसे उनके "यू-टर्न" के रूप में देखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि वह ईरान में तख्तापलट नहीं चाहते, क्योंकि इससे अशांति फैलेगी। फिर भी, इस फतवे ने ट्रंप की ईरान नीति को और जटिल कर दिया है।
ईरान में Donald Trump और बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जारी फतवा और 870 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा ने वैश्विक तनाव को बढ़ा दिया है। यह फतवा न केवल ट्रंप और नेतन्याहू की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और शांति के लिए भी चुनौती है। ईरान का यह कदम 1989 के सलमान रुश्दी फतवे की याद दिलाता है, जिसके परिणाम दशकों तक हिंसा के रूप में सामने आए। अमेरिका और इजराइल ने इसकी कड़ी निंदा की है, और ट्रंप की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
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