बलूचिस्तान में आतंकी हमला- पहचान पूंछ्कर क्वेटा-लाहौर बस से 9 यात्रियों को उतारकर गोली मारी। 

Pakistan News: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में 11 जुलाई 2025 को एक दुखद और आतंकी घटना हुई, जब क्वेटा से लाहौर जा रही एक बस पर सशस्त्र हमलावरों ने हमला...

Jul 11, 2025 - 12:31
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बलूचिस्तान में आतंकी हमला- पहचान पूंछ्कर क्वेटा-लाहौर बस से 9 यात्रियों को उतारकर गोली मारी। 
बलूचिस्तान में आतंकी हमला- पहचान पूंछ्कर क्वेटा-लाहौर बस से 9 यात्रियों को उतारकर गोली मारी। 

Pakistan News: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में 11 जुलाई 2025 को एक दुखद और आतंकी घटना हुई, जब क्वेटा से लाहौर जा रही एक बस पर सशस्त्र हमलावरों ने हमला किया। इस हमले में नौ यात्रियों को उनके पहचान पत्र जांचने के बाद बस से उतारकर गोली मार दी गई। सभी मृतक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के निवासी थे। यह हमला बलूचिस्तान के ज़ोब क्षेत्र में हुआ, और स्थानीय अधिकारियों ने इसे आतंकी घटना करार दिया। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने इसकी निंदा करते हुए इसे “निर्दोष लोगों की क्रूर हत्या” बताया। अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन अतीत में बलूच विद्रोही समूहों, खासकर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए), ने पंजाब के लोगों को निशाना बनाया है।

11 जुलाई 2025 को सुबह के समय, क्वेटा से लाहौर जा रही एक यात्री बस को बलूचिस्तान के ज़ोब शहर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर सशस्त्र हमलावरों ने रोक लिया। ज़ोब के सहायक आयुक्त नवेद आलम के अनुसार, हमलावरों ने बस को रोककर सभी यात्रियों के पहचान पत्र जांचे। इसके बाद, नौ यात्रियों को, जो पंजाब प्रांत के विभिन्न हिस्सों से थे, जबरन बस से उतारा गया और पास की एक जगह पर ले जाकर गोली मार दी गई। सभी नौ यात्रियों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। मृतकों के शवों को बारखान जिले के रेखनी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी पहचान और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू की गई।

इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने इसे आतंकी हमला करार देते हुए कहा, “आतंकवादियों ने यात्रियों को बस से उतारा, उनकी पहचान की, और फिर नौ निर्दोष पाकिस्तानियों की बेरहमी से हत्या कर दी।” स्थानीय पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए और जांच शुरू की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने बस के टायर फटने के बाद यात्रियों को उतारा और फिर सुनियोजित तरीके से हत्या की।

बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा और खनिज-संपन्न प्रांत, दशकों से अलगाववादी विद्रोह और हिंसा से जूझ रहा है। यह प्रांत अफगानिस्तान और ईरान की सीमा से सटा है और 60 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजनाओं का केंद्र है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे अलगाववादी समूह इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, जो स्वायत्तता और प्रांत के संसाधनों पर स्थानीय नियंत्रण की मांग करते हैं। ये समूह अक्सर सुरक्षा बलों, सरकारी परियोजनाओं, और पंजाब के लोगों को निशाना बनाते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि केंद्र सरकार और पंजाबी समुदाय उनके संसाधनों का शोषण कर रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है जब बलूचिस्तान में पंजाब के यात्रियों को निशाना बनाया गया है। फरवरी 2025 में बारखान जिले में सात पंजाबी यात्रियों को बस से उतारकर मार दिया गया था, और मार्च 2025 में ग्वादर बंदरगाह के पास कलमट क्षेत्र में पाँच ट्रक ड्राइवरों की हत्या हुई थी। इसके अलावा, मार्च 2025 में बीएलए ने सिबी जिले में जफर एक्सप्रेस ट्रेन पर हमला किया, जिसमें 33 लोग मारे गए थे। इन हमलों में बीएलए ने अक्सर जिम्मेदारी ली है, लेकिन इस बार अभी तक कोई संगठन सामने नहीं आया।

11 जुलाई 2025 को हुए इस हमले के साथ ही बलूचिस्तान के क्वेटा, लोरालाई, और मस्तुंग में तीन अन्य आतंकी हमले हुए। शाहिद रिंद के अनुसार, सुरक्षा बलों ने इन हमलों को विफल कर दिया, और इनमें कोई हताहत नहीं हुआ। स्थानीय मीडिया में खबरें थीं कि हमलावरों ने चेकपोस्ट, पुलिस स्टेशन, बैंक, और संचार टावरों को निशाना बनाया। इन हमलों को एक सुनियोजित आतंकी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

पाकिस्तान सरकार और सेना ने इन हमलों के लिए भारत पर “प्रॉक्सी आतंकवाद” का आरोप लगाया है, विशेष रूप से “फित्ना अल-हिंदुस्तान” नामक समूह को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, भारत ने इन आरोपों को “निराधार” बताते हुए खारिज कर दिया। पाकिस्तान ने सबूत पेश नहीं किए, और यह दावा भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव का हिस्सा माना जा रहा है।

ज़ोब के सहायक आयुक्त नवेद आलम ने पुष्टि की कि हमलावरों ने सुनियोजित तरीके से नौ यात्रियों को निशाना बनाया। पुलिस और सुरक्षा बलों ने घटनास्थल को सील कर दिया और साक्ष्य एकत्र किए। अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन पुलिस बीएलए और अन्य बलूच विद्रोही समूहों की भूमिका की जांच कर रही है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे “क्षम्य न अपराध” बताया। उन्होंने कहा, “आतंकवादियों ने एक बार फिर अपनी कायराना और क्रूर प्रकृति दिखाई। निर्दोष लोगों का खून व्यर्थ नहीं जाएगा। हम आतंक के हर नेटवर्क को खत्म करेंगे।”

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी इस हमले को “पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध” करार दिया और कहा कि आतंकवादियों को कहीं छिपने की जगह नहीं मिलेगी। सुरक्षा बलों ने लोरालाई के पास एक अन्य अपहरण की घटना की भी सूचना दी, जिसके लिए खोज अभियान शुरू किया गया है।

इस हमले ने बलूचिस्तान और पूरे पाकिस्तान में डर और तनाव का माहौल पैदा कर दिया। सोशल मीडिया मंच X पर लोगों ने इस घटना की निंदा की। एक यूज़र ने लिखा, “निर्दोष लोगों को इस तरह निशाना बनाना आतंकवाद की क्रूरता दिखाता है।” एक अन्य यूज़र ने कहा, “पंजाब के लोगों को बार-बार क्यों निशाना बनाया जा रहा है? बलूचिस्तान में शांति की जरूरत है।”

पंजाब प्रांत की प्रवक्ता उज़्मा बुखारी ने इस हमले को “गंभीर चिंता का विषय” बताया और बलूचिस्तान सरकार से बीएलए जैसे आतंकी समूहों को खत्म करने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की। यह हमला भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है, क्योंकि पाकिस्तान ने बिना सबूत भारत पर “आतंकवाद को बढ़ावा देने” का आरोप लगाया है।

बलूचिस्तान में दशकों से अलगाववादी विद्रोह चल रहा है। बीएलए जैसे समूहों का दावा है कि केंद्र सरकार उनके प्रांत के खनिज और प्राकृतिक संसाधनों का शोषण कर रही है, जबकि स्थानीय बलूच समुदाय को इसका लाभ नहीं मिल रहा। ये समूह सुरक्षा बलों, सीपीईसी परियोजनाओं, और गैर-बलूच लोगों, खासकर पंजाबियों, को निशाना बनाते हैं। दूसरी ओर, बलूच कार्यकर्ता पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाते हैं, जिसमें हजारों बलूच लोगों के “लापता” होने की बात शामिल है।

इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज़ (पीआईसीएसएस) के अनुसार, मई 2025 में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में 85 आतंकी हमले हुए, जिनमें 113 लोग मारे गए। यह आंकड़ा क्षेत्र में बढ़ती हिंसा को दर्शाता है।

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