सरकारी खजाने पर बोझ कम करने की तैयारी- डीएम ने दिए 23 लाख यूनिट राशन कार्डों की जांच के आदेश, गठित हुई विशेष टीमें

प्रशासनिक स्तर पर इस कार्य को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए जिलाधिकारी ने जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया है। जिले के छह तहसील क्षेत्रों में होने वाले इस सत्यापन के लिए एडीएम प्रशासन को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं, ब्लॉक स्तर पर खंड विकास अधि

Apr 29, 2026 - 14:06
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सरकारी खजाने पर बोझ कम करने की तैयारी- डीएम ने दिए 23 लाख यूनिट राशन कार्डों की जांच के आदेश, गठित हुई विशेष टीमें
सरकारी खजाने पर बोझ कम करने की तैयारी- डीएम ने दिए 23 लाख यूनिट राशन कार्डों की जांच के आदेश, गठित हुई विशेष टीमें

  • नैनीताल जिले में राशन कार्डों का महा-सत्यापन: अपात्रों की होगी छुट्टी, पात्रों को मिलेगा हक
  • ई-केवाईसी और पात्रता की कड़ी परीक्षा: हल्द्वानी से रामनगर तक चलेगा अभियान, एक महीने में तैयार होगी राशन कार्डधारकों की रिपोर्ट

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान जिले के 23 लाख से अधिक यूनिट वाले राशन कार्डों के सघन सत्यापन का आदेश जारी किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना है जो पात्रता की श्रेणी में नहीं आते हैं, फिर भी सरकारी राशन का लाभ उठा रहे हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार की मंशा हर जरूरतमंद तक अनाज पहुंचाना है, लेकिन जो लोग आर्थिक रूप से संपन्न हैं या गलत जानकारी देकर कार्ड बनवाए हुए हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह सत्यापन अभियान न केवल आंकड़ों को सुधारेगा, बल्कि वास्तविक गरीबों के लिए योजना की पहुंच को और अधिक सुलभ बनाएगा। नैनीताल जिले में वर्तमान में तीन प्रमुख श्रेणियों के तहत राशन कार्डों का वितरण किया जाता है, जिनके आंकड़ों की अब बारीकी से जांच होगी। जिलाधिकारी कार्यालय से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में प्राथमिक परिवार योजना (PHH) के तहत 113,642 कार्डधारक हैं, जबकि अंत्योदय अन्न योजना (AAY) में 17,834 परिवार पंजीकृत हैं। इसके अलावा, राज्य खाद्य योजना (SFY) के अंतर्गत 101,104 कार्डधारक आते हैं। इन सभी श्रेणियों को मिलाकर कुल 951,910 यूनिट राशन वर्तमान में आवंटित किया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थियों के होने के कारण प्रशासन को संदेह है कि कई अपात्र लोग भी इस व्यवस्था का हिस्सा बने हुए हैं। इसी के मद्देनजर ई-केवाईसी (e-KYC) की प्रक्रिया को भी इस अभियान के साथ अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि आधार लिंक होने से दोहराव और फर्जीवाड़े को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

प्रशासनिक स्तर पर इस कार्य को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए जिलाधिकारी ने जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया है। जिले के छह तहसील क्षेत्रों में होने वाले इस सत्यापन के लिए एडीएम प्रशासन को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं, ब्लॉक स्तर पर खंड विकास अधिकारियों (BDO) और तहसील व शहर स्तर पर उपजिलाधिकारियों (SDM) को कमान सौंपी गई है। प्रत्येक ब्लॉक और तहसील में पांच-पांच अधिकारियों की एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जो घर-घर जाकर कार्डधारकों की पात्रता की जांच करेगी। इस समिति की जवाबदेही तय की गई है और उन्हें एक महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपनी होगी। यह त्रिस्तरीय जांच प्रणाली यह सुनिश्चित करेगी कि सत्यापन की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जाए।

केंद्र सरकार के कड़े निर्देश

यह कार्रवाई केंद्र सरकार के उस अनिवार्य आदेश के क्रम में की जा रही है, जिसमें हर पांच वर्ष में राशन कार्डों की अनिवार्य जांच का प्रावधान किया गया है। इस बार की जांच में ई-केवाईसी को सबसे मजबूत हथियार बनाया गया है। यदि कोई उपभोक्ता ई-केवाईसी प्रक्रिया में शामिल नहीं होता है या बायोमेट्रिक सत्यापन में विफल रहता है, तो उसका नाम लाभार्थी सूची से काटने के निर्देश दिए गए हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगी। सत्यापन अभियान के दौरान पात्रता के मानकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ऐसे लोग जो आयकर दाता (Income Tax Payers) हैं, जिनके पास चार पहिया वाहन है या जिनकी वार्षिक आय सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक है, उनके कार्ड निरस्त किए जाएंगे। जिलाधिकारी रयाल ने निर्देश दिए हैं कि जांच के दौरान मानवीय पहलुओं का भी ध्यान रखा जाए ताकि कोई भी वास्तविक पात्र व्यक्ति सूची से बाहर न हो। हल्द्वानी जैसे शहरी क्षेत्रों में किराये पर रहने वाले परिवारों और विस्थापितों की पात्रता की विशेष जांच होगी। अक्सर यह देखा गया है कि लोग एक स्थान छोड़ने के बाद भी वहां का राशन कार्ड सरेंडर नहीं करते और नए स्थान पर भी कार्ड बनवा लेते हैं, इस तरह की विसंगतियों को भी इस अभियान के दौरान दूर किया जाएगा।

इस महा-सत्यापन अभियान का एक प्रमुख हिस्सा ई-केवाईसी का अपडेशन है। प्रशासन ने सभी कार्डधारकों को अपने नजदीकी सस्ते गल्ले की दुकान या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आधार कार्ड के माध्यम से अपनी और अपने परिवार के सदस्यों की केवाईसी करवाने का समय दिया है। यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कई मामलों में परिवार के सदस्य बाहर चले जाते हैं या उनकी मृत्यु हो जाती है, लेकिन उनके हिस्से का राशन लगातार उठाया जाता रहता है। डिजिटल सत्यापन से यह डेटा रीयल-टाइम अपडेट हो जाएगा और फर्जी यूनिट्स के कटने से सरकार को करोड़ों रुपये की बचत होगी। इसके साथ ही, नई सूची तैयार होने के बाद उन लोगों को नए कार्ड जारी किए जाएंगे जो लंबे समय से वेटिंग लिस्ट में हैं।

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