'ईरान से युद्ध न होता तो मैं निशाना न बनता', व्हाइट हाउस प्रेस डिनर में हुए हमले के बाद ट्रंप का सनसनीखेज बयान

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह की हिंसा से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने 2024 में पेन्सिलवेनिया रैली के दौरान हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति अब एक "खतरनाक पेशा" बन गई है, लेकिन वे इसे छो

Apr 26, 2026 - 11:41
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'ईरान से युद्ध न होता तो मैं निशाना न बनता', व्हाइट हाउस प्रेस डिनर में हुए हमले के बाद ट्रंप का सनसनीखेज बयान
'ईरान से युद्ध न होता तो मैं निशाना न बनता', व्हाइट हाउस प्रेस डिनर में हुए हमले के बाद ट्रंप का सनसनीखेज बयान
  • ईरान के साथ टकराव और जानलेवा हमलों का साया: डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विरोधियों की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल
  • वैश्विक सुरक्षा और निजी खतरों का अंतर्संबंध: राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को बताया अपनी जान पर जोखिम का कारण

25 अप्रैल 2026 की शाम वाशिंगटन डीसी के एक प्रतिष्ठित होटल में आयोजित 'व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर' के दौरान हुई गोलीबारी ने पूरी दुनिया को स्तभ्ध कर दिया है। इस हमले के कुछ ही घंटों बाद, सुरक्षित स्थान से राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर दावा किया। ट्रंप ने सीधे तौर पर इस हमले का संबंध ईरान के साथ चल रहे मौजूदा युद्ध और तनाव से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर की गई स्ट्राइक और वहां के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ सख्त फैसलों के कारण ही वे विदेशी ताकतों और उनके गुर्गों के निशाने पर आए हैं। ट्रंप के अनुसार, अगर वे ईरान की आक्रामकता और परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ इतनी मजबूती से खड़े नहीं होते, तो शायद उन पर इस तरह के जानलेवा हमले की कोशिश कभी नहीं की जाती। यह बयान न केवल उनके व्यक्तिगत साहस को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक राजनीति में अमेरिका की कठोर नीति के परिणामों की ओर भी इशारा करता है।

घटनाक्रम के अनुसार, ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप को उस समय सुरक्षित बाहर निकाला गया जब डिनर के दौरान अचानक गोलियों की आवाज सुनाई दी। इस हमले के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि जब आप देशहित में बड़े और कड़े फैसले लेते हैं, तो आप स्वाभाविक रूप से एक बड़ा लक्ष्य (Target) बन जाते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसी क्रम में उन्होंने हाल के महीनों में बी-2 बॉम्बर विमानों को ईरानी ठिकानों पर हमला करने का आदेश दिया था। राष्ट्रपति का मानना है कि इन सैन्य कार्रवाइयों ने ईरान के भीतर और बाहर उनके दुश्मनों को बौखला दिया है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि "इतने बड़े मिशन के लिए निशाना बनाया जाना मेरे लिए सम्मान की बात है," लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि ऐसे हमले उन्हें ईरान के खिलाफ युद्ध जीतने के संकल्प से पीछे नहीं हटा पाएंगे। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों, विशेष रूप से एफबीआई और सीक्रेट सर्विस ने इस हमले के पीछे की कड़ियों को जोड़ना शुरू कर दिया है। हालांकि शुरुआती जांच में संदिग्ध हमलावर को 'लोन वुल्फ' यानी अकेले काम करने वाला बताया गया है, लेकिन ट्रंप का इशारा किसी गहरी अंतरराष्ट्रीय साजिश की ओर है। गौरतलब है कि 2026 की शुरुआत से ही अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है, खासकर फरवरी में ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की एक इजरायली हवाई हमले में हुई मौत के बाद। ट्रंप प्रशासन ने इस घटना को "ईरान के लोगों के लिए न्याय" करार दिया था, जिससे ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के भीतर प्रतिशोध की आग भड़क उठी थी। खुफिया रिपोर्टों में पहले भी यह चेतावनी दी गई थी कि ईरान 2020 में कासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए ट्रंप को निशाना बनाने की योजना बना रहा है, और ताजा हमले ने इन आशंकाओं को और बल दे दिया है।

'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और 2026 का ईरान युद्ध

साल 2026 के शुरुआती महीनों में अमेरिका ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान के 2000 से अधिक ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया है। रक्षा सचिव पेट हेगसेथ ने पुष्टि की है कि इस सैन्य अभियान का एक मुख्य उद्देश्य उन ईरानी इकाइयों को खत्म करना था जो 2024 से ही डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रच रही थीं। अमेरिकी सरकार का मानना है कि ईरान ने बार-बार भाड़े के हत्यारों के जरिए राष्ट्रपति को निशाना बनाने की कोशिश की है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह की हिंसा से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने 2024 में पेन्सिलवेनिया रैली के दौरान हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति अब एक "खतरनाक पेशा" बन गई है, लेकिन वे इसे छोड़ने के बजाय और अधिक आक्रामक तरीके से अपनी नीतियों को लागू करेंगे। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रतीक माने जाने वाले एक कार्यक्रम में इस तरह की हिंसा हुई, जो दोनों राजनीतिक दलों के लोगों को एक साथ लाती है। हालांकि, उनका मुख्य जोर इस बात पर रहा कि अमेरिकी सुरक्षा अब उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने दावा किया कि उनके खिलाफ किए गए ये हमले वास्तव में अमेरिका की संप्रभुता और उसकी विदेश नीति पर हमले हैं, जिनका जवाब केवल जीत के साथ ही दिया जा सकता है।

ईरान के साथ जारी इस 'छाया युद्ध' (Shadow War) ने वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप का यह तर्क कि वे केवल ईरान से लड़ने के कारण निशाने पर हैं, उनकी घरेलू राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है। उनके समर्थक इसे एक "योद्धा राष्ट्रपति" की छवि के रूप में देख रहे हैं जो देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहा है। दूसरी ओर, आलोचक इन दावों की बारीकी से जांच कर रहे हैं कि क्या वाकई इस ताजा हमले के तार सीधे ईरान से जुड़े हैं या यह सुरक्षा व्यवस्था में एक और बड़ी चूक का परिणाम है। राष्ट्रपति ने हालांकि यह स्पष्ट कर दिया है कि वे जल्द ही दुनिया के सामने इस साजिश के पुख्ता सबूत रखेंगे, क्योंकि उनके पास इस मामले पर काम करने वाले दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञ मौजूद हैं। इस पूरी घटना ने ईरान के आधिकारिक रुख को भी चर्चा में ला दिया है। हालांकि ईरानी विदेश मंत्रालय ने अतीत में इस तरह के आरोपों को "दुर्भावनापूर्ण" और "राजनीति से प्रेरित" बताकर खारिज किया है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने बार-बार यह दोहराया है कि तेहरान ने उनके खिलाफ 'मर्डर फॉर हायर' (सुपारी देकर हत्या) जैसे कई षड्यंत्र रचे हैं। हाल ही में न्यूयॉर्क की एक अदालत में आसिफ मर्चेंट जैसे संदिग्धों की सजा ने इन दावों को कानूनी आधार भी प्रदान किया है। ट्रंप का ताजा बयान इसी लंबी चल रही प्रतिद्वंद्विता का सबसे नया और तीखा अध्याय है। उन्होंने साफ कर दिया है कि ईरान के परमाणु केंद्रों पर हमला करना उनकी प्राथमिकता बनी रहेगी, चाहे इसके लिए उन्हें व्यक्तिगत तौर पर कितनी भी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।

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