ठाणे हमला: सुरक्षा गार्डों पर हमला करने वाला आरोपी निकला 'लोन वुल्फ' स्ट्रैटेजी का पैरोकार, घर से मिले ISIS से जुड़े नोट्स।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंतर्गत आने वाले मीरारोड इलाके में सोमवार को एक निर्माणाधीन इमारत में दो सुरक्षा गार्डों पर हुए हमले ने राज्य

Apr 30, 2026 - 12:39
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ठाणे हमला: सुरक्षा गार्डों पर हमला करने वाला आरोपी निकला 'लोन वुल्फ' स्ट्रैटेजी का पैरोकार, घर से मिले ISIS से जुड़े नोट्स।
ठाणे हमला: सुरक्षा गार्डों पर हमला करने वाला आरोपी निकला 'लोन वुल्फ' स्ट्रैटेजी का पैरोकार, घर से मिले ISIS से जुड़े नोट्स।
  • अमेरिका से लौटा केमिस्ट्री टीचर बना कट्टरपंथी, मुंबई के संवेदनशील ठिकानों के नक्शे और विस्फोटक बनाने की आशंका से एजेंसियां सतर्क
  • मीरारोड कांड: जैब जुबैर अंसारी के घर से मिला जिहाद और गाजा का जिक्र वाला सुसाइड नोट, सुरक्षा एजेंसियों के रिस्पॉन्स टाइम को परखने का शक

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंतर्गत आने वाले मीरारोड इलाके में सोमवार को एक निर्माणाधीन इमारत में दो सुरक्षा गार्डों पर हुए हमले ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने 31 वर्षीय आरोपी जैब जुबैर अंसारी को वारदात के महज एक घंटे के भीतर धर दबोचा था, लेकिन गिरफ्तारी के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जांच के दौरान यह पाया गया कि यह हमला केवल एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकती है। आरोपी ने कथित तौर पर गार्डों पर हमला करने से पहले उनसे उनका धर्म पूछा था और उन्हें 'कलमा' पढ़ने के लिए मजबूर किया था। जब गार्ड ऐसा करने में विफल रहे, तो उसने उन पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। यह कृत्य उसके भीतर घर कर चुकी कट्टरपंथी विचारधारा का पहला हिंसक प्रदर्शन माना जा रहा है। जांच एजेंसियों को आरोपी जैब जुबैर अंसारी के घर की तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक सामग्रियां मिली हैं, जो उसके आतंकी रुझान की पुष्टि करती हैं। उसके पास से मुंबई के कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण इलाकों के विस्तृत नक्शे बरामद हुए हैं। इन नक्शों का वह बारीकी से अध्ययन कर रहा था, जिससे यह संदेह गहरा गया है कि वह किसी बड़े हमले की तैयारी में था। इसके अलावा, पुलिस को उसके घर से एक हस्तलिखित नोट मिला है, जिसमें वैश्विक आतंकी संगठन 'इस्लामिक स्टेट' (आईएस) में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की गई है। इस नोट में 'जिहाद', 'गाजा' और 'लोन वुल्फ अटैक' जैसे शब्दों का स्पष्ट उल्लेख है। आरोपी ने इस हमले को अपने नापाक इरादों के 'पहले कदम' के रूप में वर्णित किया है, जिससे स्पष्ट होता है कि वह खुद को एक बड़े मिशन के लिए तैयार कर रहा था।

आरोपी जैब जुबैर अंसारी की पृष्ठभूमि किसी सामान्य अपराधी जैसी नहीं है। वह एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति है और पेशे से केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) का शिक्षक रह चुका है। वह मुंबई के एक नामी कोचिंग सेंटर में छात्रों को पढ़ाता था। उसके रसायन विज्ञान के ज्ञान ने जांच अधिकारियों को इस चिंता में डाल दिया है कि कहीं वह रसायनों का उपयोग कर विस्फोटक या रासायनिक हथियार बनाने की योजना तो नहीं बना रहा था। अधिकारी अब इस कोण से भी जांच कर रहे हैं कि क्या उसने अपने शिक्षण करियर के दौरान या उसके बाद किसी खतरनाक रसायनिक फार्मूले पर काम किया था। एक शिक्षित व्यक्ति का इस कदर कट्टरपंथ की ओर मुड़ना समाज और सुरक्षा तंत्र के लिए एक नई चुनौती पेश कर रहा है, क्योंकि ऐसे लोग तकनीकी रूप से अधिक सक्षम होते हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि सुरक्षा गार्डों पर किया गया यह हमला महज एक इत्तेफाक नहीं था। यह सुरक्षा बलों और पुलिस के 'रिस्पॉन्स टाइम' (प्रतिक्रिया समय) को मापने का एक तरीका हो सकता है। आरोपी यह देखना चाहता था कि किसी हमले के बाद एजेंसियां कितनी जल्दी सक्रिय होती हैं और उनकी कार्रवाई का तरीका क्या रहता है। जैब जुबैर अंसारी के अतीत को खंगालने पर पता चला कि उसने अपने जीवन का एक लंबा हिस्सा विदेशों में बिताया है। वह साल 2000 से 2020 तक अपने माता-पिता के साथ अमेरिका में रहा था। वहां उसका जीवन एक सामान्य प्रवासी की तरह बीत रहा था, लेकिन 2020 में उसका वर्क परमिट खत्म हो गया, जिसके बाद उसे भारत लौटना पड़ा। भारत आने के बाद वह कुछ समय तक मुंबई के कुर्ला और नवी मुंबई के वाशी इलाके में रहा, लेकिन 2022 से वह मीरारोड के नया नगर में अकेले रहने लगा था। उसकी पत्नी, जो अफगान मूल की है, उसे छोड़कर वापस अमेरिका चली गई थी। जांच एजेंसियां अब इस गुत्थी को सुलझाने में लगी हैं कि उसके कट्टरपंथी बनने की शुरुआत अमेरिका प्रवास के दौरान हुई थी या भारत लौटने के बाद अकेलेपन और बेरोजगारी ने उसे इस रास्ते पर धकेला।

महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि यह मामला 'सेल्फ रेडिकलाइजेशन' (स्व-कट्टरपंथ) का प्रतीत होता है। उनके अनुसार, आरोपी किसी सक्रिय आतंकी सेल का हिस्सा होने के बजाय इंटरनेट पर मौजूद सामग्री, कट्टरपंथी वीडियो और प्रतिबंधित किताबों के जरिए खुद ही इस विचारधारा की ओर आकर्षित हुआ। वह 'लोन वुल्फ' हमलों के तरीकों को ऑनलाइन सीख रहा था, जिसमें बिना किसी संगठन की मदद के अकेले ही हमले को अंजाम दिया जाता है। इस तरह के मामलों को पकड़ना सुरक्षा एजेंसियों के लिए काफी कठिन होता है क्योंकि इसमें कोई नेटवर्क या संचार का बड़ा जरिया शामिल नहीं होता। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) भी स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय कर रही है। आरोपी के पास से बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है ताकि उसके ऑनलाइन संपर्कों और गतिविधियों का कच्चा चिट्ठा सामने आ सके। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या वह डार्क वेब या किसी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए सीमा पार बैठे आकाओं के संपर्क में था। इसके साथ ही, यह भी जांचा जा रहा है कि क्या उसने कोचिंग सेंटर में पढ़ाने के दौरान किसी छात्र या अन्य व्यक्ति के दिमाग में भी ऐसी कट्टरपंथी विचारधारा भरने की कोशिश की थी।

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