Pahalgam Attack 2025- आतंकवादियों की पहचान, जल्द कार्रवाई का दावा- जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल
Jammu & Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 16 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में गांधी स्मृति में आयोजित ‘जम्मू-कश्मीर: शांति की ओर’ व्याख्यान....
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 16 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में गांधी स्मृति में आयोजित ‘जम्मू-कश्मीर: शांति की ओर’ व्याख्यान के दौरान ऐलान किया कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों की पहचान कर ली गई है। उन्होंने कहा कि इन आतंकवादियों को जल्द ही मार गिराया जाएगा और कश्मीर घाटी में शांति भंग करने की कोई कोशिश कामयाब नहीं होगी। इस हमले के जवाब में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए भारत ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर कड़ी कार्रवाई की थी।
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बैसरन घाटी में आतंकवादियों ने एक भीषण हमला किया, जिसमें 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मरने वालों में ज्यादातर पर्यटक थे, जिनमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक शामिल थे। आतंकवादियों ने पीड़ितों का धर्म पूछकर और कुछ को कलमा पढ़वाकर उन्हें निशाना बनाया, जिससे यह हमला साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने की साजिश के तौर पर देखा गया। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया और कश्मीर में पर्यटन को लेकर डर का माहौल बना।
पहलगाम हमले के 15 दिन बाद, 6-7 मई 2025 की रात को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना, थलसेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से पाकिस्तान और PoK में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इन ठिकानों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के शिविर शामिल थे, जो बहावलपुर, मुरीदके, गुलपुर, भिंबर, चाक अमरू, बाग, कोटली, सियालकोट और मुजफ्फराबाद में स्थित थे। भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ ने इन ठिकानों की पहचान की थी।
11 मई 2025 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय थलसेना के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, जिनमें यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सिर अहमद जैसे हाई-वैल्यू टारगेट शामिल थे। ये आतंकी 1999 के IC 814 हाइजैक और 2019 के पुलवामा हमले से जुड़े थे। भारतीय वायुसेना ने सैटेलाइट और ड्रोन आधारित सटीक मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिससे बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद का ठिकाना पूरी तरह नष्ट हो गया।
पाकिस्तान ने इन हमलों को “कायराना” और “युद्ध की कार्रवाई” करार दिया, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, न कि नागरिक क्षेत्रों को। ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर गोलीबारी शुरू की, जिसका भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया।
- मनोज सिन्हा का बयान
16 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में गांधी स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में मनोज सिन्हा ने कहा, “पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया गया। हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों की पहचान हो चुकी है। मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूं कि उनका जिंदा रहना अब मुश्किल है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले पांच वर्षों में कई आतंकी कमांडर मारे जा चुके हैं और पहलगाम हमले के आतंकियों का भी यही हश्र होगा। सिन्हा ने कोई निश्चित तारीख नहीं बताई, लेकिन आश्वासन दिया कि जल्द ही “अच्छी खबरें” आएंगी।
सिन्हा ने यह भी कहा कि 2019 में धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास की दिशा में तेज प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि 1.5 लाख करोड़ रुपये से हाईवे बनाए गए, 5,000 से ज्यादा होटल खुले, और 1,013 नए स्टार्टअप शुरू हुए, जिनमें ज्यादातर का नेतृत्व स्थानीय महिलाएं कर रही हैं। पत्थरबाजी अब इतिहास बन चुकी है, और हाल के लोकसभा व विधानसभा चुनावों में एक भी गोली नहीं चली।
पहलगाम हमले के बाद कश्मीर की जनता ने स्वतःस्फूर्त विरोध प्रदर्शन किए, जो पिछले 50 वर्षों में पहली बार देखा गया। सिन्हा ने इसे एक सकारात्मक संकेत बताया, जो दर्शाता है कि आतंकवाद को अब स्थानीय समर्थन नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि आतंकी संगठनों में नई भर्तियां लगभग बंद हो चुकी हैं, जहां पहले हर साल 150-200 युवा भर्ती होते थे, वहीं पिछले साल केवल छह भर्तियां हुईं।
सिन्हा ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर अब “गांधी के सपनों का राज्य” बनने की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की। पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, जो इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे, ने धारा 370 हटने को राष्ट्रीय एकता की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हमले को सुरक्षा चूक बताते हुए ऑपरेशन सिंदूर को जारी रखने की मांग की, लेकिन साथ ही सिन्हा के बयान पर निशाना साधा कि उन्होंने सुरक्षा विफलता की जिम्मेदारी ली है।
कर्नाटक के कांग्रेस विधायक कोथुर मंजुनाथ ने ऑपरेशन सिंदूर को “दिखावा” करार देते हुए इसकी सफलता पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या यह पुष्टि हुई कि मारे गए आतंकी वही थे, जिन्होंने Pahalgam Attack किया था।
वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस और PDP जैसे स्थानीय दलों ने हमले की निंदा की, लेकिन कुछ नेताओं ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत की, जिसे सिन्हा ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की नीति स्पष्ट है कि आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश से कोई बातचीत नहीं होगी।
पहलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया है। सिन्हा ने श्रीनगर और अन्य क्षेत्रों में 24 घंटे गश्त और सुरक्षा ऑडिट के निर्देश दिए हैं। खासकर अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जाएगी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
इसके अलावा, आतंकवादियों के समर्थन में शामिल लोगों पर भी कड़ी कार्रवाई की जा रही है। जून 2025 में तीन सरकारी कर्मचारियों मलिक इशफाक नसीर, एजाज अहमद और वसीम अहमद खान को लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से संबंधों के आरोप में बर्खास्त कर जेल भेजा गया।
Pahalgam Attack जम्मू-कश्मीर में शांति की दिशा में एक बड़ा झटका था, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर और सिन्हा के नेतृत्व में उठाए गए कदमों से भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी मजबूत नीति को दोहराया है। आतंकवादियों की पहचान और उनकी आसन्न कार्रवाई का दावा इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जम्मू-कश्मीर में विकास, पर्यटन और समावेशी प्रगति के साथ-साथ आतंकवाद को खत्म करने की दिशा में यह प्रयास जारी रहेगा।
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