डिमोना परमाणु केंद्र के पास दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें, डिमोना में मची भारी तबाही, 10 वर्षीय बच्चे समेत 47 घायल

डिमोना में हुए इस हमले के बाद से इजरायल के रक्षा कवच 'एरो' और 'पैट्रियट' मिसाइल प्रणालियों की क्षमता पर भी तकनीकी बहस छिड़ गई है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि ईरान ने एक साथ क

Mar 22, 2026 - 11:49
 0  4
डिमोना परमाणु केंद्र के पास दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें, डिमोना में मची भारी तबाही, 10 वर्षीय बच्चे समेत 47 घायल
डिमोना परमाणु केंद्र के पास दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें, डिमोना में मची भारी तबाही, 10 वर्षीय बच्चे समेत 47 घायल

इजरायल के सुरक्षा कवच में बड़ी सेंध: ईरानी मिसाइल हमले से ढही इमारत, मलबे में दबे लोग

शनिवार की रात इजरायल के दक्षिणी हिस्से में स्थित नेगेव रेगिस्तान का डिमोना शहर दहल उठा, जब ईरान की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों ने इस क्षेत्र को अपना निशाना बनाया। यह हमला विशेष रूप से रणनीतिक और सांकेतिक माना जा रहा है क्योंकि डिमोना वही स्थान है जहाँ शिमोन पेरेस नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थित है। ईरान ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि यह कार्रवाई उसके अपने नतान्ज परमाणु संयंत्र पर हुए हालिया हमले के जवाब में की गई है। हमले के दौरान आसमान में तेज रोशनी और उसके बाद होने वाले भीषण धमाकों ने स्थानीय निवासियों में दहशत पैदा कर दी। सुरक्षा प्रणालियों के सक्रिय होने के बावजूद, मिसाइलें आबादी वाले क्षेत्रों और संवेदनशील ठिकानों के करीब गिरने में सफल रहीं, जिससे सुरक्षा तैयारियों की प्रभावकारिता पर गंभीर प्रश्न चिह्न लग गए हैं।

इस मिसाइल हमले के परिणामस्वरूप डिमोना में एक तीन मंजिला आवासीय इमारत पूरी तरह से जमींदोज हो गई। मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव दल को रात भर मशक्कत करनी पड़ी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 47 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है। घायलों में एक 10 वर्षीय बच्चा और एक 40 वर्षीय महिला शामिल हैं, जिन्हें मलबे से सुरक्षित बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया। अस्पताल प्रशासन ने आपात स्थिति की घोषणा करते हुए अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों को तैनात किया है। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि विस्फोट के केंद्र से काफी दूर स्थित इमारतों की खिड़कियां और शीशे भी चकनाचूर हो गए। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो में चारों तरफ मलबे के ढेर और जलती हुई गाड़ियां देखी जा सकती हैं, जो हमले की भयावहता को बयां कर रही हैं।

ईरानी सैन्य अधिकारियों ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे 'नतान्ज का इंसाफ' करार दिया है। उनका तर्क है कि यदि ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाएगा, तो इजरायल के समान ठिकानों को भी सुरक्षित नहीं रहने दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि डिमोना को निशाना बनाकर ईरान ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उसकी मिसाइल तकनीक अब इजरायल के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले परमाणु ठिकानों तक पहुँचने में सक्षम है। यह हमला न केवल सैन्य क्षति पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया था, बल्कि इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी गहरा है। इजरायल के भीतर इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि आधुनिक हवाई रक्षा प्रणालियों के होने के बावजूद बैलिस्टिक मिसाइलों को आबादी वाले क्षेत्रों में गिरने से क्यों नहीं रोका जा सका।अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, परमाणु अनुसंधान केंद्र के मुख्य ढांचे को कोई सीधा नुकसान नहीं पहुँचा है और न ही क्षेत्र में विकिरण के स्तर में कोई असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, रिहायशी इलाकों में हुई तबाही ने मानवीय संकट को गहरा कर दिया है।

मिसाइल गिरने के तुरंत बाद पूरे दक्षिण इजरायल में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया और सायरन की गूँज कई घंटों तक सुनाई देती रही। प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों को बम निरोधक आश्रयों (बंकरों) में रहने की सलाह दी है। डिमोना के मेयर ने स्थिति को "अभूतपूर्व संकट" बताते हुए कहा कि शहर के इतिहास में ऐसा हमला पहले कभी नहीं देखा गया। राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों ने बताया कि धमाके के बाद कई जगहों पर आग लग गई थी, जिसे बुझाने के लिए दमकल विभाग की दर्जनों गाड़ियां तैनात करनी पड़ीं। इलाके की बिजली और पानी की आपूर्ति भी बुरी तरह बाधित हुई है, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी शिविर स्थापित किए हैं और बुनियादी सुविधाएं बहाल करने की कोशिश की जा रही है।

इजरायल के नेतृत्व ने इस हमले को 'युद्ध अपराध' और 'सीधा आक्रमण' करार दिया है। प्रधानमंत्री ने सुरक्षा कैबिनेट की आपात बैठक बुलाकर जवाबी कार्रवाई की संभावनाओं पर चर्चा की। सरकार के भीतर इस बात पर सहमति बनती दिख रही है कि ईरान के इस दुस्साहस का जवाब कड़े सैन्य प्रहार से दिया जाना चाहिए। सैन्य रणनीतिकारों का कहना है कि डिमोना पर हमला एक लाल रेखा को पार करने जैसा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर इजरायल की परमाणु सुरक्षा से जुड़ा मामला है। इस घटना के बाद से ही इजरायली वायुसेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य हलचल बढ़ गई है। आने वाले दिनों में जवाबी हमलों की आशंका से पूरे क्षेत्र में युद्ध के बादल और गहरे हो गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कई देशों ने ईरान से संयम बरतने की अपील की है, जबकि कुछ ने इस हमले को उकसावे वाली कार्रवाई बताया है। कूटनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि यदि इस चक्र को अभी नहीं रोका गया, तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से तत्काल युद्धविराम और शांति वार्ता की अपील की है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि दोनों ही देश पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। ईरान का कहना है कि उसे अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है, जबकि इजरायल अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने की चेतावनी दे रहा है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow