भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई: डोभाल और मंटुरोव ने की रक्षा और औद्योगिक सहयोग पर चर्चा।
International: भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने ....
International: भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम 8 अगस्त 2025 को मॉस्को में उठाया गया। इस दिन रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने सैन्य-तकनीकी सहयोग, नागरिक विमान निर्माण, धातु विज्ञान और रासायनिक उद्योग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। यह वार्ता दोनों देशों के बीच रक्षा और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह बैठक उस समय हुई जब दोनों देश इस साल के अंत में होने वाले 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारियों में जुटे हैं।
अजीत डोभाल 7 अगस्त 2025 को रूस पहुंचे थे। इस दौरे के दौरान उन्होंने न केवल डेनिस मंटुरोव से मुलाकात की, बल्कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु से भी बातचीत की। डोभाल और मंटुरोव की बैठक में द्विपक्षीय सैन्य-तकनीकी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। रूसी दूतावास ने अपनी आधिकारिक घोषणा में बताया कि दोनों पक्षों ने सैन्य सहयोग के सामयिक मुद्दों पर चर्चा की और नागरिक विमान निर्माण, धातु विज्ञान और रासायनिक उद्योग जैसे क्षेत्रों में चल रही संयुक्त परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। रूसी दूतावास ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, “रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल के साथ बैठक की। दोनों पक्षों ने रूस-भारत सैन्य-तकनीकी सहयोग के सामयिक मुद्दों पर चर्चा की, साथ ही अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं के कार्यान्वयन पर भी विचार-विमर्श किया।”
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का इतिहास लंबा और गहरा है। भारत अपनी सैन्य जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा रूस से प्राप्त करता है। रूस ने हाल ही में भारत को अपनी अत्याधुनिक एस-500 वायु रक्षा प्रणाली की पेशकश की है, जिसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सह-उत्पादन का प्रस्ताव शामिल है। इस प्रस्ताव की खासियत यह है कि भारत इस प्रणाली को तीसरे देशों को निर्यात भी कर सकता है, जो पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करने का एक अनूठा तरीका है। यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की गहराई को दर्शाता है। भारत और रूस ने पहले भी कई संयुक्त रक्षा परियोजनाओं में सफलता हासिल की है, जैसे कि ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, जो दोनों देशों के रक्षा सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
इस बैठक में नागरिक विमान निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया। भारत और रूस संयुक्त रूप से विमान निर्माण के क्षेत्र में परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं, जो दोनों देशों की तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं को बढ़ावा दे सकता है। धातु विज्ञान और रासायनिक उद्योग में संयुक्त परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। ये परियोजनाएं न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करेंगी, बल्कि रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देंगी। डेनिस मंटुरोव, जो रूस के व्यापार और उद्योग मंत्री भी हैं, ने भारत के साथ औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई। उन्होंने नागरिक विमान निर्माण में सहयोग को एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया, क्योंकि यह भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल और रूस की तकनीकी विशेषज्ञता को एक मंच पर लाता है।
यह बैठक वैश्विक स्तर पर भारत और रूस के संबंधों पर नजर रखने के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया है, जिसके कारण दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। इसके बावजूद, भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा, क्योंकि यह भारत के लिए सबसे किफायती विकल्प है। इस संदर्भ में, डोभाल और मंटुरोव की बैठक न केवल रक्षा सहयोग को मजबूत करने, बल्कि व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत और रूस के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, जिसमें मुक्त व्यापार समझौते और निवेश सहयोग शामिल हैं।
8 अगस्त को ही, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, आर्थिक और निवेश सहयोग पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत को “बेहद उपयोगी और विस्तृत” बताया और कहा कि उन्होंने यूक्रेन के हाल के घटनाक्रमों पर जानकारी देने के लिए राष्ट्रपति पुतिन का धन्यवाद किया। मोदी ने यह भी कहा कि वे भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन को इस साल के अंत में भारत में होने वाले 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया। यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।
डोभाल की रूस यात्रा इस शिखर सम्मेलन की तैयारियों का हिस्सा मानी जा रही है। 7 अगस्त को डोभाल ने रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु से मुलाकात की और दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इसके अलावा, डोभाल ने राष्ट्रपति पुतिन से भी मुलाकात की, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। इन बैठकों में वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे के साथ सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई।
भारत और रूस के बीच यह साझेदारी केवल रक्षा और उद्योग तक सीमित नहीं है। दोनों देश बहुपक्षीय मंचों, जैसे कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और ब्रिक्स, में भी एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं। डोभाल और शोइगु की मुलाकात में इन मंचों पर सहयोग को और बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारत और रूस का मानना है कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता और सुरक्षा के लिए उनका सहयोग महत्वपूर्ण है। दोनों देशों ने इस साल के अंत में होने वाले शिखर सम्मेलन की तैयारियों पर भी जोर दिया।
इस बैठक का समय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बीच हो रही है। रूस और भारत दोनों ही एक नई विश्व व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रूस ने पहले कहा है कि पश्चिमी देश भारत और चीन के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत और रूस की दोस्ती इस तरह की कोशिशों को नाकाम कर रही है। भारत ने हमेशा अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखा है और रूस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
डोभाल और मंटुरोव की बैठक ने दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते खोले हैं। यह वार्ता न केवल रक्षा क्षेत्र में, बल्कि औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्रों में भी दोनों देशों को करीब लाएगी। भारत और रूस के बीच यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय है, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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